पिछले दिनों अमेरिका की यात्रा पर गए केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर का स्वागत ट्रंपकाल में भारतीय नेताओं को मिलने वाले सम्मान सरीखा नहीं रहा। दरअसल, मोदी सरकार, विशेषकर प्रधानमंत्री मोदी और तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ट ट्रंप के मधुर रिश्तों का असर अब बाइडेन के सत्ता में काबिज होने के बाद साफ नजर आने लगा है। मोदी ने स्थापित परंपराओं को परे कर जिस अंदाज में ट्रंप के पक्ष में अप्रवासी भारतीयों को करने का प्रयास किया था, उससे ड्रेमोक्रेट पार्टी बेहद नाराज है। ‘अबकी बार ट्रंप सरकार’ जुमला भले ही खासा चर्चा में रहा उसका खामियाजा दोनों देशों के मध्य अब पड़ता साफ दिखाई दे रहा है। अपने तीन दिवसीय अमेरिकी प्रवास के दौरान विदेश मंत्री कई महत्वपूर्ण अमेरिकी नेताओं से मिले। उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री और खुफिया एजेंसी के बड़े अफसरों संग मुलाकात की लेकिन बाइडेन प्रशासन में खासी महत्वपूर्ण नेता उपराष्ट्रपति कमला हैरिस एवं सांसद प्रोमिला जयपाल संग उनकी मुलाकात नहीं हो पाई। गौरतलब है कि जयपाल अमेरिकी कांग्रेस में कश्मीर का मुद्दा उठा चुकी हैं और कमला हैरिस को किसान आंदोलन के समर्थक के तौर पर देखा जाता है। इन दोनों ही भारतीय मूल की अमेरिकी नेताओं संग एस जयशंकर का संवाद न होना विदेश मामलों के विशेषज्ञ चिंताजनक करार दे रहे हैं।
विदेश मंत्री की विफल अमेरिकी यात्रा

