किसानोदय अभियान के तहत भट्टा पारसोल के चर्चित किसान नेता मनवीर तेवतिया के नेतृत्व में दिल्ली में एक बार फिर किसानों का जमावड़ा लगने जा रहा है । 1 फरवरी 2019 को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान यहां इकट्ठा होंगे । किसानों ने दिल्ली की तरफ कूच करने की योजना बनानी शुरु कर दी है। आज से ही किसानों के कई संगठन दिल्ली पहुंचने की तैयारी में जुट गये है । अगले दो दिनों में दिल्ली की सड़कों पर एक बार फिर देश के किसान नजर आएंगे ।

सवाल यह है कि इस बार कितने किसान राजधानी पहुंचने वाले है। किसानोदय अभियान के आह्वान पर देशभर के बहुत से किसान संगठन राजधानी में जुटेंगे। दिल्ली में पहुंचकर किसान अपनी संसद लगाएंगे। किसान संसद में उनके तरफ से कई मुद्दों को उठाया जाएगा। जिसमें कर्जमाफी, 2013 का संसोधित कानून के अलावा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर चर्चा होगी। इसके बाद यहां एक विधेयक भी बनाया जाएगा ।जिसे किसान सरकार को सोपेंगे ।गौरतलब है कि इससे पहले 23 सितंबर को उत्तराखंड के हरिद्वार से किसान क्रांति यात्रा शुरू हुई थी। जिसका नेतृत्व किसान युनियन के नेता राकेश टिकैत ने किया था । उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान बहुल इलाकों से गुजरती हुई यह यात्रा 2 अक्टूबर को दिल्ली पहुंची थी । जहां केंद्र सरकार ने किसानों को दिल्ली में नहीं घुसने दिया था । इसके बाद किसानों ने दिल्ली के बॉर्डर पर ही अपना आश्रय स्थल बना लिया था । मजबूरन केंद्र सरकार को उनके सामने झुकना पड़ा था और किसानों की कई मांगे मान ली गई थी । इस बार भी किसानों की मांगी मानी जा सकती है । अब देखना यह है कि किसान यूनियन की बहुचर्चित रही किसान यात्रा की तरह किसानोंदय अभियान में कितने किसान जुट पाते हैं तथा केंद्र सरकार पर कितना दबाव दे पाते हैं ?याद रहे कि मनवीर तेवतिया अब से आठ साल पहले 2011 में सुर्ख़ियों में आए। इस साल अलीगढ के टप्पल में हुए किसान आंदोलन के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों के नेता राम बाबू कठेलिया के साथ ‘समझौते’ का ऐलान कर दिया था। अलीगढ़ के किसान नोएडा के बराबर 870 रूपए प्रति वर्ग मीटर मुआवज़ा मांग रहे थे। लखनऊ से सरकार के आदेश पर पुलिस ने किसानों के नेता राम बाबू को गिरफ़्तार कर लिया।

इस पर बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क गई। दबाव में आकर सरकार ने किसानों के नेता राम बाबू को जेल से बुलाकर बात की।कठेलिया ने अलीगढ़ के गेस्ट हाउस में रात के अँधेरे में उत्तर प्रदेश सरकार के साथ 570 रूपए वर्ग मीटर पर कि डर से मुआवज़े पर समझौता कर लिया। तब टप्पल के किसानों ने राम बाबू को नकार कर मनवीर तेवतिया को अपना नेता चुन लिया और आंदोलन जारी रखा। उसके बाद जब राहुल गाँधी ने अचानक टप्पल का दौरा किया तो तेवतिया उनके साथ थे । फिर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह तेवतिया को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलाने दिल्ली ले गए ।

बसपा सरकार में टप्पल और भट्टा-पारसौल में जमीन अधिग्रहण को लेकर हुए बड़े किसान आंदोलनों में मनवीर तेवतिया ने किसानों का नेतृत्व किया था। दोनों जगह किसान आंदोलन हिंसक हुआ और कई किसान सरकारी गोली से मारे गये थे। 2012 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अप्रैल 2011 में मनवीर तेवतिया ने भट्टा-पारसौल में हिंसक किसान आंदोलन किया। जिसके खामियाजे में मायावती को अपनी सरकार गंवानी पड़ी थी। हालाकि बसपा सरकार ने तब तेवतिया को न केवल आतंकवादी घोषित कर दिया था बल्कि उसपर 50 हजार का इनाम भी घोषित कर दिया था । इसके साथ कई गंभीर धाराओं में मामले दर्ज करा दिए थे । तब तेवतिया को जेल जाना पडा था । 23 माह तक जेल में रहने के बाद जब तेवतिया बाहर आया तो कई साल तक आघ्यातवास में रहा । पिछले साल से वह लोनी के मंडोला आंदोलन में सक्रिय हुआ ।

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