देश में दूसरी लहर में जहां कोरोना के मरीज कम हो रहें हैं वही ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। देश के कई हिस्सों में इसके चलते कई लोगों को मौत हो चुकी है । अकेले महाराष्ट्र राज्य में ही ब्लैक फंगस से करीब 90 लोगों की मौत हो चुकी हैं। ऐसे में केंद्र सरकार ने राज्यों से इसे महामारी अधिनियम 1897 के तहत महामारी घोषित करने का आग्रह किया है। जिसके मद्देनजर कई राज्यों ने ब्लैक फंगस को महामारी घोषित कर दिया है। लेकिन सिर्फ महामारी घोषित करने से ही इस बीमारी पर रोक नही लगाई जा सकती है।
ब्लैक फंगस यानि (म्यूकरमाइकोसिस) एक ऐसा खतरनाक इंफेक्शन है, जो कोरोना महामारी के आने से पहले बहुत ही कम लोगों को होता रहा है। बताया जाता है कि लाखों में किसी एक को ही यह संक्रमण होता था। लेकिन पिछले कुछ दिनों के दौरान कोरोना से संक्रमित मरीजों में यह इंफेक्शन बड़ी तेजी से फैला है। यह इतना खतरनाक संक्रमण है कि इसके शिकार करीब आधे लोगों की जान चली जाती है। अब इसको लेकर एम्स के डाक्टरों ने एक आश्चर्यजनक मामला उजागर किया है। जिसमें कि हम जिस मास्क को लगा रहे हैं अगर उसे एक सप्ताह तक बिना बदले या धोए हुए लगाते रहे तो ब्लैक फंगस का खतरा बढ जाता है।

एम्स के न्यूरोसर्जरी प्रोफेसर डॉ पी शरत चंद्रा का कहना है कि यह फंगल इंफेक्शंस नया नहीं है। लेकिन यह महामारी के मुताबिक कभी इतना नहीं बढ़ा है, जितना अब बढ रहा है।।डॉ चंद्रा के मुताबिक ब्लैक फंगस होने की सबसे बड़ी वजह अनियंत्रित डायबिटीज, टोसीलीजुमैब के साथ स्टेरॉयड्स का सिस्टमैंटिक प्रयोग, वेंटिलेशन पर मरीज, सप्लीमेंटल ऑक्सीजन लेना है। अगर कोरोना इलाज के छह हफ्ते के भीतर इनमें से कोई भी फैक्टर्स है तो उन्हें ब्लैक फंगस होने का सबसे अधिक खतरा है।
डॉ चंद्रा ने कहा कि सिलिंडर से सीधे कोल्ड ऑक्सीजन देना बहुत खतरनाक है । जिससे इसके ज्यादा चांस हो जाते हैं। साथ ही वह कहतें हैं कि एक सप्ताह या इससे अधिक तक एक मास्क का प्रयोग करने पर ब्लैक फंगस होने की आशंका रहती है। डॉ चंद्रा के मुताबिक जिन्हें ब्लैक फंगस होने की आशंका अधिक है, उन्हें एंटी-फंगल ड्रग पोसाकोनाजोल दिया जा सकता है।

