मध्य प्रेदश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को राज्य सभा में पहुंचने से रोकने के लिए भाजपा ने हर संभव कोशिशों के बीच दलित कार्ड तक खेल डाला, लेकिन वह असफल रही। दिग्विजय को न केवल कांग्रेस के 54 विधायकों ने प्रथम वरीयता में वोट दिये, बल्कि भाजपा के तीन विधायकों ने भी उनके पक्ष में क्रॉस वोटिंग की।
गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह भाजपा पर निरंतर हमलावर रहे हैं। कोरोना महामरी को लेकर उन्होंने केंद्र सरकार के खिलाफ कड़े तेवर अपनाए। कहा कि प्रधानमंत्री इस महामारी को रोक पाने में बुरी तरह असफल रहे हैं। केंद्र नीतियों पर वे सवाल उठाते रहे हैं। मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार को वे जन विरोधी और भ्रष्टाचारी बताने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
हाल में राज्य के कुछ भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री शिवराज चौहान के खिलाफ एक फेक वीडियो शेयर किये जाने पर दिग्विजय सिंह के विरुद्ध भोपाल के एक थाने में एफआईआर दर्ज करवाई तो इस पर भी दिग्विजय सिंह के स्वर धीमे नहीं पड़े। उन्होंने ऐलान किया है कि 2019 में राहुल गांधी के खिलाफ एक फेक वीडियो ट्वीट किये जाने को लेकर वे शिवराज चौहान के खिलाफ उसी थाने में जाएंगे जिसमें उनके खिलाफ एफआईआर करवाई गई है।
दिग्विजय ने और जोर से हमला बोल डाला कि उन्होंने शिवराज सरकार द्वारा की जा रही लूट को लेकर आवाज उठाई तो उनकी आवाज कुचलने की नीति अपनाई जा रही है। शायद दिग्विजय के ये आक्रामक तेवर ही भाजपा को खल रहे थे। लिहाजा राज्य सभा चुनाव में पार्टी उन्हें सबक सिखाने के लिए इस कदर व्यस्त रही कि उसने दलित कार्ड तक खेल दिया।
भाजपा ने इस बात को मुद्दा बनाया कि प्रथम वरीयता में अनुसूचित वर्ग के फूल सिंह बरैया के बजाए कांग्रेस ने दिग्विजय को तरजीह देकर साबित कर दिया कि उसका असली चेहरा दलित विरोधी है।
दरअसल, दिग्विजय के विरोध के बहाने भाजपा ने राज्य के दलित वोटों को अपने पक्ष में गोलबंद करने की भी चाल चली है। उसकी नजर राज्य की उन 24 विधानसभा सीटों के लिए होने वाले उप चुनाव पर भी है जिनमें से 9 सीटें अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं। अनुसूचित जाति वर्ग की 6 सीटें उसी ग्वालियर -चंबल अंचल की हैं जहां के फूल सिंह बरैया कांग्रेस की ओर से राज्यसभा के लिए दूसरे उम्मीदवार थे।
कांग्रेस ने रणनीति के तहत अपने दिग्गज नेता दिग्विजय को जिताने के लिए प्रथम वरीयता के 52 वोट उन्हें देने की रणनीति बनाई तो भाजपा को मुद्दा मिल गया कि आखिर यह रणनीति अनुसूचित वर्ग के फूल सिंह बरैया के लिए भी तो बनाई जा सकती थी। बहरहाल दिग्विजय सिंह राज्य सभा में पहुंच ही गए हैं।
-दाताराम चमोली

