नौ राज्यों की 71 सीटों के लिए 29 अप्रैल को चौथे चरण का चुनाव संपन्न होने जा रहा है। इस चुनाव पर देश भर के लोगों और तमाम राजनीतिक पार्टियों की इसलिए भी निगाहें टिकी हैं कि तीसरे चरण की तरह इसमें भी भाजपा के लिए अग्नि परीक्षा है। उसके सामने अहम चुनौती है कि वह पिछली बार जीती गई सीटों को कैसे बरकरार रख पाती है और नई सीटों पर कैसे परचम लहरा सकती है।
गौरतलब है कि चौथे चरण में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, बंगाल, महाराष्ट्र, झारखण्ड, ओडिशा जम्मू- कश्मीर सहित नौ राज्यों की जिन सीटों के लिए चुनाव होना है उनमें से 45 सीटों पर 2014 में भाजपा को जीत हासिल हुई थी। इन 45 सीटों पर कब्जा बरकरार रखने के लिए पार्टी जोर-शोर से लगी हुई है। उत्तर प्रदेश की सीटें खासकर पार्टी के लिए अहम हैं। यहां जिन 13 सीटों पर मतदान होना है उनमें से 12 सीटें अभी भाजपा के कब्जे में हैं, जबकि खीरी लोकसभा सीट पर सपा के सांसद हैं। इसी तरह राजस्थान की जिन 13 सीटों के लिए मतदान होना है, उन सभी पर पिछले चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार जीते थे। मध्य प्रदेश की छह सीटों में से पांच- सीधी, शहडोल, जबलपुर, मांडला, बालाघाट पर भाजपा के सांसद हैं, जबकि छिंदवाड़ा की परंपरागत सीट कांग्रेस के कब्जे में है। छिंदवाड़ा सीट पर 1980 से कांग्रेस के कमलनाथ जीतते आ रहे हैं।
उत्तर प्रदेश की जिन 13 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। उनमें 5 लोकसभा सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं और इन सभी पांचों सीटों पर अभी बीजेपी का कब्जा है। लेकिन इस बार सपा-बसपा गठबंधन के चलते इन सीटों के राजनीतिक समीकरण डगमगाने के आसार हैं। यही चिंता भाजपा के रणनीतिकारों को सताए जा रही है। हालांकि रणनीतिक रूप से बीजेपी ने पांच में चार सांसदों के टिकट काटकर नए चेहरों को टिकट दिए हैं। लेकिन फिर भी बीजेपी के लिए इन सीटों पर जीत दोहराना आसान नहीं दिख रहा है।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक अगले चार चरण भी भाजपा के लिए आसान नहीं होंगे। उन चार चरणों में जिन 242 सीटों पर चुनाव होने हैं उनमें से 162 यानी 67 प्रतिशत सीटें 2014 में भाजपा ने जीती थीं। ऐसे में अब भाजपा अपने गढ़ को बचाने के लिए पूरी जोर आजमाइश कर रही है। संभावना है कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन सीटों के लिए 70 से 80 रैलियां और 20 रोड शो कर सकते हैं।
आगामी चार चरणों में उत्तर प्रदेश की 54 सीटों पर चुनाव होने हैं। इनमें से 52 सीटें अभी भाजपा के पास है। इसी तरह महाराष्ट्र में 17 सीटें हैं। जिनमें से 16 एनडीए के पास हैं। मध्यप्रदेश की 29 में से 27 सीटें, राजस्थान की सभी 25, बिहार की सभी 26 सीटें, झारखंड की 14 में से 12, हरियाणा की 10 में 7 भाजपा ने जीती थी।
चुनाव प्रचार की यदि बात करें तो पीएम मोदी ने अब तक यूपी में पहले तीन चरणों की 26 सीटों के लिए 7 रैलियां की हैं। जबकि पश्चिम बंगाल में पहले 4 चरणों की 18 सीटों के लिए 7 रैलियां की हैं। बंगाल में पहले 3 चरणों में 10 सीटों पर चुनाव हुए हैं। चौथे चरण में 8 सीटों पर चुनाव है। राज्य में 42 सीटें हैं। भाजपा को यहां उम्मीदें हैं।

