रानीखेत के विधायक बनने के बाद इन दो सालों में आपने क्या-क्या विकास कार्य किए?
रानीखेत का एक बहुत बड़ा नकारात्मक पहलू यह था कि आज तक जिस पार्टी की सरकार रही उसका कभी यहां विधायक नहीं रहा। यहां के विधायकों की आवाज में वो ताकत नहीं रह गई थी। मुझ पर मां झूलादेवी का आशीर्वाद है कि पहली बार इस मिथक को तोड़ने में मुझे कामयाबी मिली। उसका परिणाम भी यह है कि हमारे यशस्वी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और हमारे सांसद अजय टम्टा के नेतृत्व में अभूतपूर्व कार्य हमारी विधानसभा क्षेत्र में हुए। करीब 300 करोड़ की परियोजनाओं पर कार्य हमारी विधानसभा में हो रहे हैं। बयेड़ी ग्राम समूह पम्पिंग पेयजल योजना, भवानी देवी पम्पिंग योजना, हीरानंद महाराज पेयजल योजना, सिलोर देवी पम्पिंग योजना सहित तमाम पेयजल योजनाएं यहां पर चल रही हैं। लोगों के जीवन में आमूलचूल परिवर्तन हुआ है। रामनगर से लेकर रानीखेत तक भुजान को जोड़ने वाली सड़क में वर्षों से डामरीकरण और हॉटमिक्स नहीं हुआ था। हमने प्रयास किया। माननीय मुख्यमंत्री जी और माननीय केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जी के पास गए। उन्होंने भी इस कार्य को कराने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। यह काम प्रगति पर है। इसका चौड़ीकरण करके इसको टू लेन बनाया जाए, इसके लिए हमारा प्रयास जारी है। बहुत जल्दी ही हमारी यह योजना पूरी हो जाएगी। हमारे सबसे बड़े हॉस्पिटल रानीख्ेत में कई कार्य हो रहे है। माननीय मुख्यमंत्री जी जब पहली बार अल्मोड़ा आए थे तो उन्होंने हमसे दस महत्वपूर्ण मांगों की सूची ली थी। वो दस मांगों में हमारी पहली मांग है कि रानीखेत में जो सिविल हॉस्पिटल है, जहां करीब चार-पांच विधानसभाओं के लोग आकर इलाज कराते हैं उसमें आजतक सिटी स्कैन, एमआरआई मशीन नहीं है जिससे लोगों को बहुत परेशानी होती हैं। माननीय मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद आज सिटी स्कैन और एमआरआई मशीन के लिए कमरे लगभग बन चुके हैं। मुझे विश्वास है कि जल्द ही यहां एमआरआई और सिटी स्कैन शुरू हो जाएगा। हमारे विधानसभा क्षेत्र की तमाम सड़केें बननी हैं। जिसमें बैना सड़क, दूनाकोट शैरा सड़क और दरकोट सड़क, सीमाधार से भिकियासैण को जोड़ने वाली सड़क और गोविंदपुरा रिखाड़ी वाली सड़क सहित हमारे क्षेत्र की तीन-चार सड़कें जैसे पंत कुटली सड़क, चमड़खान सड़क, पीपली मयूरखान वाली सड़कों पर सैकड़ों करोड़ के काम चल रहे हैं। तमाम क्षेत्र की सड़कें हम बना देंगे। अभी हमें साल दो साल ही हुए हैं, इस कार्यकाल में इतनी सड़कों पर काम हो रहे हैं।
आप कह रहे हैं कि बहुत-सी पम्पिंग योजनाएं चल रही हैं लेकिन अभी भी यहां के बाशिंदे पानी के लिए प्यासे हैं?
