कोविड-19 से लोगों की सुरक्षा करने के लिए स्वास्थ्यकर्मी, पुलिस और अन्य लोग अपनी जान को दांव पर लगा रहे हैं। ऐसे में कई जगहों पर डॉक्टरों और पुलिस की टीमों पर हमले भी हुए। डॉक्टर्स और पुलिस की टीम पर हो रहे हमले को देखकर केंद्र सरकार अब स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए अध्यादेश लाई है, जिसमें हमला करने वालों को सात साल की जेल होने का प्रावधान है।
सरकार के इस कदम का डॉक्टर्स और उनके परिवार वालो ने सरकार का तहेदिल से आभार व्यक्त किया है। डॉक्टरों ने भरोसा जताया है कि इससे उन्हें सुरक्षा मिलेगी और वे बिना किसी भय के मन लगाकर काम कर सकेंगे। 123 वर्ष पुराने कानून में परिवर्तन के लिए अध्यादेश लाने के फैसले पर डॉक्टर काफी खुश हैं। दिल्ली के सर गंगा राम हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉक्टर डीएस राणा ने कहा, “मैं इस अध्यादेश का स्वागत करता हूं। ऐसे अध्यादेश की बहुत जरूरत थी। यह अध्यादेश हमला करने वालों के दिमाग में डर पैदा करेगा।”
राष्ट्रपति ने दी मंजूरी

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कोविड-19 महामारी से लड़ रहे योद्धाओ डॉक्टर्स और आरोग्यकर्मीयों को लोगों की बदसलूकी और बेवजह हो रहे हमलों से सुरक्षित रखने के लिए लाए गए केंद्र सरकार के महामारी रोग संशोधन 2020 के इस अध्यादेश को अपनी मंजूरी दी। महामारी रोग अधिनियम 1897 में संशोधन करने वाले इस अध्यादेश में स्वास्थ्यकर्मियों को पहुंचे हर जख्म और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या उसे नष्ट करने के लिए मुआवजे की व्यवस्था की गई है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “राष्ट्रपति इस अध्यादेश की उद्घोषणा के लिए अपनी मंजूरी दे चुके हैं।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए लाए गए इस कानून की सराहना की है। उन्होंने कहा कि इस कानून से हर हेल्थकेर वर्कर की सुरक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का पता चलता है। हम उनकी सुरक्षा से समझौता नहीं कर सकते।
The Epidemic Diseases (Amendment) Ordinance, 2020 manifests our commitment to protect each and every healthcare worker who is bravely battling COVID-19 on the frontline.
It will ensure safety of our professionals. There can be no compromise on their safety!
— Narendra Modi (@narendramodi) April 22, 2020
अध्यादेश के मुताबिक डॉक्टरों पर किया गया हमला अब गैर-जमानती होगा। 30 दिनों में मामले की जांच पूरी होगी और 1 साल के अंदर फैसला आ जाएगा। आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा के तहत 3 महीने से 5 साल जेल हो सकती है। 50 हजार से 2 लाख तक का जुर्माना भी देना पड़ सकता है। किसी को गंभीर चोट आती है तो आरोपी को 6 महीने से लेकर 7 साल तक कैद की सजा हो सकती है और 1 लाख से लेकर 5 लाख रूपये तक उस पर जुर्माना लग सकता है।
इसके अतिरिक्त यदि स्वास्थ्यकर्मियों की गाड़ी को या क्लिनिक को कोई हानि पहुंचती है तो उस परिस्थिति में हमलावरों से जो बाजार वेल्यू होगा उसकी दोगुनी रकम वसूली जाएगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल की और से महामारी के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों तथा संपत्ति की रक्षा के लिए महामारी रोग (संशोधन) अध्यादेश 2020 की उद्घोषणा को मंजूरी दी गई।
महामारी ही नहीं हमेशा लागू हो कानून
दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डॉक्टर सुमेध संदानशिव की और से कहा गया है, “हम केंद्र सरकार के इस कदम का स्वागत करते हैं। यह डॉक्टर्स और स्वास्थ्यकर्मियों का हौसला बढ़ाने का काम करेगा। इसे कानून को सिर्फ वर्तमान महामारी ही नहीं बल्कि भविष्य में आने वाली प्रत्येक आपदा के लिए भी लागू किया जाना चाहिए।”
डॉक्टर एसीसी अग्रवाल उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में डॉक्टर्स और पुलिस की टीम पर हुए हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस अध्यादेश के बारे में डॉक्टर एससी अग्रवाल और उनकी पत्नी का कहना हैं, “केंद्र सरकार के इस अध्यादेश के बाद उम्मीद है कि डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं कम होंगी। डॉक्टरों और उनके परिवारों की सुरक्षा के लिए यह बहुत जरूरी है।”
Dr SC Aggarwal, who was injured in an attack on a medical team in Moradabad, and his wife Dr Deepa Aggarwal, say, "After this Ordinance by the Centre, incidents of violence against doctors might reduce. The safety of doctors and their families is important". pic.twitter.com/RKHSAMUwsp
— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) April 22, 2020
केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया सरकार डॉक्टरों और नर्सों पर हुए हमलो को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगी। स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला करने वालों पर 50 हजार से 2 लाख के जुर्माने का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त 3 महीने से 5 साल की सजा भी हो सकती है। जबकि गंभीर चोट के मामले में अधिकतम 7 साल की सजा भी हो सकती है।
Health workers who are trying to save the country from this epidemic are unfortunately facing attacks. No incident of violence or harrasamemnt, against them will be tolerated. An ordinance has been brought in, it'll be implemented after President's sanction: Union Min P Javadekar pic.twitter.com/LAvGN1NGnh
— ANI (@ANI) April 22, 2020
स्वास्थ्यकर्मियों पर किया हमला गैर-जमानती होगा। प्रकाश जावड़ेकर ने आगे कहा कि 123 साल पुराने कानून में बदलाव करते हुए डॉक्टरों पर हमले को सहन नहीं करने का फैसला किया गया है। उन्होंने कहा कि गंभीर चोट के मामलों में हमला करने वालों को 6 महीने से 7 साल तक की सजा हो सकती है। ऐसे मामलों में जुर्माना 1-5 लाख तक होगा। गाड़ी या क्लिनिक का नुकसान करने पर बाजार रेट से दोगुना नुकसान हमलावारों से वसूल किया जा सकता है।

