Sargosian / Chuckles

दलबदलू नेताओं को साध रहे हैं हरीश रावत

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत के लिए कहा जाता है कि उनकी राजनीतिक पैंतरेबाजी को उनके सबसे करीबी भी समझने का दावा नहीं कर सकते। 2016 में उनके उत्तराखण्ड का मुख्यमंत्री रहते कांग्रेस के कई बड़े नेता बागी हो भाजपा में शामिल हो गए थे। फरवरी, 2017 में राज्य विधानसभा के लिए हुए चुनावों में न केवल कांग्रेस को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा था, हरीश रावत स्वयं दो सीटों से चुनाव हार गए थे। रावत विरोधियों ने तब ‘अब रावत खत्म’ की बात कहनी शुरू कर दी थी। राजनीति के शातिर खिलाड़ी रावत लेकिन

अपने विरोधियों के कयासों को धता बता पूरी ताकत के साथ मैदान में डटे हैं। कांग्रेस आलाकमान द्वारा पार्टी का महासचिव और कांग्रेस वर्किंग कमेटी का स्थाई सदस्य बनाए जाने के बाद से ही रावत लगातार धुंआधार बैटिंग करते नजर आ रहे हैं। असम में बतौर प्रभारी पार्टी काडर को उन्होंने लगातार दौरे कर नई ऊर्जा देने का काम किया तो अब पंजाब के प्रभारी बनने के साथ ही राज्य के सीएम अमरिंदर सिंह और असंतुष्ट नेता नवजोत सिद्दू के बीच सुलह कर राहुल और प्रियंका गांधी की निगाहों में चढ़ गए हैं। रावत के करीबियों का दावा है कि कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें उत्तराखण्ड में पार्टी को वापस सत्ता में लाने के लिए कार्ययोजना बनाने को कहा है। खबर यह भी गर्म है कि पार्टी आलाकमान को विश्वास में लेकर रावत कांग्रेस छोड़ भाजपा में गए बागी नेताओं में से कुछ जनाधार वाले नेताओं की वापसी का प्रयास कर रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि गत् पखवाड़े रावत ने ऐसे तीन बड़े नेताओं से गोपनीय मुलाकात भी कर डाली है। रावत समर्थक और पिछली सरकार में दर्जा प्राप्त एक नेता की मानें तो गढ़वाल के एक दमदार नेता ने रावत से करीब दो घंटे देहरादून में मुलाकात की है। दूसरी तरफ एक कद्दावर नेता से वे पिछले दिनों अपने कुमाऊं प्रवास के दौरान एक समर्थक के घर में मिल चुके हैं। एक अन्य बागी हुए दबंग छवि के नेता संग रावत के एक वैवाहिक समारोह के मध्य अलग से बैठने की खबर भी है।

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