एक कहावत है ‘जब सैया भये कोतवाल तो डर काहे का‘। यह कहावत शाजहांपुर के चिन्मयानंद रेप केस मामले में सटीक बैठती प्रतीत हो रही है। गत 24 अगस्त को यूपी की सियासत में सनसनी मच गई थी जब केंद्रीय पूर्व राज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद पर उनके ही कॉलिज की एक छात्रा ने एक वीडियो जारी की थी। शोशल मिडिया पर इस वीडियो के जारी होने के बाद छात्रा के पिता ने चिन्मयानंद के खिलाफ बेटी के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज करा दी थी।
एक महीने के हाईफाई ड्रामे के बाद आखिर 20 सितंबर को पुलिस ने गिरफ्तार तो कर लिया। लेकिन उसपर दुष्कर्म की धाराओं में मामला दर्ज नहीं करके शारीरिक शोषण का मामला दर्ज किया। इसके बाद अब इस मामले की जाँच कर रही एसआईटी ने पीड़िता छात्रा पर सिकंजा कसना शुरू कर दिया है। खबर है कि पूर्व गृह राज्य मंत्री पर रेप का आरोप लगाने वाली पीड़िता को भी गिरफ्तार किया जा सकता है। केस की पड़ताल कर रही एसआईटी की फाइलों में इस लड़की की पहचान बतौर ‘मिस ए’ दर्ज है। शायद यही वजह है कि एसआईटी की गिरफ़्तारी के डर से पीड़िता छात्रा अपने परिवार के साथ प्रयागराज चली गई है।

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन राज्य सरकार ने किया था। साथ ही एसआईटी पर निगरानी के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट की दो सदस्यीय विशेष पीठ भी बनाई गई थी। अब यही एसआईटी इस लड़की को गिरफ्तार करने की तैयारी में है। इसकी वजह है इस मामले में अब तक सामने आए सनसनीखेज खुलासे और वीडियो।
जांच के दौरान एसआईटी को पता चला कि पीड़िता के कुछ साथी स्वामी को आपत्तिजनक वीडियो के जरिए फंसाकर मोटी रकम वसूलने की फिराक में थे। गवाह-सबूत हाथ लगते ही एसआईटी ने पीड़िता के तीन साथियों को गिरफ्तार करके स्वामी के साथ ही जेल में डाल दिया था।
बताया जा रहा है कि जबरन धन वसूली के मामले में एसआईटी ने पीड़िता की मां की भूमिका भी संदिग्ध पाई थी। लिहाजा एफआईआर में उसका नाम भी एसआईटी ने शामिल कर लिया था। पुलिस की पड़ताल के दौरान, ब्लैकमेल कर जबरन धन वसूली के तथ्य के बाद पीड़िता की भी भूमिका पूरे मामले में कहीं न कहीं संदिग्ध हो चली है।
एसआईटी के एक सूत्र के मुताबिक, स्वामी के आपत्तिजनक वीडियो जब पीड़िता ने खुद बनाए तो फिर आखिर वे वीडियो मामले में गिरफ्तार किए जा चुके मुलजिमों के पास कैसे पहुंच गए? बिना पीड़िता की मदद या अनुमति के. ऐसे में स्वामी से जबरन धन वसूली के मामले में क्या पीड़िता को भी गिरफ्तार कर लिया जाए? हलाकि एसआईटी ने पीड़िता की सारी रिपोर्ट बनाकर हाईकोर्ट में पेश कर दी है। जिसमे 23 सितंबर को पीड़िता पर रंगदारी मामले की सलिप्ता से संबंधित सबूत हाईकोर्ट में पेश किये जा चुके है।

सूत्र बताते हैं कि अगर हाईकोर्ट की बेंच ने एसआईटी को इजाजत दे दी तो वह बहुत जल्द पीड़िता को भी गिरोह बनाकर स्वामी से जबरन धन वसूली के आरोप में गिरफ्तार कर सकती है। लेकिन सब कुछ एसआईटी की सीलबंद रिपोर्ट में पेश सबूतों और हाईकोर्ट के निर्देशों पर ही निर्भर होगा।


