गढ़वाल सीट पर बड़े अंतर से हुई हार के बाद कांग्रेस में भीतरधात को लेकर हंगामा मचा हुआ है। साथ ही ऐसे बड़े नेता जो कि पार्टी के अहम पद पर अपनी तैनाती को लेकर संवेदनशील रहते हैं, चुनाव में उनकी भूमिका को लेकर भी पार्टी भीतर सवाल खड़े हो रहे हैं। गणेश गोदियाल ने कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान पार्टी नेताओं पर चुनाव में उनके खिलाफ काम करने का भी आरोप लगाते हुए भीतरघातियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की है। हैरत की बात यह है कि किसी भी सीट पर कांग्रेस के चुनावी अभियान में इन बड़े नेताओं की भूमिका देखने को नहीं मिली। गढ़वाल संसदीय सीट पर गणेश गोदियाल को उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने अकेले ही चुनाव लड़ने के लिए छोड़ दिया। न तो उनके नामांकन में कोई बड़ा नेता नजर आया और न ही प्रचार अभियान में किसी की भूमिका नजर आई। जबकि गोदियाल को जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा था। उनके प्रचार में हजारांे की भीड़ साफ बताती थी कि गोदियाल ही एक मात्र कांग्रेसी उम्मीदवार हैं जो अकेले अपने दम पर चुनाव लड़ रहे हैं
लोकसभा चुनाव के मतदान से कुछ दिन पूर्व हल्कों में चर्चा थी कि कई कांग्रेसी नेता गुपचुप काम करके भाजपा के उम्मीदवार अनिल बलूनी के पक्ष प्रचार कर रहे हैं। कहा जा रहा था कि गणेश गोदियाल और अनिल बलूनी के बीच कांटें की टक्कर होगी और हार-जीत का अंतर महज कुछ ही हजार रहेगा। लेकिन वोटिंग से कुछ ही समय पूर्व सभी अनुमान पूरी तरह से बदलने की बातें अचानक होने लगी और कहा जाने लगा कि गोदियाल कम से कम डेढ़ लाख वोटों से हारने वाले हैं।
सामान्य तौर पर यह एक चुनावी रणनीति होती है जिसमें विरोधी पक्ष को मनोवैज्ञानिक तौर पर कमजोर करने के लिए इसका इस्तेमाल हर उम्मीदवार करता है। मतदान के बाद सभी चर्चाएं और दावे सही साबित हुए। कांग्रेस के गणेश गोदियाल एक लाख 63 हजार मतों से अनिल बलूनी के हाथों पराजित हुए। कई बार चुनावी चर्चाएं वास्तविक रूप भी ले लेती है। गणेश गोदियाल इस बात को लेकर अपनी पीड़ा नहीं छुपा पाए और अब वे कांग्रेस नेताओं पर अपने खिलाफ चुनाव में काम करने का आरोप लगाकर पार्टी नेताओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।

सवाल यह है कि क्या भाजपा का जनाधार वाकई इतना बड़ा था कि जिस सीट को स्वयं भाजपा फंसी हुई कही थी और उसने चुनाव प्रचार में गृहमंत्री अमितशाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ और स्मृति ईरानी जैसे नेताओं तक को उतार दिया था। स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी ऋषिकेश में चुनावी रैली करने आना पड़ा था और अनिल बलूनी को अपने मंच में साथ में बैठाना पड़ा था, उस सीट पर उसे इतनी शानदार जीत मिल गई? भाजपा के चुनावी अभियान से एक बात तो साफ हो गई थी कि गढ़वाल सीट को लेकर भाजपा किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं लेना चाहती थी इसलिए बड़े-बड़े चेहरों को प्रचार में झोंक दिया गया। तो क्या भाजपा के चुनावी प्रचार के चलते अचानक से ही फंसी सीट प्रदेश की अन्य सीटों की तरह हो गई और बड़े अंतर से भाजपा ने गढ़वाल सीट जीत ली? जानकारों की मानें तो मोदी लहर का ही असर रहा कि भाजपा लगातार तीसरी बार प्रदेश की पांचांे सीटों पर बड़ी जीत हासिल कर पाई है और कांग्रेस अपने ही नताओं की अनदेखी और कमजोर चुनावी रणनीति के चलते एक बार फिर से चुनाव में बुरी तरह से हार गई। भीतरघात भी इस हार के पीछे एक बड़ा कारण अब बताया जा रहा है।
