त्रिपुरा में मुख्यमंत्री बिप्लब देब के खिलाफ सत्ताधारी भाजपा के विधायकों ने बगावत कर दी है। मुख्यमंत्री को हटाने की मांग को लेकर बागी विधायक हाई कमान बातचीत करने पहुंचे हैं। बागी विधायकों का नेतृत्व राज्य के स्वास्थ्य मंत्री और पार्टी नेता सुदीप रॉय बर्मन कर रहे हैं। बर्मन के नेतृत्व में लगभग एक दर्जन विधायकों के एक समूह ने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और महासचिव बीएल संतोष से मिलने का समय मांगा है।
बागी विधायकों में से एक का कहना है कि मुख्यमंत्री अपने कम महत्वपूर्ण बयानों से पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं। बिप्लव देव पर कमजोर नेतृत्व और कुशासन का आरोप रहा है।
विद्रोही समूह के एक विधायक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि उनका ग्रुप केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने की कोशिश कर रहा है। विधायक ने कहा,”हम मुख्यमंत्री को तानाशाही रवैये के बारे में आलाकमान को सूचित करना चाहते हैं।”
अगर बिप्लव पद पर बने रहेंगे तो राज्य में विपक्ष मजबूत हो जाएगा
बागी विधायकों का कहना है कि सभी विधायक पार्टी के साथ हैं और दूसरी बार राज्य में भाजपा की सरकार चाहते हैं, लेकिन वर्तमान नेतृत्व के चलते त्रिपुरा में कांग्रेस और वामपंथी ताकतें मजबूत होंगी। उनका कहना है कि सीएम के कुछ बयान उन्हें आहत कर रहे हैं।
भाजपा और उसके सहयोगी IEPFT ने 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल की। भाजपा ने राज्य में 25 साल पुराने वाम शासन को उखाड़ फेंका। 60 सदस्यीय विधानसभा में 36 भाजपा विधायक और 8 IEPFT विधायक हैं।
हालांकि, मुख्यमंत्री बिप्लब देब के करीबी सहयोगी ने कहा कि बगावत इतनी बड़ी नहीं है। जितना कि लगता है। सात या आठ विधायक ऐसे हैं जो राज्य में सरकार के अच्छे विकास कार्यों में हस्तक्षेप कर रहे हैं। इनमें से ज्यादातर कांग्रेस से हैं। जबकि पार्टी के पुराने सहयोगियों ने मुख्यमंत्री देब के नेतृत्व में विश्वास व्यक्त किया है।

