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आदित्य-एल 1 की सफलता, पहली हाई-एनर्जी एक्स-रे झलक कैप्चर

चंद्रयान के सफलतापूर्वक चाँद पर लैंड होने के बाद अब ‘भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन‘ (ISRO) ने अपना पहला सूर्ययान “आदित्य-एल 1” लॉन्च किया था। जो अब सफलता की ओर अग्रसर है। इसी दौरान अंतरिक्ष एजेंसी ने सूर्ययान की पहली कामयाबी की जानकारी देते हुए कहा है कि, आदित्य-एल 1 ने अंतरिक्ष यान से जुड़े एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर, एचईएल 1 ओएस ने सोलर फ्लेयर्स की पहली हाई-एनर्जी एक्स-रे झलक कैप्चर की है।

 

इसरो ने यह जानकारी भी दी है कि आदित्य-एल1 पर लगे स्पेक्ट्रोमीटर ने 29 अक्टूबर, 2023 के आस-पास सोलर फ्लेयर्स के आवेगपूर्ण चरण को रिकॉर्ड किया था। ये सोलर फ्लेयर्स विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम – रेडियो, ऑप्टिकल, यूवी, सॉफ्ट एक्स-रे, हार्ड एक्स-रे और गामा-रे में सभी तरंगदैर्ध्य (तरंग के समान कला वाले दो क्रमागत बिन्दुओं की दूरी) में बढ़े हुए उत्सर्जन का उत्पादन करते हैं।

 

क्या है ‘आदित्य-एल1′ का अर्थ

 

सूर्ययान के इस मिशन का नाम ‘आदित्य-एल1’ इसके उद्देश्य का को भी ज़ाहिर करता है। जहाँ ‘आदित्य’ सूर्य का ही एक अन्य नाम है और L1 का मतलब है- लाग्रेंज बिंदु 1 है। इसरो के अनुसार , L1 प्वाइंट की दूरी धरती से लगभग 15 लाख किलोमीटर है। आदित्य-एल1 को L1 बिंदु की प्रभावमंडल कक्षा में रखकर सूर्य का अध्ययन किया जाएगा।

 

क्या है लाग्रेंज प्वाइंट

लाग्रेंज प्वाइंट पर सूर्य-पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण कुछ इस तरह संतुलन में होता है कि वहां कोई चीज लंबे समय तक ठहर सकती है। इसीलिए इस सूर्ययान को लांग्रेज बिंदु 1 में स्थापित करने के लिए लॉन्च किया जाएगा, जहां से यह हर समय सूर्य पर नजर रखकर सूर्य के अध्ययन को सफल बनाने का प्रयास करेगा, इसी के साथ स्थानीय वातावरण की जानकारी भी जुटाएगा।

गौरतलब है कि पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा को मिलाकर इस सिस्टम में पांच लाग्रेंज प्वाइंट हैं। इतालवी-फ्रांसीसी गणितज्ञ जोसेफ लुई लाग्रांज के नाम पर इनका नाम पड़ा है। ये ऐसे बिंदु बताए जाते हैं जहां दो बड़े पिंडों जैसे कि सूर्य और पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के कारण अंतरिक्ष में पार्किंग स्थल जैसे क्षेत्र उपलब्ध होते हैं।

जैसे कि सूर्य के केंद्र से शुरू कर पृथ्वी के केंद्र तक एक सीधी सरल रेखा खींच दी जाए और इस सरल रेखा के ठीक बीच में किसी वस्तु को रख दिया जाए तो स्वाभाविक रूप से सूर्य का शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण बल जो कि पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल से कहीं अधिक है, इस वस्तु को अपनी ओर खींच लेगा। जिससे सरल रेखा के बीच रखी इस वस्तु को धीरे धीरे पृथ्वी की ओर ले जाया जाए, तो जैसे-जैसे यह वस्तु पृथ्वी के निकट जायेगी इस पर पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल का प्रभाव बढ़ता जाएगा और सूर्य का प्रभाव उसी अनुपात में घटता जाएगा ।

एक स्थिति ऐसी आएगी जब इस वस्तु पर सूर्य और पृथ्वी दोनों का प्रभाव बराबर हो जाएगा अर्थात इस स्थिति में इस वस्तु को ना तो सूर्य अपनी ओर खींच पायेगा और ना ही पृथ्वी इसे अपनी ओर खींच सकेगी, बल्कि वस्तु एक केंद्र पर ही लटक जाएगी। अतः ऐसे संतुलन बिंदु जहां सूर्य और पृथ्वी के गुरुत्वीय बल बराबर होते है लग्रांज बिन्दु कहलाते हैं।

 

यह भी पढ़ें : लॉन्च होने के लिए तैयार सूर्ययान “आदित्य-एल 1”

 

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