जनार्दन कुमार सिंह
जिस वक्त भारत सहित पूरी दुनिया नए साल के जश्न में डूबी थी, इसी दौरान पड़ोसी देश में एक मंदिर को तोड़ आग के हवाले किया जा रहा था। पुजारी रो रहा था, हिंदू समुदाय के लोग डरे-सहमे थे। जी हां! हम बात कर रहे हैं भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान की। यहां हिंदू समुदाय और मंदिरों को नुकसान पहुंचाने का सिलसिला लगातार जारी है, थमने का नाम नहीं ले रहा। खासकर पाकिस्तान के सिंध प्रांत से तो अक्सर हिंदुओं के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार की खबरें आती रहती हैं।
Latest visuals from KPK, an extremist mob of Muslims are burning and razing down a #Hindu temple in Karak.
The reason is unknown but look at the hatred they have towards the religious minorities.
A little argument is all it takes here to destroy the lives of minorities. pic.twitter.com/rtoKFyk7yi— Voice of Pakistan Minority (@voice_minority) December 30, 2020
हाल ही में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में कोहाट के करक जिले के टेरी गांव में एक मंदिर को ध्वस्त कर आगजनी की गई। यही नहीं आगजनी से पहले दीवारों को तोड़ने के लिए हथौड़े का भी इस्तेमाल किया गया। और यह सब किया-कराया है कट्टरपंथी जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम पाटी के नेता रहमत सलाम खट्टक और फजल उर रहमान एवं उसके समर्थकों वाली भीड़ की। यह तब हुआ जब मंदिर के विस्तार और जीर्णोद्धार का कार्य चल रहा था जिसके लिए हिंदू समुदाय के लोगों ने स्थानीय पुलिस-प्रशासन से इजाजत भी ली थी। जिससे मौलाना और स्थानीय लोग खुश नहीं थे।
हालांकि पाकिस्तान में हिंदुओं और मंदिरों पर हमले की घटना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले अक्टूबर के महीने में पाकिस्तान के सिंध प्रांत स्थित एक मंदिर में तोड़फोड़ की गई थी। जिसे मोहम्मद इस्माइल नामक व्यक्ति ने मंदिर में रखी मूर्तियों को नष्ट कर मौके से फरार हो गया था। यही नहीं 1997 में भी स्थानीय मुफ्ती द्वारा संत श्री परमहंस की समाधि और मंदिर में तोड़फोड़ कर जमीन कब्जाने की बात सामने आई थी। जिस पर 2015 में पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के अनुसार मंदिर का जीर्णोद्धार और नवनिर्माण का कार्य चल रहा था। इसी बीच स्थानीय मौलानाओं और जमीयत-उलेमा-ए-इस्लाम की अगुवाई में मंदिर विस्तार के विरोध में भीड़ इकट्ठा की थी। इसी में से एक स्थानीय मौलवी मौलाना शरीफ ने मंदिर को तोड़ने के लिए भीड़ को उकसाया जिसके बाद सैकड़ों की संख्या में जुटी भीड़ ने मंदिर की छत और दीवारों को ढहाना शुरू कर आग के हवाले कर दिया। भीड़ ने हमले में पुराने ढांचे के साथ-साथ नए निर्माण कार्य को भी ध्वस्त कर दिया था। यह सब पुलिस के आंखों के सामने हो रही थी और पुलिस मूकदर्शक बनी रही।

अब कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने 350 लोगों को नामजद कर करीब 100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। जिनमें सात प्रमुख आरोपी मौलाना अमानुल्लाह, मौलाना इमदादुल्लाह, मौलाना मतिउल्लाह, मौलाना मुहम्मद हकीम और मौलाना अनवर ज़मान शामिल हैं। गिरफ्तार किए गए आरोपियों को आतंकवाद रोधी अदालत (एटीसी) में पेश किया गया और अदालत ने उन्हें जेल भेज दिया है। जिला पुलिस अधिकारी इरफानुल्लाह मारवत ने आठ पुलिसकर्मियों को कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही के चलते निलंबित कर दिया है।
यहां बताते चलें कि पाकिस्तान में हिंदू सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार यहां करीब 75 लाख हिंदू रहते हैं, जबकि हिंदू समुदाय के लोगों का कहना है कि करीब 90 लाख हिंदू यहां रहते हैं जिनमें से ज्यादातर सिध प्रांत में हैं। सिंध में अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ हिंसा अक्सर होती रहती हैं।
इस घटना के बाद से आशंका जताई जा रही है कि अतिवादियों का अगला निशाना एबटाबाद जिले स्थित मंदिर है। दरअसल, हवेलियां शहर में ऐतिहासिक मंदिर का एक संरचना है जो काफी जर्जर है और अब भू-माफिया की नजर इस मंदिर की जमीन पर है जिसे कब्जा करने के लिए इसे नष्ट करने पर आमादा है। इस पर चिंता व्यक्त करते हुए अल्पसंख्यक समुदाय के नेता हारुन सरब दयाल ने सरकार से इस धरोहर की सुरक्षा की मांग की है। उन्होंने कहा कि कुछ शरारती तत्वों ने देश में अराजकता फैलाने के लिए हवेलियां शहर में मंदिर की जमीन पर कब्जा करना चाह रहे हैं। यही नहीं हमले सिर्फ मंदिरों तक ही सीमित नहीं है। पाकिस्तान के अन्य मंदिरों, धर्मशालाओं, पाठशालाओं, गौशालाओं, अनाथ आश्रमों, श्मशान घाटों, सत्संग हॉल, गुरुद्वारों और अन्य पूजा स्थल भी इनके निशाने पर हैं जिन्हें सरकारी संरक्षण की बेहद जरूरत है। अल्पसंख्यकों के पूजास्थलों पर खतरों को देखते हुए उनकी सुरक्षा के लिए सरकार को इनके आस-पास पुलिस दल तैनात करने चाहिए ताकि अन्य मंदिरों की तरह यह भी हमले का शिकार न हो।

अब पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश (सीजेपी) गुलज़ार अहमद ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश को हो रही शर्मिंदगी का हवाला देते हुए अधिकारियों को आदेश दिया कि मंदिर की मरम्मत का खर्च तोड़ने वाले मौलवी और उनके समर्थकों से ही वसूली जाए। यही नहीं मंदिरों से अतिक्रमण हटाने और अदालती कार्यवाही में मौजूद खैबर पख्तूनख्वा पुलिस प्रमुख ने अदालत को बताया कि बर्बरता में शामिल 109 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहां ड्यूटी पर मौजूद 92 पुलिस अधिकारी, जिनमें पुलिस अधीक्षक और पुलिस उपाधीक्षक भी शामिल थे, को निलंबित कर दिया गया है।
इसी दौरान खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री महमूद खान ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि मंदिर में भीड़ ने तोड़फोड़ के बाद आग लगा दी थी, उसका सरकार पुनर्निर्माण कराएगी। इसके लिए सरकार ने आदेश जारी कर दिए हैं।

