पश्चिम बंगाल में अप्रैल- मई में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। बीजेपी और सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बीच दिलचस्प मुकाबना होने जा रहा है। इस बीच, टीएमसी सुप्रीमो तथा बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक खास ऐलान किया है। ममता ने नंदीग्राम से चुनाव लड़ने का 18 जनवरी को पारंपरिक तौर से ऐलान किया। ये घोषणा काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, इसलिए कि नंदीग्राम को टीएमसी के बागी नेता सुवेंदु अधिकारी का गढ़ कहा जाता है। जोकि हाल में टीएमसी से अलग होकर भाजपा में शामिल हो गए हैं। ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में एक बहुत बड़ी सभा में ऐलान किया कि मैं नंदीग्राम से लडूंगी। नंदीग्राम मेरे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। पिछले चुनाव में ममता बनर्जी ने कोलकाता की भवानीपुर सीट से जीत हासिल की और वहां से विधायक भी हैं। तृणमूल कांग्रेस के दिग्गज नेता माने जाने वाले और अब बीजेपी में शामिल हो चुके सुवेंदु अधिकारी ने भी ममता बनर्जी के खिलाफ नंदीग्राम से विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर वो 50 हजार से कम वोटों से ममता बनर्जी को नहीं हरा पाए तो राजनीति से संन्यास ले लेंगे।
66 वर्षीय मुख्यमंत्री ने संकेत दिया है कि वह दो विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ने जा रही हैं। उन्होंने कहा कि नंदीग्राम मेरी बड़ी बहन है, भवानीपुर मेरी छोटी बहन है। अगर संभव हुआ तो मैं दोनों जगह से चुनाव लड़ूंगी। यदि मैं किसी कारणवश भवानीपुर से चुनाव नहीं लड़ पाई तो कोई और चुनाव लड़ेगा। गौरतलब है कि नंदीग्राम में किसानों की जमीन को लेकर चलाए गए, अभियान ने 2011 के विधानसभा चुनाव में ममता को सत्ता में आने में काफी सहयोग किया। तब उन्होंने वाम दलों को करारी शिकस्त देकर जीत दर्ज की थी। साल 2007 में नंदीग्राम में सेज परियोजना के खिलाफ प्रदर्शन में 14 लोगों की मौत हो गई थी। लेफ्ट सरकार ने इस परियोजना को मंजूरी दी थी। इसके बाद के चुनाव में ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस ने ‘मां, माटी, मानुष’ अभियान भी चलाया था। ममता बनर्जी का नंदीग्राम लौटना सुवेंदु अधिकारी के लिए सीधी चुनौती है, जिन्होंने दिसंबर महीने में गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में एक मेगा रैली में तृणमूल कांग्रेस को छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था।
सुवेंदु अधिकारी का नंदीग्राम में काफी वर्चस्व माना जाता है। वहीं मिदनापुर से उनके पिता शिशिर अधिकारी यूपीए सरकार में ग्राम राज्यमंत्री थे। उनके भाई देबेन्दु अधिकारी सांसद हैं। ममता बनर्जी के करीबी रहे अधिकारी ने 2007 में नंदीग्राम से लेफ्ट को उखाड़ फेंका और तृणमूल को यहां की सियासत में सफल भी हुई। आगामी विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम की सियासी जंग ममता बनर्जी के लिए काफी महत्वपूर्ण होगी। वहां उनका सीधा मुकाबला अपने पुराने विश्वसनीय सहयोगी से होगा। ममता के तेवर से लगता है कि वे न तो पार्टी छोड़कर जाने वालों को बख्शने के मूड में हैं और न ही अपने अभियान में जरा भी विचलित हैं।

