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उम्मीदें बनाम आलोचनाएं

केंद्र सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए संसद में एक फरवरी को पेश किए गए बजट पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। आर्थिक विश्लेषक और उद्योग जगत के दिग्गजों ने इसे सकारात्मक और विकासोन्मुख बजट करार दिया है तो विपक्ष ने इसे नकारात्मक बजट बता सिरे से नकार दिया है

गत सप्ताह एक फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एनडीए सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला आम बजट 2025-26 पेश किया है। गत वित्तीय वर्ष 2024-25 की तुलना में 2025-26 का बजट 47.16 लाख करोड़ से बढ़कर 50.65 लाख करोड़ जा पहुंचा है। इस बजट में रक्षा से लेकर मध्यम वर्ग, किसानों, युवाओं और रियल एस्टेट को भी काफी कुछ दिया। यानी किसान हो या सीनियर सिटीजन सबका ध्यान रख तमाम बड़े ऐलान किए हैं। ऐसे में इस पूर्ण बजट को लेकर एक ओर जहां सत्तापक्ष के लोग इसे विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि में मील का पत्थर बता रहे हैं वहीं विपक्ष ने गरीब को और अधिक गरीब बनाने वाला और कुर्सी बचाने वाला बजट बताया है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि यह बजट गोली के घाव पर पट्टी लगाने जैसा है। वहीं जयराम रमेश की मानें तो बजट में विकास का इंजन पटरी से उतर गया है। उन्होंने कहा कि बिहार में चुनाव होने हैं इस कारण वहां के लिए योजनाओं का ऐलान किया गया। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने निशाना साधते हुए कहा कि ये बिहार सरकार का बजट है या भारत सरकार का। शिरोमणि अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि बजट में सिर्फ बिहार का ही जिक्र है, पंजाब के लिए कुछ नहीं है। यह किसान विरोधी बजट है। किसानों के लिए बजट में कुछ नहीं है। वहीं बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि भाजपा सरकार का बजट कांग्रेस की ही तरह राजनीतिक स्वार्थ का अधिक जन एवं देशहित का कम लगता है।

दूसरी तरफ सत्तापक्ष की बात करें तो एनडीए सरकार के सहयोगी नीतीश कुमार ने इस बजट का स्वागत किया तो पीएम मोदी ने इसे ऐतिहासिक बताया। जबकि कुछ अर्थशास्त्रियों ने दिल खोलकर स्वागत किया है और कहा कि ये देश के विकास में गति देगा। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह बजट ऐसे समय में आया है जब देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी है। इस साल आर्थिक विकास दर चार साल के निचले स्तर 6.4 फीसदी पर रहने का अनुमान है। अगले साल यह 6.3 से 6.8 फीसदी रहने की सम्भावना है। यह 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए जरूरी 8 फीसदी के ग्रोथ रेट से काफी कम है। लेकिन बजट की घोषणाएं रियल एस्टेट सेक्टर के लिए बढ़िया परिणाम देने वाली है। टैक्स स्लैब बढ़ाने का फैसला बहुत सकारात्मक है जो हर प्रकार से घर खरीदने वालों के हित में है। रुकी हुई परियोजनाओं के लिए फंड बढ़ाने का फैसला हाउसिंग को बूस्टर डोज देगा जिससे सप्लाई बढ़ेगी और वर्षों से घरों के सपने का इंतजार कर रहे खरीदारों को अपना घर मिल सकेगा।

