दिल्ली हिंसा को लेकर संसद के दोनों सदनों में चर्चा चल रहा है। गुरूवार को इसी दौरान विपक्ष की ओर से एनपीआर और सीएए को लेकर कई सवाल उठाए गए। विपक्षी पार्टियों और अन्य दलों ने कहा कि एनपीआर में कागज मांगे जाएंगे और जिन लोगों के पास कागज नहीं होंगे, उन्हें शक की नजर से देखा जाएगा।
विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में कहा, “एनपीआर की प्रक्रिया के तहत किसी को भी शंका की नज़रों से नहीं देखा जाएगा। मैंने स्पष्ट किया है कि एनपीआर के अंदर कोई डाक्यूमेंट नहीं मांगा जाएगा। पहले भी नहीं मांगा गया था।” विपक्ष को जवाब देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि आप को जितनी जानकारी देनी है आप दीजिए। अगर कोई जानकारी नहीं देता तो उसकी नागरिकता नहीं जाएगी और न ही उसके नाम के आगे डाउट फुल लगाया जाएगा।
NPR पर क्या पूछे गए थे सवाल?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनपीआर को लेकर बैठक हुई थी। जिसने एनपीआर की लिस्ट को अपडेट करने की मंजूरी दी थी। एनपीआर को सबसे पहले कांग्रेस सरकार 2010 में लेकर आई थी जिसके तहत नागरिकों की जानकारी इकट्टी की जाती है और लोगों की ताजा तस्वीर के साथ उनकी उंगली के निशान लिए जाते हैं। कांग्रेस ने जब एनपीआर को लागू किया था तो उस समय 15 सवाल पूछे जाते थे, लेकिन अब इसमें आठ नए सवाल जोड़े गए हैं। इन्हीं सवालों को लेकर कई राजनीतिक पार्टियों और राज्यों ने अपनी आपत्ति जताई है।
2010 में एनपीआर में पूछे गए 15 सवाल:
1. व्यक्ति का नाम
2. मुखिया से संबंध
3. पिता का नाम
4. माता का नाम
5. पत्नी/पति का नाम
6. लिंग
7. जन्मतिथि
8. वैवाहिक स्थिति
9. जन्म स्थान
10. घोषित राष्ट्रीयता
11. सामान्य निवास का वर्तमान पता
12. वर्तमान पते पर रहने की अवधि
13. स्थायी निवास का पता
14. व्यवसाय/कार्यकलाप
15. शैक्षणिक योग्यता
नए जोड़े गए सवाल:
1. आधार नंबर
2. मोबाइल नंबर
3. माता-पिता का जन्मस्थान और जन्मतिथि
4. पिछला निवास पता (पहले कहां रहते थे)
5. पासपोर्ट नंबर (अगर भारतीय हैं तो)
6. वोटर आईडी कार्ड नंबर
7. पैन नंबर
8 ड्राइविंग लाइसेंस नंबर

