लोकसभा चुनाव के अंतिम मतदान से दो दिन पहले जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध दार्शनिक स्थल केदारनाथ गये तो पूरे देश और दुनिया का ध्यान बाबा केदारनाथ के धाम की ओर आकर्षित हुआ था । इसके चलते देश और दुनिया के श्रद्धालुओ में केदारनाथ जाने की होड़ सी मच गई । इससे उत्तराखंड में तीर्थाटन को बढावा तो मिला ही साथ ही पर्यटन की बेहतर संभावना भी बढी है।
2013 में जहा आपदा आने से पर्यटको के मन में भय व्याप्त हो गया था। जिसके चलते केदारनाथ के तीर्थाटन पर बुरा असर पडा था । वही अब लोगों में यह डर समाप्त हो गया है। केदारनाथ पर बढती तीर्थयात्रियों की भीड इसका उदाहरण है। बहराहाल, केदारनाथ पर दर्शकों का ध्यान इस बार उस गुफा पर भी है जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साधना की थी ।जिसकी कई महीनों तक अग्रिम बुकिंग भी हो चुकी है।
श्रद्धालुओं की गुफा में साधना करने की फरमाइश को देखते हुए शासन ने अब और भी गुफा बनाने का प्रस्ताव बनाया है । जल्द ही केदारनाथ धाम में कई गुफाएं अस्तित्व में आ सकती है ।इससे उत्तराखंड के पर्यटन को बढ़ावा मिलना तय है ।
गौरतलब है कि 18 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केदारनाथ धाम में दर्शन करने आए थे और केदारनाथ धाम में बने ध्यान गुफा में साधना की थी। जिससे उत्तराखंड धार्मिक महत्व के साथ-साथ पर्यटको के आकर्षक का केंद्र बन गया है। अब सैलानी केदारनाथ में बने ध्यान गुफा में रूककर ध्यान लगाना चाहते है। हालांकि केदारनाथ और बद्रीनाथ में 18 मई को प्रधानमंत्री के दौरे के बाद यात्रियों में काफी इजाफा देखा गया है।
उत्तराखंड के पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर के अनुसार केदारनाथ धाम को डेवलप करने के लिए जो मास्टर प्लान बनाया गया हैं उसी में एक कंपोनेंट ये भी था कि जो भी श्रद्धालु केदारनाथ में ध्यान या आराधना करना चाह रहे हैं उनके लिए केदारनाथ में ही छोटी सी गुफा बनाई गई थी। और उसी गुफा में बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक रात बिताई थी और वह ध्यान लगाया था ।जिसके बाद ध्यान गुफा में रुकने के लिए काफी श्रद्धालुओं की डिमांड है, और अगले 2 महीने तक के लिए इसकी बुकिंग फुल हो चुकी है।
पर्यटन सचिव ने बताते है कि लोगों की गुफा में रुकने की रुचि को देखते हुए रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी से इस संबंध में वार्ता की गई थी कि इसके अतिरिक्त कोई और गुफा अगर बनाई जा सकती है तो उसे बनाया जाना चाहिए। ताकि इससे यात्रियों को और लाभ हो और तीर्थाटन को बढावा मिल सके। इसी क्रम में जिलाधिकारियों ने दो जगहो को चिन्हित कर लिया है और जल्द ही शासन स्तर पर जाकर इन जगहों का निरीक्षण किया जाएगा । अगर इन दोनों जगह में से कोई भी जगह सूटेबल या सही होती है, तो उस स्थान पर भी केदारनाथ की तरह ही गुफा बनाने का प्रयास किया जाएगा । फिलहाल इसके लिए प्रस्ताव बनाया जा रहा है।

