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‘तांडव’ के बहाने ईशनिंदा कानून बनाने की तैयारी में भाजपा

फिल्म तांडव पर आखिर क्यों मचा है तांडव ? देखने में आ रहा हैं कि फिल्म तांडव को लेकर हिंदूवादी संगठन सबसे ज्यादा उग्र हो रहे हैं। इसके पीछे क्या है राजनीतिक दृष्टिकोण ? आइए इसकी तह में जाते हैं।

बात करते हैं तांडव फिल्म के उस दृश्य की जिसको लेकर बवाल मचा हुआ है। तांडव फिल्म में यह दृश्य महज 30 से 40 सेकंड का है । जिसमें वीएनयू में एक कार्यक्रम चल रहा है। स्टेज पर शिव और राम आपस में बातचीत कर रहे हैं। भगवान राम की भूमिका में बने व्यक्ति दूसरी तरफ खड़े भगवान शिव से कहते हैं कि आपके फॉलोवर लगातार कम क्यों हो रहे हैं, जबकि मेरे फॉलोवर लगातार बढ़ रहे हैं । इस पर भगवान शिव कुछ ऐसा करने को कहते हैं , जिससे हिंदूवादी लोगों की भावनाएं भड़क उठी है । उनका कहना है कि फिल्म में भगवान शिव और भगवान राम का मजाक बनाया गया है । कहना अतिशयोक्ति न होगा कि ऐसे स्टेज कार्यक्रमों में न जाने कितने भद्दे और अश्लील मजाक होते रहे हैं। लेकिन कभी इतना विरोध नही हुआ जितना तांडव पर हो रहा है।

विरोध का बिगुल तब से बजाया जा रहा है जब तांडव फिल्म रिलीज भी नहीं हुई थी। लोनी के भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने सबसे पहले फिल्म के डायरेक्टर पर मामला दर्ज कराया था । उसके बाद पूरे देश में तांडव विरोधी माहौल पैदा हो गया। जिसमें हिंदूवादी संगठनों की खुलकर भूमिका सामने आई है।

दरअसल, तांडव फिल्म का राजनीतिकरण हो चुका है। सूत्रों की मानें तो भाजपा इसे अब ईशनिंदा कानून की तरफ ले जा रही है। ईशनिंदा एक कानून है । जिसमें कोई भी व्यक्ति धार्मिक भावनाओं से जुड़े किसी भी भगवान या देवता की आलोचना नहीं कर सकता है। पाकिस्तान और मलेशिया सहित सऊदी अरब, मिस्र , ईरान , इंडोनेशिया में ईशनिंदा कानून पहले से ही बन चुका है । जिसमें मलेशिया और पाकिस्तान में यह कानून सब से सख्त सजा देता है । दूसरे देशों में जहां इसकी सजा में 5 साल का प्रावधान है वही पाकिस्तान में यह सजा 10 साल तक की जा सकती है। यही नहीं बल्कि पाकिस्तान में ईशनिंदा को लेकर मृत्युदंड तक का प्रावधान किया गया है ।

यह भी सर्वविदित है कि धार्मिक पृष्ठभूमि से जुड़े देश ईशनिंदा कानून बनाते रहे हैं। यह सबसे पहले ब्रिटिश राज में आया था । जब ब्रिटिश राज में लगभग हर उस देश में ईशनिंदा का कानून था जहां उनका राज था। भारत की बात करें तो भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 295 ए के अंतर्गत यह कृत्य अपराध माना जाता है। आईपीसी की इस धारा को धार्मिक परिपेक्ष में महत्वपूर्ण माना गया है। लेकिन अब अचानक ईशनिंदा को कानूनी मुल्लमा पहनाने की मांग जोर पकड़ने लगी है ।

राजस्थान के अलवर से भाजपा सांसद योगी बालक नाथ ने इस मामले पर एक ट्वीट किया है। उन्होंने बढ़-चढ़कर ईशनिंदा कानून की पैरवी कर डाली है। योगी बालक नाथ ने इस ट्वीट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए लिखा है कि अब वक्त आ गया है कि देव निंदा कानून बनाया जाए । जो देवी देवताओं सनातन धर्म का अपमान करें उसे कड़ी से कड़ी सजा हो । इसी के साथ ही साउथ दिल्ली से एमसीडी के भाजपा मेयर नरेंद्र कुमार चावला ने भी एक ट्वीट किया है और कहा है कि देवनिंदा कानून बनना चाहिए ।

इस मामले में भाजपा नेता अचानक सक्रिय क्यों हो गए हैं । इसके पीछे राजनीतिक कारण बताए जा रहे हैं। दरअसल भाजपा चाहती है कि देश में ईशनिंदा का कानून बनाया जाए। जिसके बहाने वह फिल्म तांडव को मुद्दा बना रहे है। यहा यह भी बताना जरूरी है कि तांडव फिल्म पहली बार धार्मिक मामले पर विवादास्पद नहीं रही है बल्कि इससे पहले भी कई फिल्मों को धार्मिक मामलों से जोड़कर विवादास्पद बना दिया गया है। जिसमे पद्मावत , अस्सीघाट , पाताललोक आदि शामिल है। यह सब भाजपा का राजनीतिकरण बताया जा रहा है।

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