देश में बाल तस्करी के मामले बढ़ते जा रहे हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार, हर आठ मिनट में एक बच्चा गायब हो होता है। ज्यादातर मामलों में बाल तस्करी को अंजाम देने वाले गिरोह बच्चों को नौकरी का अवसर देकर धोखे से तस्करों के हाथों सौंप देते हैं। देश में श्रम , भीख मांगने और यौन शोषण जैसे विभिन्न कारणों से कई बच्चों की तस्करी की जाती है। हाल ही में बाल तस्करी से जुड़े एक मामले का खुलासा दिल्ली में किया गया है। इस मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा आठ लोगों को हिरासत में लिया गया है । जिनमें पांच महिलाएं भी शामिल हैं। इन पर आरोप लगाया गया है कि ये अलग-अलग राज्यों से नवजात बच्चों की खरीद -फरोख्त करते थे।.दिल्ली पुलिस ने इन आरोपियों के चंगुल से 10 से 15 दिन की बच्ची को भी बचाया है। हालांकि अभी कुछ ही आरोपियों पीयूष अग्रवाल, राजिन्दर और रमन की पहचान हो सकी है। महिला आरोपी में से दो दिल्ली और तीन पंजाब से।
इस मामले को लेकर रोहिणी के डीसीपी गुरइक़बाल सिंह सिद्धू का कहना है कि 20 फ़रवरी को एक फोन कॉल के ज़रिए बेगमपुर पुलिस स्टेशन क्षेत्र में बच्चों के खरीद-बिक्री की ख़बर मिली। ये खबर मिलते ही पुलिस टीम गठित कर बताए गए पते पर पहुँची। जहां एक घर में से दो महिलाओं के पास से एक नवजात बच्ची मिली। पूछताछ में जब पुलिस ने बच्ची के माता पिता के बारे में उन महिलाओं से पूंछा तो वह नहीं बता पाई । लेकिन जब पुलिस द्वारा सख्ती से पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि वो एक अंतरराज्यीय मानव तस्करी गिरोह चलाते हैं। ये गिरोह अलग-अलग राज्यों में नवजात बच्चों को खरीदता और बेचता है।
पुलिस के कहने अनुसार बच्ची को पंजाब के मुक्तसर से आरोपियों ने 50 हज़ार रुपये में खरीदा-बेचा था। वो लोग बच्ची के लिए किसी खरीददार का इंतेजार कर रहे थे। दोनों महिला आरोपियों पर पुलिस ने आईपीसी और जुविनाइल जस्टिस एक्ट (जेजेए ) के तहत मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया है। गिरोह के दुसरे सदस्यों तक पहुँचने के लिए टीम गठित की गई है। जांच के दौरान टीम ने पंजाब में भी कई जगहों पर छापे मारे। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट अनुसार दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच में एक महिला पर इससे पहले भी मानव तस्करी के आरोप लग चुके हैं। गिरोह में शामिल लोग बच्ची को 10 से 15 लाख में बेचने वाले थे। इससे पहले गिरोह दस फरवरी को एक नवजात बच्चे को बेच चुका था।

