वर्ष 2021 में विधानसभा होना है। राज्य में राजनीतिक हलचल अभी से तेज हो चुकी हैं। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने अपना गढ़ बचाने की बहुत बड़ी चुनौती है। पार्टी के कई कद्दावर नेता भाजपा में शामिल हो चुके हैं। ऐसे में उन्होंने भाजपा के खिलाफ लड़ाई में कांग्रेस और वामदल का साथ मांगा था। फिर दोनों ही पार्टियों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया था। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने उन्हें गठबंधन के स्थान पर अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय करने की सलाह दे डाली। वामदल ने भी टीएमसी को अपना जवाब दे दिया है।
वाम मोर्चा के अध्यक्ष बिमन बोस ने 17 जनवरी को कहा, पश्चिम बंगाल को धार्मिक धुव्रीकरण से बचाने के लिए हम भाजपा और टीएमसी के खिलाफ मिलकर चुनाव लड़ेंगे। कांग्रेस ने टीएमसी की सलाह के बाद पेशकश की है कि वह भाजपा के खिलाफ लड़ाई के लिए गठबंधन बनाने के स्थान पर पार्टी (कांग्रेस) में विलय कर लें। राज्य कांग्रेस प्रमुख अधीर रंजन चैधरी ने प्रदेश में भाजपा के मजबूत होने के लिए सत्तारूढ़ दल को जिम्मेदार बताया। और कहा कि हमें तृणमूल कांग्रेस के साथ गठबंधन में कोई दिलचस्पी नहीं है।

