फरवरी माह में रासुका के तहत गिरफ्तार किये गए डॉक्टर कफील खान इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद मथुरा जेल से रिहा कर दिये गए हैं, लेकिन डाक्टर कफील को अब भी अपनी गिरफ्तारी का भय सता रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि यूपी सरकार उन्हें किसी और मामले में फंसा सकती है।
गौरतलब है कि सीएए को लेकर भड़काऊ बयानबाजी करने के लिए अलीगढ़ के जिलाधिकारी ने 13 फरवरी 2020 को कफील खान को रासुका में निरुद्ध करने का आदेश दिया था। इस पर डॉ. खान की मां के द्वारा हाई कोर्ट में दायर एक याचिका में आरोप लगाया गया था कि उनके बेटे को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया है और उनकी तुरंत रिहाई की जाए। मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ में मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह ने डॉ. खान के खिलाफ एनएसए के आरोपों को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने उनकी तत्काल रिहाई के आदेश दिये। डाक्टर कफील के समर्थकों का कहना है कि उनको नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध -प्रदर्शन करने पर जेल में डाल दिया गया था, लेकिन हाईकोर्ट के फैसले ने साफ कर दिया है कि सरकार की तानाशाही नहीं चलेगी। हाईकोर्ट का फैसला लोकतंत्र की जीत है।
रिहाई के बाद भी यूपी सरकार से डरे हुए हैं डाक्टर कफील खान

