महाराष्ट्र में जोड़-तोड़कर भाजपा को सत्ता से बाहर करने में सफल रहे शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन में सबकुछ सामान्य न होने की खबरें अब जोर पकड़ने लगी हैं। हालांकि गठबंधन के तीनों धटक दलों का शीर्ष नेतृत्व ‘आज इज वेल’ का दावा करते रहे है, सरकार की गाड़ी साफ तौर पर लड़खड़ाती दिखने लगी हैं। कुछ अर्सा पहले गृह विभाग में हुए तबादलों को सीएम ठाकरे रोकने पर मजबूर कर दिये गए थे क्योंकि कांग्रेस और एनसीपी ने बगैर उनकी सलाह लिए किए गए इन तबादलों पर असंतोष जता डाला था। इसके बाद गतवर्ष जुलाई महिने में कांग्रेस कोटे के मंत्री नीतिन राऊत को तब बैकफुट पर आना पड़ा था जब राज्य की चार पावर कंपनियों में 16कांग्रेस सर्मथकों को उन्होंने डायरेक्टर पद पर नियुक्त कर शिवसेना और एनसीपी को नाराज कर दिया था। बाद में इन सभी नियुक्तियों को राउत कैंसिल करने पर मजबूर हो गए थे। अब खबर है कि मुंबई कांग्रेस के नए अध्यक्ष अशोक जगताप के नारे ‘मेरी मंबई, मेरी कांग्रेस’ से शिवसेना खासी नाराज हैं। दरअसल शिवसेना की असली ताकत मुंबई है जहां अगले वर्ष नगरपालिका के चुनाव होने है। मुंबई महानगर पालिका देश की सबसे बड़ी, सबसे ज्यादा बजट वाली संस्था है। अशोक जगताप हर कीमत में इन चुनावों के जरिये महानगर में पार्टी की स्थिति मजबूत करने का अभियान छेड़ चुके हैं। कार्यकत्ताओं में जोश करने के लिए उन्होंने ‘मेरी मुंबई, मेरी कांग्रेस’ नारे को उछाल दिया है। शिवसेना का मानना है कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष उसके गढ़ में अतिक्रमण कर गठबंधन धर्म का उल्लंधन कर रहे हैं। दूसरी तरफ भाजपा अगाड़ी सरकार के पार्टनर्स की लड़ाई जमकर मजा से ले रही है। उसके नेता एक बार फिर भाजपा सरकार बनने की बात अब खुलकर कहने लगे हैं।
बढ़ रहा है अगाड़ी गठबंधन में तनाव