सरकार के कई निर्णय रियल एस्टेट सेक्टर के लिए बहुत ही स्वागत योग्य हैं। स्वामिह फंड का दायरा बढ़ने से पुराने स्टॉक प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में मदद मिलेगी और सेक्टर में नए व काम करने वाले प्रोमोटर को मौका मिलेगा। इनकम टैक्स में बचत होने से आम जनता की बचत बढ़ेगी जिससे वे निवेश करने के लिए आगे आएंगे। यही नहीं रेंटल इनकम पर टीडीएस की सीमा बढ़ने का लाभ दूसरे या तीसरे घर लेने वालों को मिलेगा जो एक सकारात्मक पहल है। इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने के लाभ पिछले 2-3 वर्षों में दिखा है और आशा है कि आने वाले वर्ष में भी इसका प्रभाव रियल एस्टेट पर दिखेगा।

इनकम टैक्स की लिमिट बढ़ने से आम जनता की खरीदारी की क्षमता बढ़ेगी। किराए से अर्जित आय पर टीडीएस की सीमा बढ़ने से किराए पर आश्रित वर्ग के लोगों को राहत मिलेगी। देश में इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने और रुके पड़े प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए स्वामीह फंड-2 से 15 हजार करोड़ की व्यवस्था की गई है। इन प्रयासों से रोजगार और निवेश के प्रति सकारात्मक माहौल बनेगा। वहीं केंद्रीय बजट 2025 मध्यम वर्ग को महत्वपूर्ण राहत प्रदान करता है जिससे घर खरीदना अधिक सुलभ हो जाता है और रियल एस्टेट निवेश अधिक आकर्षक हो जाता है। 1 लाख करोड़ का शहरी चुनौती कोष शहर के विकास को गति देगा।

इस सबसे इतर हर साल सबसे ज्यादा निगाहें इसी बात पर लगी रहती हैं कि टैक्स स्लैब में कोई बदलाव हुआ है या नहीं। इस आम बजट में आम आदमी के लिए क्या खास है? सरकार का सबसे ज्यादा फोकस किस क्षेत्र पर रहा। किस राज्य को कितना पैसा मिला की चर्चा होती है। ऐसे में सबसे पहले बात करते हैं इनकम टैक्स की।

इनकम टैक्स स्लैब में क्या-क्या हुए बदलाव

बजट 2025-26 में सबसे बड़ा ऐलान मध्यम वर्गीय के लिए हुआ है और सरकार ने 12 लाख रुपए तक की इनकम को टैक्स के दायरे से बाहर किया है। यह छूट नई इनकम टैक्स व्यवस्था चुनने वालों के लिए है। इसके साथ ही नौकरी पेशा लोगों को 75 हजार रुपए के स्टैंडर्ड डिडक्शन का भी लाभ मिलेगा। इस कदम से 12 लाख रुपए सालाना कमाने वालों को फायदा होगा।
नया टैक्स स्लैब
1. 12 लाख की कमाई पर कोई टैक्स नहीं
2. 12 से 16 लाख की इनकम पर 15 फीसदी
3. 16 से 20 लाख की कमाई पर 20 फीसदी
4. 20 से 24 लाख तक की कमाई पर 25 प्रतिशत
5. 24 से ज्यादा की कमाई पर 30 फीसदी
नया इनकम टैक्स कानून बनाएगी सरकार
वित्त मंत्री ने अपने भाषण में कहा कि इनकम टैक्स के नियमों में बड़ा बदलाव होगा और सरकार इनकम टैक्स पर नया कानून बनाएगी। हालांकि इसका टैक्स स्लैब से कोई लेना-देना नहीं होगा।

