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सीरिया में लोकतंत्र का सवेरा

बीते 24 बरसों से एक परिवार की तानाशाही से त्रस्त अरब गणराज्य सीरिया में लोकतंत्र का सवेरा होने की सम्भावनाओं ने जन्म ले लिया है। तानाशाह राष्ट्रपति बशर अल असद देश छोड़ रूस भाग गए हैं और देश की सत्ता दमिश्क विद्रोहियों ने अपने हाथों में ले ली है। सीरिया में यह तख्तापलट 13 साल के गृहयुद्ध बाद हुआ है। इस युद्ध में पांच लाख से ज्यादा लोग मारे गए और लाखों बेघर हो गए। अब अमेरिका, तुर्की, यूरोपीय संघ और अरब देशों के प्रतिनिधि नए सीरिया के निर्माण को लेकर बातचीत का दौर शुरू कर चुके हैं

सीरिया तानाशाह अल असद के शासन से मुक्त हो चुका है और सीरिया में अब एक नए युग की शुरुआत हो रही है, जिसकी खुशी पूरे सीरिया में मनाई जा रही है। विद्रोहियों द्वारा आठ दिसम्बर को सीरिया को राष्ट्रपति बशर अल असद के शासन से मुक्त घोषित कर दिया गया है। जिसके बाद लोग जश्न मनाते नजर आए हैं। अल असद शासन मुक्त सीरिया ने विद्रोही कमांडर अबू मोहम्मद अल-जोलानी का राजधानी दमिश्क में भव्य स्वागत किया। विद्रोही समूह हयात तहरीर अल-शाम (एचटीएस) के अनुसार वे सीरिया में शांतिपूर्ण तरीके से सत्ता का हस्तांतरण चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जब तक हस्तांतरण नहीं होता तब तक सीरिया में असद सरकार के प्रधानमंत्री मोहम्मद अल जलाली देश की अंतरिम सरकार के तौर पर कार्यरत रहेंगे। ऐसे में पूरी संभावना है कि सीरिया का शासन आने वाले समय में नए हाथों में दिखेगा। सीरिया के अंतरिम प्रधानमंत्री अबू मोहम्मद अल- जुलानी ने विद्रोहियों के नेतृत्व वाली साल्वेशन सरकार को सत्ता सौंपने पर सहमति व्यक्त की है।

गौरतलब है कि एचटीएस के प्रमुख अबू मोहम्मद अल-जुलानी को अमेरिका द्वारा 2013 में आतंकवादी घोषित किया गया था। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन अल-कायदा ने उन्हें असद की सरकार गिराने और सीरिया में शरिया कानून लागू करने का कार्य सौंपा था। विद्रोही गुट हयात तहरीर अल-शाम (एचटीएस) ने 27 नवम्बर को सीरियाई राष्ट्रपति असद के खिलाफ जंग छेड़ते हुए उन्हें मात्र 11 दिन के अंदर सत्ता से बेदखल कर दिया। जिसके बाद सीरियाई राष्ट्रपति दबे पांव रूस की शरण में पहुंच गए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बशर अल असद ने अपने रूस जाने की भनक किसी को नहीं होने दी। इस जंग के दौरान हयात तहरीर अल-शाम (एचटीएस) के नेतृत्व में सशस्त्र सीरियाई विद्रोहियों ने राष्ट्रपति बशर अल-असद द्वारा हिरासत में लिए गए सैकड़ों कैदियों को रिहा कर दिया है। जिन्हें राष्ट्रपति की आलोचना करने या विद्रोह करने के लिए तरह-तरह से प्रताड़ित किया जाता था। इस जेल को सीरिया का कसाई खाना भी कहा जाता है।
बशर अल असद ने 24 साल के शासन के दौरान भ्रष्टाचार समेत अर्थव्यवस्था में कुप्रबंधन लगातार बढ़ता गया। लोगों की नाराजगी सरकार के भ्रष्ट और दमनकारी नीतियों के खिलाफ लगातर बढ़ रही थी। असद के शासनकाल में सरकार के उच्च पदों पर असद के रिश्तेदार ही आसीन रहे। सीरिया की 60 प्रतिशत अर्थव्यवस्था पर असद के चेचेरे भाई रामी मखलौफ का नियंत्रण रहा। वहीं बशर के भाई माहेर, उनकी बहन बुशरा और उनके पति आसिफ शौकत जैसे लोगों ने शासन की सुरक्षा और सैन्य तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन सभी लोगों ने सीरिया की आम जनता का दमन किया।

जिसके परिणाम स्वरूप विद्रोह बढ़ने लगे। सीरिया सरकार द्वारा बच्चों पर अत्याचार ने विद्रोह को भड़काने में घी का काम किया। साल 2011 से लेकर साल 2024 तक असद के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन चलता रहा। जिसे उसने क्रूरता से दबाया। साल 2011 में एक स्कूल में कुछ छात्रों के द्वारा बशर अल असद की आलोचना करते हुए उनके खिलाफ नारे लगाए गए। जिसका नतीजा यह हुआ कि असद सरकार की सेना ने उन छात्रों को थर्ड डिग्री दी। छात्रों को दीवार से टांग कर करंट लगवाया गया। वहीं साल 2012 में विद्रोह को दबाने के लिए असद शासन ने शहरों और कस्बों में हवाई हमले किए। इसमें हजारों लोगों की जान गई। एमनेस्टी इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट के अनुसार 2011 और 2016 के बीच अल असद के दमन के चलते 13,000 सीरियाई मारे गए। हिंसा हत्याओं और नरसंहार का सिलसिला इस दौरान लगातार जारी रहा। जिसका नतीजा यह रहा कि विद्रोहियों ने दमिश्क पर कब्जाकर अल असद के शासन को उखाड़ फेंका।