सबसे पहले गढ़वाल संसदीय सीट के चुनाव परिणामों पर नजर डालें तो 14 विधानसभा सीटों की गढ़वाल सीट पर 7 लाख 37 हजार 441 मतदाताओं ने अपने वोट का प्रयोग किया जिसमें 11375 मत नोटा को विकल्प को दिए गए। शेष मतांे में से जहां भाजपा के अनिल बलूनी को 4 लाख 32 हजार 159 मत मिले तो वहीं कंाग्रेस के गणेश गोदियाल को 2 लाख 68 हजार 656 ही मत मिल पाए। डाक मत पत्रों में भी भाजपा को बढ़त हासिल रही और 13628 मत पाने में कामयाब रही तो वहीं कंाग्रेस इसमें भी पिछड़ गई और महज 5964 ही मत पाकर संतोष करना पड़ा। शेष सभी 11 अन्य उम्मीदवारों की जमानतें जब्त हो गई। अंकिता भंडारी हत्याकांड के लिए सबसे ज्यादा मुखर रहने वाला उक्रांद के उम्मीदवार ‘अंकिता को न्याय दो’ नाम से पौड़ी शहर में बड़े आंदोलन खड़ा करने वाले पत्रकार अशुतोष नेगी को गढ़वाल सीट से महज 4561 ही मत मिल पाए। हैरत की बात यह है कि जिस पौड़ी में अंकिता भंडारी आंदोलन खड़ा किया उसी पौड़ी नगर से अशुतोष को सिर्फ 353 ही वोट मिले।
गणेश गोदियाल 14 विधानसभा सीटों में वोटों के लिए जद्दोजहद करते रहे। केवल उनके गृह क्षेत्र की सीट श्रीनगर की एक मात्र सीट रही जिसमें गोदियाल 662 वोट से हारे जबकि अन्य 13 सीटों पर हार का अंतर बहुत बड़ा था। श्रीनगर में भाजपा को 28448 वोट मिले और गोदियाल को 27786 मत मिले। गौर करने वाली बात यह है कि श्रीनगर सीट मौजूदा धामी सरकार के सबसे बड़े और अहम मंत्रालयांे के मंत्री धनसिंह रावत का गृह क्षेत्र भी है और वे इस सीट से लगातार दो बार चुनाव जीत चुके हैं। मौजूदा सरकार में उनके पास शिक्षा, उच्च शिक्षा स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा व सहकारिता जैसे अहम विभाग हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में भी धन सिंह रावत को कांग्रेस के गणेश गोदियाल ने कांटंे की टक्कर दी थी जिससे धनसिंह हारते-हारते किसी तरह से चुनाव जीतने में सफल रहे।
अब गढ़वाल सीट पर बड़े अंतर से हुई हार के बाद कांग्रेस में भीतरघात को लेकर हंगामा मचा हुआ है। साथ ही बड़े नेताओं जो कि पार्टी के हर अहम पदों पर अपनी तैनाती को लेकर संवेदनशील रहते हैं, चुनाव में उनकी भूमिका को लेकर भी पार्टी भीतर सवाल खड़े हो रहे हैं। गणेश गोदियाल ने कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान पार्टी नेताओं पर चुनाव में उनके खिलाफ काम करने का भी आरोप लगाते हुए भीतरघातियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की है। हालांकि गेदियाल ने किसी नेता का नाम तो नहीं लिया लेकिन यह साफ तौर पर कहा कि भाजपा ने कांग्रेस के जिन विधायकों और नेताओं को डरा-धमका कर भाजपा में शामिल करवाया है वे नेता तो भाजपा के लिए काम करेंगे ही लेकिन ऐसे कुछ नेता जो कांग्रेस में रहते हुए कांग्रेस के खिलाफ काम कर रहे थे और भाजपा की मदद कर रहे थे उनके खिलाफ संगठन स्तर से जांच होनी चाहिए और उनके बूथांे पर होने वाले मतदान का परीक्षण भी होना चाहिए।
गोदियाल ने चुनाव प्रचार के दौरान उनको मिले जन समर्थन को स्थानीय मुद्दों की ताकत बताते हुए कहा कि हम स्थानीय मुद्दों को प्रभावी तरीके से जनता तक सही तरीके से नहीं पहुंचा पाए। ग्रामीण क्षेत्रों में हमें स्थानीय मुद्दों पर समर्थन मिला लेकिन शहरी क्षेत्रो ंमें हम पहुंच न बनने से चूक गए। उन्होंने कहा कि हरियाणा में पहलवान बेटियों का मुद्दा बना और वहां भाजपा की हार हुई लेकिन प्रदेश में अंकिता भंडारी के साथ जो हुआ वह मुद्दा नहीं बन पाया। साथ ही पहाड़ का दूसरा बड़ा स्थानीय मुद्दा अग्निवीर योजना थी। उत्तराखण्ड में इसे जनता का मुद्दा नहीं बना पाए। गोदियाल ने कांग्रेस प्रदेश मुख्यलय में प्रेस वार्ता करके कहीं न कहीं कांग्रेस के बड़े नेताओं पर इशारों-इशारों में सवाल भी खड़े किए हैं। चुनाव की अधिसूचना होने के बाद भी जिस तरह से कांग्रेस चुनाव को लेकर गंभीर रवैया नहीं दिखा रही थी उससे कांग्रेस पर चुनाव को लेकर लापरवाही बरतने के आरोप शुरू से ही लग रहे थे। रही-सही कसर बड़े- बड़े नेताओं ने चुनाव लड़ने से ही दूरी बनाकर पूरी कर दी।