बजट में सबसे बड़े ऐलान

1. 12 लाख तक की कमाई पर कोई इनकम टैक्स नहीं लगेगा।
2. न्यू इनकम टैक्स बिल अगले हफ्ते लाया जाएगा।
3. कैंसर की दवाएं सस्ती होंगी।
4. पिछले 4 साल का इनकम टैक्स रिटर्न एक साथ फाइल कर सकेंगे।
5. वरिष्ठ नागरिकों के लिए टीडीएस की सीमा 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख कर दी गई है।
6. इनकम टैक्स फाइलिंग की सीमा को 2 साल से बढ़ाकर 4 साल कर दिया है।
7. अगले 6 साल मसूर, तुअर जैसी दालों की पैदावार बढ़ाने पर फोकस रहेगा।
8. किसान क्रेडिट कार्ड पर कर्ज की लिमिट 3 लाख से 5 लाख होगी।
9. बिहार में मखाना बोर्ड बनेगा।
10. छोटे उद्योगों को विशेष क्रेडिट कार्ड, पहले साल 10 लाख जारी होंगे।
11. एमएसएमई के लिए लोन गारंटी कवर 5 करोड़ से 10 करोड़।
12. स्टार्टअप के लिए लोन 10 करोड़ से 20 करोड़ रुपए किया गया।

सबसे ज्यादा फोकस रक्षा क्षेत्र पर
केंद्र सरकार के ‘विकसित भारत 2047’ और ‘आत्मनिर्भर’ सशस्त्र बलों के विजन को साकार करने के लिए वित्त मंत्री ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रक्षा मंत्रालय को 6,81,210.27 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया है। यह वित्त वर्ष 2024-25 के बजटीय अनुमान से 9.53 फीसदी अधिक है और केंद्रीय बजट का 13.45 प्रतिशत हिस्सा है जो कि सभी मंत्रालयों में से सबसे ज्यादा है। इस बजट में से 1,80,000 करोड़ रुपए यानी कुल आवंटन का 26.43 प्रतिशत रक्षा सेवाओं पर खर्च किया जाएगा। सशस्त्र बलों के राजस्व मद के लिए 3,11,732.30 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं जो कुल आवंटन का 45.76 फीसदी है।

एमएसएमई क्षेत्र में किया बड़ा ऐलान
देश में करीब 5.7 करोड़ एमएसएमई हैं जो इकोनॉमिक ग्रोथ में अहम योगदान दे रहे हैं। देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 36 फीसदी योगदान एमएसएमई सेक्टर का है और इनके जरिए लगभग 7.5 करोड़ लोगों को रोजगार मिल रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार के बजट में एमएसएमई सेक्टर पर विशेष फोकस रखा गया और एमएसएमई के लिए ऋण गारंटी कवर 5 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपए करने का ऐलान किया है।

किसानों को क्या मिला
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए किसान क्रेडिट कार्ड पर मिलने वाले लोन की सीमा तीन लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपए कर दी है। इससे किसानों को कृषि कार्य को समय से करने में काफी फायदा होगा। इससे 7.7 करोड़ किसानों को लाभ होने का अनुमान जताया गया है। वहीं खाद का उत्पादन बढ़ाने के लिए पूर्वोत्तर में खाद का नया कारखाना खोलने की बात कही गई है। साथ ही दलहन और तिलहन के उत्पादन के लिए योजना बनाई गई है जिससे कि दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना जा सके। दलहन के अंतर्गत तुअर, उड़द और मसूर की दाल का उत्पादन किया जाएगा तो बिहार में मखाना बोर्ड बनाया जाएगा। प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना में कम पैदावार, आधुनिक फसल गहनता और औसत से कम ऋण मापदंडों वाले 100 जिलों को शामिल किया जाएगा। इससे करीब 1.7 करोड़ किसानों को फायदा होगा। फल और सब्जियों के उत्पादन के लिए भी प्रावधान किए गए हैं।

महिलाओं को मिलेगा लाभ
वित्त मंत्री सीतारमण ने बजट में महिलाओं के लिए सक्षम आंगनवाड़ी पोषण 2.0 योजना पेश की है। इसके अंतर्गत जरूरत के अनुसार बजट देने की बात कही गई है। इसके अंतर्गत 8 करोड़ बच्चों को सीधा लाभ मिलेगा। इसके साथ ही एक करोड़ से अधिक गर्भवती महिलाओं को लाभ मिलेगा। इस योजना में लड़कियों के पोषण का विशेष ध्यान रखा गया है।