पिता से विरासत में मिली थी तानाशाही
इस तरह के दमन की नीति बशर अल असद को विरासत में मिली थी। उन्होंने हर प्रकार के विद्रोह को दबाने के लिए अपने पिता की तरह ही कार्य किया। उनके पिता हफीज अल-अस्साद ने भी साल 1982 में सीरिया के हामा शहर में मुस्लिम ब्रदरहुड के विद्रोह को कुचला था। इसमें करीब 40 हजार लोगों की जान गई थी। असद ने भी कई मौकों पर यह नीति अपनाई। पिछले साल जारी संयुक्त राष्ट्र आयोग की रिपोर्ट में अल असद की तानाशाही और क्रूरता का विस्तार से वर्णन किया गया था। इस रिपोर्ट के अनुसार तानाशाह अल असद ने जेलों में ही कब्रगाह बना डाले थे।

अब राष्ट्रपति शासन से मुक्त होने के बाद सीरिया के कई प्रांतों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है। असद सरकार से पीड़ित महिला बच्चे युवा सड़कों पर सीरिया का झंडा फहराते हुए जश्न मना रहे हैं। अल असद परिवार ने सीरिया पर करीब 53 सालों तक राज किया है। हाफिज अल अस्साद की मौत के बाद उनके दूसरे बेटे बशीर अल असद ने बतौर राष्ट्रपति सीरिया की बागडोर संभाली थी। गौरतलब है कि साल 1971 में बशर अल अस्साद के पिता हाफिज अल अस्साद ने सीरिया में तख्तापलट कर सत्ता अपने हाथों में ली थी। उन्होंने वर्ष 2000 तक शासन किया। इसके बाद सीरिया का शासन उन्होंने अपने दूसरे बेटे बशर अल असद को सौंप दिया। उस दौरान असद को भारी जनसमर्थन 97 फीसदी वोट मिले थे। अब तक सीरिया पर अल असद का 24 सालों तक शासन रहा। दावा किया जाता है कि बाप बेटे ने अपने शासनकाल के दौरान विपक्ष को खत्म कर दिया है।

 

पुतिन ने निभाई मित्रता
सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद ने 8 दिसम्बर 2024 को राजधानी दमिश्क पर विद्रोहियों के कब्जे के बाद देश छोड़ दिया और रूस में शरण ली। रूस ने मानवीय आधार पर असद और उनके परिवार को शरण दी है। हालांकि उनकी भविष्य की राजनीतिक गतिविधियों या योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। रूसी अधिकारियों ने सीरिया में शांति स्थापना के लिए संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में वार्ता की आवश्यकता पर बल दिया है। असद ने हाल ही में एक बयान में कहा था कि उनकी सीरिया छोड़ने की कोई योजना नहीं थी, लेकिन रूस के कहने पर उन्होंने देश छोड़ा।

दमिश्क में विद्रोहियों की बढ़ती उपस्थिति के बीच, असद ने रूसी सहयोगियों के समन्वय से लताकिया स्थित रूसी बेस की ओर प्रस्थान किया, जहां से वे सैन्य अभियानों की निगरानी करना चाहते थे। लताकिया पहुंचने पर, बेस पर ड्रोन हमलों के बढ़ते खतरे को देखते हुए, रूसी अधिकारियों ने 8 दिसम्बर की शाम को असद और उनके परिवार को रूस ले जाने का निर्णय लिया। रूस पहुंचने के बाद अपने पहले बयान में असद ने कहा कि उनका सीरिया छोड़ने का कोई पूर्व नियोजित इरादा नहीं था, लेकिन दमिश्क की स्थिति बिगड़ने पर उन्होंने यह कदम उठाया। असद के रूस पहुंचने की प्रक्रिया को गुप्त रखा गया था और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रबंध किए गए थे।

पुतिन और बशर के सम्बंध
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद के बीच संबंधों को व्यक्तिगत मित्रता के बजाय रणनीतिक साझेदारी के रूप में देखा जाता है। रूस ने लंबे समय से सीरिया को अपना प्रमुख सहयोगी माना है, विशेष रूप से मध्य पूर्व में अपने प्रभाव को बनाए रखने के लिए पुतिन ने असद सरकार का समर्थन किया, खासकर 2015 में जब रूस ने सीरिया में सैन्य हस्तक्षेप शुरू किया। रूस ने असद सरकार को सैन्य सहायता, हथियार और राजनयिक समर्थन प्रदान किया। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पुतिन ने असद के खिलाफ पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का विरोध भी किया। हालांकि पुतिन और असद को निजी तौर पर करीबी दोस्त नहीं माना जाता, लेकिन उनके सम्बंध आपसी राजनीतिक और सैन्य जरूरतों पर आधारित हैं। पुतिन ने असद को सत्ता में बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बदले में, असद ने रूस को सीरिया में स्थायी सैन्य ठिकाने स्थापित करने की अनुमति दी। रूस और सीरिया के सम्बंधों को अधिकतर ‘हितों पर आधारित साझेदारी’ के रूप में देखा जाता है। पुतिन और असद की मित्रता व्यक्तिगत भावनाओं से अधिक व्यावहारिक और भू-राजनीतिक उद्देश्यों पर आधारित है।

रूस में शरण लेने के कारण

रूस, असद परिवार को उच्च स्तरीय सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम है, जबकि ईरान में हाल के हमलों के कारण सुरक्षा की स्थिति अस्थिर रही है। रूस लम्बे समय से सीरिया का सहयोगी रहा है और असद सरकार का समर्थन करता आया है, जिससे असद को रूस में शरण लेना स्वाभाविक लगा।

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