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राहुल के दावे में कितना है दम?

लोकसभा में जब से राहुल गांधी नेता विपक्ष बने हैं तब से एक के बाद एक राजनीतिक शिगूफा छोड़ रहे हैं। गत् सप्ताह उन्होंने यह कहकर सियासत गरमा दी है कि ‘इंडिया अलायंस’ अगले चुनाव में बीजेपी को हरा देगा। उनके इस बयान के बाद चर्चा तेज हो गई है कि क्या वाकई में कांग्रेस ऐसा कर सकती है? खासकर पीएम मोदी और अमित शाह के गृह राज्य गुजरात में बीजेपी को शिकस्त दे सकती है? राहुल के दावे में कितना दम है?
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राहुल के दावे के पीछे जो भी आधार हो लेकिन गुजरात में कांग्रेस की स्थिति दयनीय है। कांग्रेस 2024 के चुनाव में मुश्किल से एक सीट जीत पाई है। पिछले दो चुनावों में कांग्रेस शून्य पर सिमट गई थी। विधानसभा में कांग्रेस के पास 182 में से सिर्फ 13 विधायक हैं। 2022 में हुए गुजरात विधानसभा चुनाव के बाद से अब तक कांग्रेस के चार विधायक पार्टी छोड़कर बीजेपी में जा चुके हैं। भविष्य में और विधायक पार्टी नहीं छोड़ेंगे, इसकी कोई गारंटी गुजरात से लेकर दिल्ली तक नहीं दी जा है।

वो भी तब जब 2002 के बाद अब तक 200 से ज्यादा बड़े नेताओं ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थामा है। इनमें कई नेता वर्तमान भूपेंद्र पटेल सरकार में कैबिनेट और राज्य मंत्री हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी का दावा कि लिखकर ले ले भाजपा को ‘इंडिया गठबंधन’ हराएगा वो भी गुजरात में, फिलहाल हवा-हवाई ही लगता है। लेकिन राहुल के इस बयान से उनके मिशन गुजरात की शुरुआत मान सकते हैं। उनका मानना है कि राजकोट में टीआरपी गेम जोन मुद्दे पर कांग्रेस के सफल बंद से राहुल गांधी गदगद हैं। हो सकता है उन्होंने उत्साह में इतना बड़ा बयान दिया हो। ऐसे में जब गुजरात में अगले विधानसभा चुनावों में अभी काफी वक्त है तब राहुल गांधी एक बार फिर मिशन गुजरात पर काम कर रहे होंगे शायद इसलिए ऐसा बयान दिया है।

कांग्रेस की मौजूदा स्थिति को देखें तो पार्टी के पास राज्य में 13 विधायक, 1 राज्यसभा और 1 लोकसभा सीट है। गुजरात के सभी बड़े शहरों के नगर निगमों पर बीजेपी का कब्जा है। इतना ही नहीें सहकारी क्षेत्र में भी कांग्रेस का दबदबा ध्वस्त हो चुका है। गौरतलब है कि गुजरात में कांग्रेस ने अपनी सत्ता 13 मार्च, 1995 को खो दी थी। छबीलदास मेहता गुजरात में कांग्रेस के आखिरी मुख्यमंत्री थी। इसके बाद राज्य में बीजेपी का उदय हुआ था। आगे चलकर शंकर सिंह वाघेला अक्टूबर, 1996 से लेकर 27 अक्टूबर 1997 तक कांग्रेस के सहयोग से मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन वह राष्ट्रीय जनता पार्टी की मुख्यमंत्री थी। ऐसे में कांग्रेस राज्य में लंबे समय से बाहर है।

एक पूरी पीढ़ी ने कांग्रेस का तो शासन ही नहीं देखा है। हिंदुत्व के मजबूत गढ़ के तौर पर पहचाने जाने वाले गुजरात में कांग्रेस की राह उतनी भी आसान नहीं है जैसा राहुल दावा कर रहे हैं। हाल में ही बीजेपी को लोकसभा चुनाव में 61.86 फीसदी वोट मिले जबकि कांग्रेस के खाते में 31.24 फीसदी वोट आए। इसमें ‘आप’ के 2.69 फीसदी वोट को जोड़ दें तो भी कांग्रेस और बीजेपी में बड़ा अंतर है। ऐसे में कांग्रेस के अभी गुजरात में जीत दूर ही नहीं बल्कि मीलों दूर है।

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