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सरकार ने माना कोरोना वैक्सीन से हुए कई साइड इफेक्ट

कोरोना से बचाव के लिए इस्तेमाल की जाने वाली वैक्सीन को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।  कुछ विशेषज्ञ इस बात से सहमत हैं कि वैक्सीन के कई दुष्प्रभाव हैं, लेकिन अभी तक कोई डेटा या शोध मौजूद नहीं है, लेकिन अब दो सरकारी एजेंसियां इस बात से सहमत हैं कि कोविड वैक्सीन के एक नहीं, बल्कि कई दुष्प्रभाव हैं। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) और सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) ने पुणे के कारोबारी प्रफुल्ल शारदा की एक आरटीआई के जवाब में यह बात स्वीकार की है।

भारत में कोविड वायरस के खिलाफ पांच टीकों को टीकाकरण के लिए मंजूरी दी गई। भारत की सरकार द्वारा एस्ट्राजेनेका और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया पुणे के ‘कोविशील्ड’ और एसआईआई के ‘कोवैक्स’ को अनुमति दी गई । बायोलॉजिकल ई. लिमिटेड के ‘कॉर्बवैक्स’ और बाद में कैडिला हेल्थ केयर लिमिटेड के जायकोव-डी को भी आपातकालीन उपयोग के लिए अप्रूव्ड किया गया था, हालाँकि भारत में अधिकांश लोगों को Covishield और Covaxin लगाई गई है।

प्रफुल्ल शारदा द्वारा दायर एक आरटीआई के जवाब में आईसीएमआर के पीआईओ डॉ. लियाना सुसान जॉर्ज और सीडीएससीओएस पीआईओ सुशांत ने वैक्सीन के कई साइड इफेक्ट के बारे में जानकारी दी है।

कोवैक्सीन

आरटीआई के जवाब में कहा गया है कि Covaxin लगाने के बाद लोगों ने पसीना, खांसी-जुकाम, उल्टी, दस्त और सिरदर्द की शिकायत की है।

कोविशील्ड 

Covishield लेने वालों की आंखों में दर्द, सिरदर्द, उल्टी, कमजोरी, शरीर में दर्द, सूजन, शरीर पर लाल धब्बे जैसी समस्याएं देखी गई हैं।

कॉर्बवैक्स 

कॉर्बवैक्स वैक्सीन लगवाने वाले लोगों में खुजली, थकान, पीठ दर्द, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी, बुखार और ठंड लगने की शिकायतें मिली है।

स्पुतनिक वी

स्पुतनिक वी से सिरदर्द, पेट में दर्द, भूख न लगना, सूजन लिम्फ नोड्स, बुखार और सिरदर्द जैसे दुष्प्रभाव बताए गए हैं।

प्रफुल्ल सरदाने ने सरकार से पूछा है कि क्या अस्पतालों, टीकाकरण केंद्रों ने टीकाकरण से पहले इन सभी संभावित दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी और क्या स्वास्थ्य मंत्रालय ने जनता के लिए एक सार्वजनिक सुरक्षा अभियान शुरू किया है क्योंकि भारत और दुनिया में टीकाकरण से मौतें बढ़ रही हैं। हर जगह रिपोर्ट तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि कई देशों को वैक्सीन का निर्यात किया गया है। वहां के देशों को भी इनके दुष्प्रभावों की जानकारी देनी चाहिए थी।

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