14 महीने बाद नजरबंदी से रिहा होने के बाद जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती अब तिरंगे के विवादास्पद बयान पर फंसती नजर आ रही है । यहां तक की तिरंगे को न उठाने की बात कर वह फिरंगियों की लिस्ट में शामिल हो चुकी है। कल बीजेपी ने जहां पीडीपी ऑफिस पर तिरंगा फहराया तो वहीं दूसरी तरफ खुद उनकी पार्टी के नेता महबूबा मुफ्ती के खिलाफ हो गए हैं।
फिलहाल तिरंगे पर विवादास्पद बयान देकर महबूबा मुफ्ती बुरी तरह फंस चुकी है। इसके चलते उसके तीन नेता पार्टी छोड़ गए हैं ।इन नेताओं में बीएस बाजवा, हुसैन ए वफा और वेद महाजन आदि है । तीनों ही नेताओं का कहना है कि पार्टी प्रमुख महबूबा मुफ्ती के बयान और उनके कुछ फैसलों से उनकी भावनाएं आहत हुई है। खासकर मुफ्ती के आर्टिकल 370 की वापसी तक तिरंगे को नहीं उठाने वाले बयान से। पीडीपी के तीनो ही नेताओं ने पार्टी से इस्तीफा देते वक्त कहा कि उनकी पार्टी मुखिया का यह बयान देशभक्ति को चोट पहुंचाने वाला था । जिसके चलते उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।

गौरतलब है कि 1 साल 2 महीने बाद जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती नजरबंदी से रिहा हुई है। नजरबंदी से रिहा होते ही उन्होंने विवादास्पद बयान दे डाला। उन्होंने कहा कि आर्टिकल 370 से फिर से लागू होने तक जम्मू कश्मीर के अलावा कोई और झंडा नहीं उठाएगी। जब तक कि उनका ( जम्मू कश्मीर ) का झंडा वापिस आ जाएगी।
कल इस मामले को लेकर भाजपा की जम्मू कश्मीर इकाई ने महबूबा की गिरफ्तारी की मांग की। भाजपा कार्यकर्ता श्रीनगर में लाल चौक स्थित पीडीपी ऑफिस पहुंचे और जम्मू कश्मीर के झंडे के ऊपर ही तिरंगा लहरा दिया। याद रहे कि इससे पहले रविवार को भी भाजपा के छात्र संगठन एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने लगातार दूसरे दिन जम्मू कश्मीर में प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने महबूबा मुफ्ती के खिलाफ नारेबाजी की।
इस प्रकरण पर छिड़ी बहस के बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र रैना कहते हैं कि वह उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से अनुरोध करेंगे कि वह महबूबा मुफ्ती की टिप्पणी का संज्ञान ले और देशद्रोही कृत के लिए उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचाएं।

