Uttarakhand

मुफ्त के मंडुवा पर विवाद

सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों में गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले उपभोक्ताओं को एक किलोग्राम साबुत मंडुआ मुफ्त देने और घटिया गुणवत्ता का दो किलोग्राम नमक दिए जाने की योजना पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। जबरन थोपे जा रहे मंडुवा और नमक के चलते हजारांे राशनकार्ड धारकांे में रोष पनप रहा है। विभाग द्वारा मुफ्त में एक किलोग्राम साबुत मंडुआ दिए जाने की बात कही जा रही है जबकि इसके लिए एक किलोग्राम चावल की कटौती की गई है। साथ ही दो किलोग्राम आयोडीनयुक्त नमक भी खरीदने को मजबूर किया जा रहा है जिसके चलते अधिकांश राशन की दुकानांे में राशन विक्रेताओं और कार्डधारकों में जमकर विवाद हो रहे हैं। इस मामले पर जन संघर्ष मोर्चा के रघुनाथ सिंह नेगी ने खाद्य और नागारिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों पर गम्भीर आरोप लगाते हुए एक प्रेसवार्ता की। जिसमें उन्होंने आरोप लगाए कि राज्य की खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री रेखा आर्या के तुगलकी फरमान के चलते राज्य के लाखांे गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले राशनकार्ड धारकांे को घटिया गुणवत्ता का नमक जबरन बेचा जा रहा है। इस नमक को आयोडीनयुक्त नमक बताकर बेचा जा रहा है। नेगी ने बकायदा प्रेसवार्ता में खुले बाजार के नमक और सरकारी सस्ते गल्ले में बेचे जाने वाले आयोडीन नमक को पत्रकारों के सामने ही पानी में घोलकर दिखाते हुए साफ कर दिया कि खुले बाजार में मिलने वाला नमक पानी में घुलने के बाद पानी एकदम से साफ नजर आ रहा है जबकि आयोडीनयुक्त नमक का पानी बेहद गंदा और अशुद्ध दिखाई दिया।

यही नहीं नेगी ने आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार जान- बूझकर आयोडीन नमक के नाम पर नमक कारोबारियों को लाभ पहुंचाने के लिए ही राशनकार्ड धारकों को जबरन नमक बेचने की योजना लाई है।
नेगी ने खाद्य मंत्री को ही निशाने पर लेते हुए आरोप लगाया है कि मंत्री के नासमझी के चलते विभाग एक किलो साबुत मंडुवा बीपीएल कार्ड धारकों को दे रहा है जबकि इसे मुफ्त में दिया जा रहा, बताया जा रहा है लेकिन हकीकत में इसके लिए कार्डधारकांे को एक किलो चावल कम कर दिया गया है। सबसे बड़ी समस्या तो यह है कि एक किलो साबुत मंडुवा को चक्की में पिसवाया ही नहीं जा सकता। कम से कम पांच किलो होने के बाद ही मंडुवे को चक्की में पिसवाया जा सकता है। अब एक किलो मंडुवे को पिसवाने के लिए कार्डधारकों को पांच माह तक मंडुवे को एकत्र करना पड़ेगा तब वह उस मंडुवे को चक्की में पिसवा कर आटा बना सकता है। खुले बाजार में साबुत मंडुवा 35 से 40 रुपए प्रति किलो है। मंडुवा मानव शरीर के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। इसमें कैल्सियम और लौह तत्वांे की भरमार होती है जिसके कारण इसे सुपर फूड माना गया है। खाद्य और नागरिक आपूति विभाग द्वारा जितनी भी राशन कार्डधारकों के लिए योजनाएं चलाई गई हैं वे सभी योजनाएं सवालों के घेरे में ही रही हैं। पूर्व में दो किलोग्राम दालांे को भी सभी राशनकार्ड उपभोक्ताओं को बाजार से कम कीमत पर दिया गया लेकिन हकीकत में खुले बाजार में उक्त दालों की कीमत राशन की दुकानों से कम ही रही है। साथ ही घुन लगी हुई दालों को भी जबरन राशनकार्ड

उपभोक्ताओं को दिया जाता रहा जिससे विवाद भी जमकर हुए। इसी तरह से घटिया और सड़ा हुआ चावल भी राशन की दुकानों में राशन कार्डधारकांे पर थोपा जाता रहा। वितरित किए जाने वाले चावल की गुणवत्ता इतनी घटिया थी कि अनेक कार्डधारकांे ने चावल लेने से ही मना कर दिया। देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल द्वारा देहरादून के खाद्य गोदाम में छापा मारा तो हकीकत सामने आ गई। हजारांे टन सड़ा हुआ चावल राशनकार्ड की दुकानों को आवंटित किया जा रहा है। जिलाधिकारी द्वारा मोैके पर ही सड़े हुए चावल को निरस्त करवाकर अच्छी गुणवत्ता का चावल आवंटित करने का आदेश दिया। इसके बाद राशन की दुकानों में साफ और बेहतर गुणवत्ता का चावल मिलने लगा।

बात अपनी – अपनी 

आयोडीन नमक के नाम पर राज्य के गरीब राशन कार्डधारकों को लूटा जा रहा है। खाद्य आपूर्ति विभाग और खाद्य मंत्री के तुगलकी फरमान के कारण आज गरीब राशन कार्डधारक परेशान हो रहा है। घटिया क्वालिटी का नमक बेचा जा रहा है। अगर नमक नहीं खरीदोगे तो राशन दुकानदार राशन नहीं देने की धमकी दे रहा है जिससे मजबूरी में घटिया नमक खरीदना पड़ रहा है। एक किलो साबुत मंडुवा मुफ्त में देने की बात कही जा रही है लेकिन इसके लिए एक किलो चावल कम कर दिया है तो मुफ्त कहां से हुआ। अब मंत्री या उनका विभाग बताए कि एक किलो साबुत मंडुवे को कहां पीसा जाएगा और कैसे मंडुवे का आटा खाया जाएगा। आटा चक्की में कम से कम पांच किलो मंडुवा होगा तो ही चक्की वाला मंडुवा को पीसकर आटा बनाएगा। अब 5 महीने तक मंडुवा इक्कठा करो फिर जाकर मंडुवे का आटा खाना पड़ेगा। यह सरकार और खाद्य विभाग का बगैर होमवर्क के ही योजना थोपने का काम किया गया है। रघुनाथ सिंह नेगी, अध्यक्ष उत्तराखण्ड जन संर्घष मोर्चा :

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