युवाओं के लिए क्या
असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे युवाओं की तरफ भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ध्यान दिया है। इसके अंतर्गत गिग वर्कर्स (इसमें डिलीवरी का काम करने वाले लोग भी शामिल हैं) के रूप में काम कर रहे युवाओं को श्रम पोर्टल पर पंजीकरण कराने पर पहचान पत्र दिया जाएगा। इसके साथ ही पीएम जन अरोग्य बीमा योजना के अंतर्गत स्वास्थ्य बीमा भी दिया जाएगा। उड़ान योजना और पर्यटन विकास योजना में भी युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलने की बात कही गई है। पोस्ट मित्र के रूप में भी युवाओं को जोड़ा जाएगा। स्टार्टअप के लिए लोन सीमा 10 करोड़ को बढ़ाकर अब 20 करोड़ रुपए कर दिया गया है यह 27 अलग-अलग क्षेत्रों में दिया जाएगा।

आईआईटी की क्षमता बढ़ोतरी
वित्त मंत्री ने 50 हजार अटल टिंकर लैब की स्थापना की बात भी कही है। आईआईटी की क्षमता बढ़ोतरी करते हुए देश के 23 आईआईटी संस्थानों में सीटों की संख्या बढ़ाई जाएगी। पांच आईआईटी को बेहतर शिक्षा संवर्धन के लिए अलग से राशि दी जाएगी। आईआईटी और भारतीय विज्ञान संस्थान में पीएम रिसर्च फेलोशिप दी जाएगी। एआई की शिक्षा के लिए 500 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं वही मेडिकल की पढ़ाई के लिए 10 हजार सीट की बढ़ोतरी की जाएगी और अगले पांच सालों में इसे 75 हजार सीट तक बढ़ाया जाएगा।

क्या हुआ सस्ता
कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों की 36 जीवनरक्षक दवाओं को बेसिक कस्टम ड्यूटी से पूरी तरह मुक्त किया गया। ओपन सेल्स और अन्य घटकों पर बीसीडी घटाकर 5 फीसदी किया गया। कोबाल्ट पाउडर, लिथियम-आयन बैटरी के कचरे, सीसा, जिंक और अन्य 12 महत्वपूर्ण खनिजों पर कस्टम ड्यूटी से छूट दी गई। इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी निर्माण के लिए 35 और मोबाइल बैटरी निर्माण के लिए 28 वस्तुओं को कस्टम ड्यूटी से मुक्त किया गया। चमड़ा उद्योग में वेट ब्लू लेदर को टैक्स से पूरी तरह छूट दी गई। जमी हुई मछली पेस्ट पर कस्टम ड्यूटी 30 से घटाकर 5 फीसदी कर दी गई। हस्तशिल्प निर्यात की समय सीमा बढ़ाई गई और 9 नई वस्तुओं को शुल्क-मुक्त सूची में जोड़ा गया। कपड़ा उद्योग में दो नई प्रकार की शटल-लेस लूम्स को बेसिक कस्टम ड्यूटी से छूट दी गई।

क्या हुआ महंगा

इंटरैक्टिव फ्लैट पैनल डिस्प्ले में कस्टम ड्यूटी 10 से बढ़ाकर 20 फीसदी कर दी गई। प्रोविजनल असेसमेंट में तेज और पारदर्शी कस्टम क्लीयरेंस के लिए नई दो वर्षीय समय-सीमा लागू की गई। टैरिफ रेट में सुधार करते हुए 7 शुल्क दरों को समाप्त कर कस्टम टैरिफ सिस्टम को सरल बनाया गया। सोशल वेलफेयर में 82 वस्तुओं पर कस्टम छूट समाप्त कर नया उपकर लागू किया गया। फ्लैट पैनल डिस्प्लेपर कस्टम ड्यूटी बढ़ा दी गई है। बुने हुए कपड़ों पर कस्टम ड्यूटी बढ़ा दी है।

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