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हवाई साबित होते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दावे

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता पर काबिज होने के दौरान भले ही भ्रष्टाचामुक्त शासन-प्रशासन के दावे किए हों, लेकिन उनके दावों की हवा महज डेढ़ वर्ष में ही निकलती नजर आ रही है। स्थिति यह है कि तमाम सुबूतों के आधार पर भ्रष्टाचार और फर्जीवाडे़ की जानकारी देने के बावजूद कथित भ्रष्टों के खिलाफ योगी सरकार कार्रवाई करती नजर नहीं आ रही। योगी सरकार में भ्रष्टाचार इस कदर हावी है कि भाजपा सांसद की शिकायतों को भी तवज्जो नहीं दी जा रही। मामला राजधानी लखनऊ से मात्र 20 किलोमीटर दूर बाराबंकी जनपद का है। एक व्यक्ति ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शिक्षक की नौकरी हासिल कर ली। जानकारी मिलने पर सम्बन्धित विभाग के अधिकारियों के जांच के पश्चात मामले को थाने में पंजीकृत करवाने के बाबत कई पत्र लिखे लेकिन न तो विभागीय अधिकारियों ने इस मामले को गंभीरता से लिया और न ही सम्बन्धित थाने की पुलिस ने ही। थक-हारकर जांच करने वाले अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट बीएसए को भेज दी। बताया जाता है कि फर्जीवाडे़ से जुडे़ इस मामले की प्राथमिकी दर्ज करवाने के लिए बीईओ लगभग एक सप्ताह तक सम्बन्धित थाने के चक्कर लगाता रहा। इस दौरान दो थानों की पुलिस उसे यह कहकर इधर-उधर दौड़ाती रही कि फलां मामला फलां थाने से सम्बन्धित है। दो थानों के बीच फिरकी बना अधिकारी जब तंग आ गया तो उसने थानों के चक्कर लगाने के बजाए जांच रिपोर्ट बीएसए को कार्रवाई के बाबत भेज दी।
बताते चलें कि विगत वर्ष मई माह में 12460 शिक्षक भर्ती के 287 पदों के सापेक्ष 198 पद पर शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया सम्पन्न हुई थी। कुछ व्यक्तियों ने सरकारी स्कूलों का शिक्षक बनने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। कहा तो यही जा रहा है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पाने वाले शिक्षकों की संख्या सैकड़ों में है लेकिन फिलहाल एक ही मामला सामने आया है और इसी आधार पर पूरी भर्ती प्रक्रिया को लेकर जांच किए जाने की मांग की जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार फर्जी अभिलेखों के आधार पर नौकरी पाने वाले शिक्षकों की शिकायत सांसद प्रियंका सिंह रावत से भी की गयी थी और वह भी बाकायदा दस्तावेजों के साथ। प्रियंका सिंह रावत ने मामले की गंभीरता को संज्ञान में लेते हुए शासन को अवगत कराते हुए जांचोपरान्त कार्रवाई किए जाने की सिफारिश की। जांच में सूरतगंज ब्लाॅक के प्राथमिक विद्यालय डिहवा में तैनात शिक्षक विनोद कुुमार सोनी की टीईटी की मार्कशीट फर्जी पाई गई। जांच के उपरांत
शिक्षक पर मुकदमा दर्ज कराने का आदेश बीईओ सूरतगंज को दिया गया। आदेश मिलने के बाद बीईओ ने मोहम्मदपुर खाला थाना क्षेत्र में मुकदमा दर्ज कराने की तहरीर दी लेकिन मोहम्मदपुर खाला थाने की पुुलिस ने उक्त अध्यापक की नियुक्ति नगर कोतवाली क्षेत्र में होने की बात कहकर मुकदमा दर्ज करने से मना गया। इसके बाद बीईओ नगर कोतवाली पहुंचा, वहां भी पुलिस ने शिक्षक के मोहम्मदपुर खाला थाना क्षेत्र में होने की बात कहकर बीईओ को वापस कर दिया।
इस मामले में बीएसएस वीपी सिंह का कहना है कि सूरतगंज ब्लाॅक के प्राथमिक विद्यालय डिहवा में तैनात शिक्षक विनोद कुुमार सोनी की टीईटी की मार्कशीट फर्जी मिलने के बाद उसकी सेवाएं समाप्त कर दी गई है। शिक्षक पर मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश बीईओ को दिए गए थे लेकिन दो थानों की पुलिस एक-दूसरे थाना क्षेत्र के मामले की बात कहकर केस दर्ज करने से बच रही है। बीईओ से मिली रिपोर्ट के बाद केस दर्ज कराने के लिए एसपी को पत्र भेजा गया है। उम्मीद जतायी जा रही है कि जल्द ही फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल करने वाले शिक्षक के खिलाफ सम्बन्धित थाने में प्राथमिकी दर्ज करने के पश्चात उसके खिलाफ विधि सम्मत कार्रवाई की जायेगी।

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