प्रीतम सिंह, नवप्रभात, यशपाल आर्य और हरीश रावत जैसे दिग्गज रणछोड़दास बनकर कांग्रेस की भारी जीत के दावे कर रहे थे। हैरत की बात यह हेै कि किसी भी सीट पर कांग्रेस के चुनावी अभियान में इन बड़े नेताओं की भूमिका देखने को नहीं मिली। गढ़वाल संसदीय सीट पर गणेश गोदियाल को उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने अकेले ही चुनाव लड़ने के लिए छोड़ दिया। न तो उनके नामांकन में कोई बड़ा नेता नजर आया और न ही प्रचार अभियान में किसी की भूमिका नजर आई। जबकि गोदियाल को जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा था। उनके प्रचार में हजारांे की भीड़ साफ बताती थी कि गोदियाल ही एक मात्र कांग्रेसी उम्मीदवार हैं जो अकेले अपने दम पर चुनाव लड़ रहे हैं।
राजनीतिक जानकार गोदियाल को मिल रहे जनसमर्थन को ही उनके लिए कांग्रेस भीतर खतरे की बड़ी घंटी मान रहे थे। जिस प्रकार से कांग्रेस ने चुनाव में अपनी हार स्वीकार ली थी ठीक उसके विपरीत गढ़वाल सीट का चुनाव देशभर में चर्चित होने लगा और गोदियाल को एक ऐसे नेता के तौर पर देखा जाने लगा तो अपने दम पर चुनाव को पलटने की सामर्थ्य रखता है। गोदियाल ने इस चुनाव को इस मुकाम पर ला खड़ाकर दिया था कि पूरा चुनावी अभियान गोदियाल बनाम मोदी माना जाने लगा। जहां गोदियाल अकेले ही बगैर किसी बड़े कांग्रेसी स्टार प्रचारक के चुनाव को जिंदा रखने का सफल प्रयास करते नजर आए तो वहीं भाजपा ने बड़े-बड़े दिग्गजांे को चुनाव प्रचार में झोक दिया। यही गोदियाल के पक्ष में गया और उनको कांग्रेस की कमान तक दिए जाने की मांग होने लगी।
माना जाता है कि गोदियाल की यही लोकप्रियता प्रदेश कांग्रेस के स्थापित बड़े नेताओं को भी चुभने लगी और उनको अपनी राजनीति खतरे में नजर आने लगी जिसका परिणाम यह हुआ कि कांग्रेस का एक धड़ा चुनाव से ही गायब होने लगा और आरोप है कि भाजपा के साथ अंदरखाने काम करने लगा। गोदियाल भी इसी तरह के आरोप लगा रहे हैं जो कि बहुत हद तक सही भी हो सकते हैं। हो सकता है कि गोदियाल के आरोप ठीक वैसे ही हों जिस तरह से कोई चुनाव हारने वाला उम्मीदवार लगाता ही है लेकिन यह भी गौर करने वाली बात है कि वोटिंग से महज एक सप्ताह पूर्व कांटंे की टक्कर होने की बातंे हो रही हो और वोटिंग से महज दो चार दिन पूर्व ही गोदियाल के डेढ़ लाख वोटों से हारने की चर्चाएं शुरू होना अपने आप में बताता है कि गोदियाल के लिए कांग्रेस का चुनावी अभियान का ऊंट किस करवट बैठ गया।
बात अपनी-अपनी
इसमें बयान देने वाली कोई बात ही नहीं है। मैंने यह नहीं कहा कि मेरे खिलाफ चुनाव में कांग्रेस के नेताओं ने काम नहीं किया है। मैंने सामान्य बात कही थी कि जिन लोगों ने कांग्रेस के खिलाफ चुनाव में काम किया है उनकी पहचान करके उनके खिलाफ कार्यवाही होना चाहिए। यह ताो सामान्य सी बात है।
गणेश गोदियाल, कांग्रेस प्रत्याशी, लोकसभा चुनाव
गोदियाल जी हो या अन्य उम्मीदवार अगर वे इस बात को प्रदेश कमेटी में लिखकर देंगे तो निश्चित ही कांग्रेस कमेटी इसकी समीक्षा करेगी और अगर मामला सही पाया जाता है तो प्रदेश संगठन ऐसे तत्वों पर निश्चित ही कार्यवाही करेगा।
करण महरा, अध्यक्ष, प्रदेश कांग्रेस कमेटी