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किसान आंदोलन को बैसाखी बनाने में जुटे चौटाला 

वर्षों से राजनीतिक वनवास झेल रहे हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला एक बार फिर अपने सियासी वजूद के लिए छटपटा रहे हैं। इसके लिए उन्हें राज्य में चल रहा किसान आंदोलन अच्छा रास्ता दिखाई दिया। वे इस आंदोलन से जुड़ गए, लेकिन दिक्कत यहां भी आ गई। हरियाणा के जींद जिले में चल रहे किसान आंदोलन के धरने पर वह गए तो वहां उनके हाथ से माइक छीन लिया गया। उन्हें मंच शेयर नहीं करने दिया गया। हालाँकि यह किसान संघर्ष समिति के नियम के तहत हुआ है, जिसमे किसी नेता को मंच शेयर नहीं करने दिया जाता है। इससे पहले कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू के साथ भी ऐसी ही घटना सामने आ चुकी है। हरियाणा के चार बार के सीएम रह चुकेओम प्रकाश चौटाला एक बार फिर से राजनीति की मुख्यधारा में जुड़ना चाहते हैं। उनकी पार्टी इंडियन नेशनल लोकदल फिलहाल मृतप्राय पड़ी है। जिसे वह किसान आंदोलन से फूंकने की रणनीति बना रहे हैं। बहरहाल, चौटाला किसान आंदोलन को अपनी पार्टी की बैसाखी बनाने में जुटे हैं।
सर्वविदित है कि ओम प्रकाश चौटाला के जेल जाने के बाद उनके छोटे पुत्र अभय चौटाला ने पार्टी की कमान संभाली। लेकिन वह पूर्व की भांति पार्टी को समस्त हरियाणा में सक्रिय नहीं कर पा रहे थे। कहा जाने लगा था कि चौटाला की इंडियन नेशनल लोकदल सिर्फ एक जिले तक ही सीमित होकर रह गई है। इसके मद्देनजर एक बार फिर चौटाला इंडियन नेशनल लोकदल को जीवित करने की जद्दोजहद में जुट गए हैं।
इस बार वह देशव्यापी किसान आंदोलन चला रही किसान संघर्ष समिति से जुड़कर किसानों के मुद्दे पर सक्रिय होने की तैयारी कर रहे हैं। इसके मद्देनजर ही वह एक सप्ताह पहले हरियाणा के पलवल और गाजीपुर बॉर्डर पर चल रहे धरने में पहुंचे थे। जहा उन्होंने किसान आंदोलन को अपना समर्थन दिया था। इसी के साथ ही उनकी भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत से एक गुप्त मंत्रणा भी हुई। हालाँकि उनकी टिकैत से क्या बात हुई यह तो सामने नहीं आया है, लेकिन इससे चर्चाओं को बल मिल गया। कहा जा रहा है कि इनेलो भाकियू से पोल्टिकली पेक्ट कर सकती है।
यहां यह यह भी बताना जरूरी है कि वर्ष 2013 में ओम प्रकाश चौटाला को 10 साल की सजा हुई थी। जिसमें उन्हें हरियाणा में हुई जेबीटी (जूनियर बेसिक ट्रेड ) की भर्ती में आरोपी ठहराया गया था। सन 1999 से लेकर 2000 तक हरियाणा में 3206 जेबीटी शिक्षकों की भर्ती की गई थी। उस दौरान हरियाणा के सीएम ओम प्रकाश चौटाला ही थे। तब चौटाला पर शिक्षक भर्ती में भ्रष्टाचार करने के आरोप लगे थे।
जिसके चलते जांच हुई। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि ओम प्रकाश चौटाला ने हरियाणा का मुख्यमंत्री रहते जेबीटी भर्ती कराने के लिए तय मानकों के विपरीत काम किया। इसमें जो शिक्षकों के लिए कोर्स किया जाना जरूरी था उसकी जरूरत नहीं समझी गई। ओम प्रकाश चौटाला ने तब 18 जिलों की चयन समिति बनाई। जिसमें उन्होंने सभी 18 जिलों के अध्यक्षों को हरियाणा भवन में बुलाकर एक लिस्ट तैयार कर ली। इस लिस्ट में अंकित किए गए नामों को ही जेबीटी शिक्षक बना दिया गया।
 जांच में यह स्पष्ट हुआ कि ओम प्रकाश चौटाला ने इस भर्ती के अयोग्य लोगों से पैसा लिया और उन्हें शिक्षक बना दिया। इसके बाद वह 10 साल तक जेल में रहे। कुछ दिन पहले ही वह तिहाड़ जेल से सजा पूरी करने के बाद लौटे हैं। जब ओम प्रकाश चौटाला जेल में थे तब उनके दूसरे पुत्र अजय चौटाला के बेटे दुष्यंत चौटाला ने इंडियन नेशनल लोकदल से बगावत कर दी थी।
इंडियन नेशनल लोकदल से बगावत करने के बाद दुष्यंत चौटाला ने नई पार्टी जन नायक जनता पार्टी का गठन कर लिया । इसके बाद दुष्यंत चौटाला के गत विधानसभा चुनाव में आठ विधायक जीते थे। दुष्यंत ने भाजपा से पैक्ट किया। इसके चलते ही आज उनकी पार्टी हरियाणा में भाजपा सरकार की सहयोगी पार्टी बनी हुई है । साथ ही दुष्यंत चौटाला को हरियाणा में उप मुख्यमंत्री बनाया गया है।
 जब से किसान आंदोलन शुरू हुआ तब से कयास लगाए जा रहे थे कि अपने विरासत की राजनीति को आगे बढ़ाते हुए दुष्यंत चौटाला भाजपा से अलग होकर किसान आंदोलन को समर्थन देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ । दुष्यंत चौटाला आज भी सत्तारूढ़ भाजपा के साथ बने हुए हैं।
फिलहाल, ओम प्रकाश चौटाला किसान आंदोलन में शरीक होकर यह मैसेज देना चाहते हैं कि वह किसानों के हित चिंतक हैं। वह पहले से ही किसानों की राजनीति करते रहे हैं। क्योंकि हरियाणा में किसान वर्ग बहुलता में है। उनकी पार्टी का वोट बैंक भी किसान रहा है। ऐसे में वह एक बार फिर किसानों को अपनी और आकर्षित करने की कोशिशों में जुट गए हैं।
 ओम प्रकाश चौटाला यह बखूबी जानते हैं कि इस समय प्रदेश में सबसे बड़ा आंदोलन कोई चल रहा तो वह किसान आंदोलन ही है। इसलिए पार्टी को वह किसान आंदोलन के बलबूते फिर से खड़ी करने का सपना संजोए हुए हैं। याद रहे कि किसान आंदोलन में ओम प्रकाश चौटाला के पुत्र अभय चौटाला पहले से ही सक्रिय रहे हैं। अभय समय-समय पर गाजीपुर बॉर्डर सहित कई जगह चल रहे आंदोलनों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहे हैं।

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