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हुड्डा-सोनिया मुलाकात, मिलेंगे हाथ या होगी बॉय-बॉय

 

हरियाणा में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा फिलहाल राजनितिक इतिहास रचने को आतुर दिखते है। खासकर गत 18 अगस्त से जबसे उनकी रोहतक रैली में लोगो का भरी जनसमूह उमड़ा था। तब यह चर्चाए जोरो से थी की वह कांग्रेस का दामन छोड़ सकते है। लेकिन तब उन्होंने मामला कुछ दिन के लिए टाल दिया ।

बहरहाल, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा राजनीति में निर्णायक मोड़ पर हैैं। कांग्रेस के प्रति कभी गरम तो कभी नरम तेवर दिखाने वाले हुड्डा अपनी आगे की सियासत के बारे में बड़ा फैसला कर सकते हैं। हुड्डा ने अपने भविष्य की राजनीतिक दिशा तय करने के लिए 38 सदस्यीय कमेटी जिसमे हरियाणा के 11 विधायक भी शामिल है,की बैठक बुलाई । इस कमेटी का गठन रोहतक रैली में किए गए निर्णय के अनुरूप अगली राजनीतिक दिशा तय करने के लिए किया गया था। जिसके बाद यह तय हुआ कि निर्णय लेने से पहले एक बार कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से एक बार मुलाकात होनी ही चाहिए। इसके मद्देनजर ही आज हुड्डा की सोनिया के साथ दिल्ली में मुलाकात हुई। हालांकि इस मुलाकात का श्रेय पार्टी के हरियाणा प्रभारी गुलामनबी आजाद को जाता है।

 

सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद हुड्डा से जब पत्रकारों ने सवाल किए तो वह बिना कोई जवाब दिए ही चुपचाप चले गए। सोनिया से मुलाकात के दौरान हुड्डा की क्या बात हुई ? हुड्डा फिलहाल पार्टी में ही रहेंगे या अलग दल बनाएंगे यह तो नहीं कहा जा सकता है। लेकिन जिस तरह से पार्टी के विधायक कारन दलाल ने संकेत दिए है उससे हुड्डा के फिलहाल कांग्रेस में रहने की उम्मीदों को बल मिलता दिख रहा है। हालांकि अभी स्पष्ट तौर पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। बताया जा रहा है की सोनिया गांधी से मिलने के बाद हुड्डा पहले एक बार अपनी 38 सदस्यीय कमेटी से बात करेंगे। उसके बाद ही तय होगा की वह कांग्रेस के हाथ से हाथ मिलाए रखेंगे या पार्टी को बॉय बॉय करेंगे ?

 

गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा ने बीती 18 अगस्त को रोहतक में महापरिवर्तन रैली कर कांग्रेस आलाकमान पर दबाव डालने का पूरा प्रयास किया था। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस भटक चुकी है, मैं खुद को अतीत से मुक्त करता हूं। हुड्डा ने 38 सदस्यों की एक कमेटी बनाने का फैसला किया था, जिसे यह तय करना था कि हुड्डा कांग्रेस में रहेंगे या नहीं। हालांकि यह कमेटी कुछ तय नहीं कर पाई है। चर्चा है कि हुड्डा ने यह कदम कांग्रेस आला कमान पर दबाव बनाने के लिए किया था।

जगजाहिर है कि कांग्रेस में हुड्डा की लड़ाई पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष तंवर अशोक से है। तंवर भले ही खुद को प्रदेशाध्यक्ष कहते हों लेकिन हुड्डा ने इसे कभी नहीं माना। हुड्डा और तंवर खेमे का विरोध समय-समय पर कांग्रेस में सामने आता रहा है। फिर चाहे वह पगड़ी विवाद हो या फिर नारेबाजी करना। कहा जा रहा है कि हुड्डा आगामी विधानसभा चुनाव में तंवर को किनारे कर पूरी कमान अपने हाथ में लेना चाहते हैं।

बहरहाल , कांग्रेस के आपसी विवाद की वजह से ही विधानसभा चुनाव नजदीक आने के बाद भी कांग्रेस पार्टी चुनावी रेस में पीछे नजर आ रही है। अभी तक कोई तैयारी नहीं है। जहां एक तरफ भाजपा तेजी से प्रचार अभियान चलाए हुए है, वहीं कांग्रेस अंदरुनी कलह में फंसी हुई है। इसी के चलते आला कमान इस मुद्दे पर कठोर फैसला लेने के मुंड में बताई जा रही है, ताकि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस बेहतर प्रदर्शन कर सके।

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