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अग्निपथ की आंच से झुलसी भाजपा

सशस्त्र बलों में भर्ती के लिए केंद्र सरकार की नई ‘अग्निपथ’ योजना को लेकर हो रहे विरोध- प्रदर्शनों की आंच लगभग पूरे देश में पहुंच गई है। बिहार से हरियाणा तक कई जगहों पर वाहनों को आग लगा दी गई तो कहीं सार्वजनिक संपत्ति के साथ तोड़-फोड़ हुई। यह विरोध एक आंदोलन का रूप लेता जा रहा है ऐसे में कहा जा रहा है कि इसी हफ्ते होने वाले लोकसभा व विधानसभा उपचुनाव सहित साल के अंत में गुजरात, हिमाचल प्रदेश और अगले साल होने वाले 9 अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा अग्निपथ की आंच से झुलस सकती है।

गौरतलब है कि 3 लोकसभा और 7 विधानसभा सीटों पर 23 जून को मतदान होना है। इसी बीच बीजेपी ने अग्निपथ स्कीम को लाकर देश के युवाओं को संदेश देना चाहा था कि सरकार उनके भविष्य का ख्याल रखती है। क्योंकि विपक्ष पहले से ही रोजगार के मुद्दे पर सरकार पर हमलावर है। हालांकि बीजेपी को ये दांव अब उल्टा ही पड़ता दिख रहा है। जिन राज्यों में हाल ही में उपचुनाव होने जा रहे हैं। वहां से काफी तादाद में युवा सेना में जाने की तैयारी कर रहे हैं। अग्निपथ योजना को लेकर इन युवाओं में काफी आक्रोश पैदा हो गया है। युवाओं का आक्रोश सरकारी संपत्ति को नष्ट किए जाने के बतौर देखने को मिल रहा है।

जानकारों की मानें तो आगामी चुनावों में इसका असर देखने को मिल सकता है और बीजेपी को इन चुनावों में नुकसान उठाना पड़ सकता है। गौरतलब है कि संगरूर सीट पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के शपथग्रहण के बाद खाली हुई है। यहां पर आगामी 23 जून को उपचुनाव होने वाला है। चुनाव प्रचार यहां पर जोर-शोर से चल रहा है। हालांकि इसी बीच केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना ने प्रत्याशियों की मुसीबतें बढ़ा दी है। यहां पर नेताओं की रैलियों और बयानों में भी अग्निपथ योजना का असर दिखने लगा है। उधर, सूबे के सीएम भगवंत मान ने पीएम मोदी से अग्निपथ स्कीम को वापस लेने की अपील की है। पंजाब में भाजपा के सहयोगी दल पंजाब लोक कांग्रेस के अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर ने भी अग्निपथ योजना की समीक्षा की मांग की है।

यूपी की सियासत में अग्निपथ योजना ने बीजेपी की मुश्किलें दोगुनी कर दी है। यूपी के आजमगढ़ और रामपुर में आगामी उपचुनाव में इसका असर देखने को मिल सकता है। आजमगढ़ और पूर्वांचल से बड़ी संख्या में युवा सेना में भर्ती के लिए तैयारी करते है। केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना का यहां के युवाओं ने जमकर विरोध किया है। आजमगढ़ और रामपुर लोकसभा सीट पर 23 जून को चुनाव होना है। इन दिनों यूपी की सियासत में गर्मी बढ़ी हुई है। इन दोनों ही सीटों पर बीजेपी और सपा की सीधी टक्कर मानी जा रही है। लोगों का कहना है कि इन दोनों सीटों पर बीजेपी की जीत आसान नहीं दिख रही है। आजमगढ़ सीट सपा प्रमुख अखिलेश यादव के छोड़ने के बाद खाली हुई थी।

जबकि रामपुर सीट आजम खां के छोड़ने पर खाली हुई। वर्तमान में सपा के ये दोनों नेता विधायक हैं। इन दोनों ही लोकसभा सीटों पर पहले से ही सपा का कब्जा रहा है। युवाओं का कहना है कि इस योजना के तहत चार साल में ही सेवानिवृत्त होने के बाद कहां जाएंगे? हालांकि केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि उनके भविष्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ नही होगा। अग्निपथ योजना के खिलाफ हिंसक विरोध-प्रदर्शन के बाद सरकार ने उम्र सीमा 21 से बढ़ाकर 23 भी कर दिया है। बताया जा रहा है कि दो साल कोरोना के चलते आर्मी भर्ती प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न होने के कारण बहुत से न्यूनतम उम्र सीमा पार कर चुके थे। जिसके कारण यह फैसला लिया गया है। हालांकि उपचुनाव में अग्निपथ योजना चुनावी मुद्दा बन चुका है। जिसको भुनाने में विरोधी दल पीछे भी नहीं हटने वाली हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो बीजेपी के लिए यह गेम उल्टा भी पड़ गया है। आजमगढ़ में सपा प्रत्याशी धर्मेंद्र यादव युवाओं को संबोधित करते वक्त इस पर बीजेपी को घेरते हुए नजर आ रहे हैं। वह लोकसभा पहुंचकर इस योजना के विरोध की बातें कह रहे हैं। वहीं बीजेपी प्रत्याशी दिनेश लाल यादव (निरहुआ) इस योजना को लेकर यह कहते हुए पार्टी का बचाव कर रहे हैं कि पूरी दुनिया में अग्निपथ स्कीम की तारीफ हो रही है।

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