पहले एक ट्यूबवेल तीन-चार बार खोदा जाता था, कभी यहां तो कभी वहां खुदाई की मशीन लगती रहती थी। लेकिन हमारी सरकार और प्रधानमंत्री मोदी जी का सपना है कि हर घर जल, हर घर नल, उस योजना के तहत हमारे यहां रानीखेत के लिए 97 करोड़ की योजना की डीपीआर बन चुकी है। बहुत जल्द ही रानीखेत के लिए यह पेयजल योजना शुरू हो जाएगी। मोदी जी और धामी जी के नेतृत्व में समयबद्ध तरीके से निर्माण कार्य पूरे होते हैं यह सारी दुनिया जानती है। मुझे लगता है कि बहुत जल्द ही एक-डेढ़ साल में भरपूर पानी हमारे रानीखेत के लिए मिलेगा और जो दिक्कतें हैं जन शिकायतें हैं जैसे कि पुरानी योजनाओं में पाइप लीकेज आदि की उनका समाधान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त और भी कई दिक्कतें हैं लेकिन फिर भी मैं अपने जल विभाग, जल निगम संस्थान के अधिकारियों को बहुत-बहुत साधुवाद देता हूं कि वह लोगों के घरों तक निर्बाध पानी पहुंचा रहे हैं, इसके लिए वह दिन-रात पम्पिंग करा रहे हैं। वे 24-24 घंटों तक काम कर रहे हैं। पानी की दिक्कतें होने का कारण मेहमान बाहर से बहुत आते हैं शादी-ब्याह होती है, टूरिस्ट भी यहां आ रहे हैं तो ऐसे में पानी की खपत ज्यादा हो जाती है। कई बार ऐसे समय पर बिजली का खराब होना और पेड़ आदि का गिर जाना आदि के कारण भी कहीं-कहीं पानी गंतव्य तक नहीं पहुंच पाता है। बहुत जल्दी अव्यवस्थाएं दुरुस्त होनी और जनता को स्वच्छ पेयजल पहुंचने का हमारा संकल्प पूरा होगा।
रानीखेत-चिलियानौला नगर पालिका का मुद्दा वर्षों से चला आ रहा है। इस पर राजनीति भी बहुत हुई है। लोगों ने धरना-प्रदर्शन भी किए हैं लेकिन यह सपना पूरा नहीं हो सका है। क्या कारण हैं?
आप विश्वास नहीं करेंगे कि रानीखेत में जब मैं विधायक बनकर आया तो मैंने यहां के जिलाधिकारी जी से कहा कि यहां से नगर पालिका का प्रस्ताव भिजवाना है क्योंकि मेरी माननीय मुख्यमंत्री जी से बात हुई थी। केंद्र सरकार द्वारा एक साथ पूरे देश के कैंट को नगर पालिका में सम्मिलित करने का प्रयास किया जा रहा है। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि लोग कितने बड़े-बड़े दावे करते रहे लेकिन आज के दिन तक जो औपचारिक प्रस्ताव है वो माननीय अमित शाह के समक्ष जाना चाहिए। इस प्रस्ताव में यह देखा जाएगा कि जनसंख्या कितनी आएगी, कहां कितनी जमीन होगी, कितनी जमीन हमें छोड़नी पड़ेगी, कितनी सड़कें होंगी, ऐसी तमाम औपचारिकता पूर्ण की जाएगी। हमने पहली बार नक्शे के साथ जमीन, जनसंख्या आदि का डिमार्केशन करके पूरा प्रस्ताव बनाकर भेजा है। इसके लिए मैं आभार प्रकट करता हूं अपने हेम चौधरी जी का जिन्होंने बहुत पुराने दस्तावेज हमें उपलब्ध कराए। हम इस सम्बंध में दो-तीन बार माननीय सांसद जी के साथ मुख्यमंत्री जी से भी मिलने गए। उन्होंने हमें आश्वस्त किया है कि हमें बहुत जल्दी ही नगर पालिका मिलेगी और गुलामी के कानून से हम आजाद होंगे।
नगर पालिका की ही तरह रानीखेत को जिला बनाने का मुद्दा बहुत पुराना है?
भारतीय जनता पार्टी छोटी प्रशासनिक ईकाइयों के पक्ष में है। हम भी भाजपा के एक छोटे से कार्यकर्ता हैं। हमारा मानना है कि विकास की धारा तेजी से बहे इसलिए छोटे प्रदेश और छोटे जिले होने चाहिए। इसी तरह प्रशासनिक तहसील भी होनी चाहिए। क्योंकि हमारे जिले का मुद्दा बहुत ज्वलंत है। हम चाहते हैं कि रानीखेत जल्द ही जिला बने।
लेकिन उसके लिए पिछले दो सालों में आपने क्या प्रयास किए हैं?
इस मामले में हम कई बार माननीय मुख्यमंत्री जी से मिले हैं। क्षेत्र की जिले और नगर पालिका जैसी तमाम समस्याओं से उनको अवगत कराते हैं। हम तो अपनी बात को उनके समक्ष पहुंचा भर सकते हैं क्योंकि हम तो सरकार और जनता के बीच में एक डाकिया हैं। जनता की भावनाओं से हम सीएम साहब को परिचित कराते रहते हैं।
रानीखेत विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के कई गुट हैं। कहीं आपका तो कहीं अजय भट्ट का तो कहीं कैलाश पंत का गुट हावी है। कहीं न कहीं यह गुटबाजी पार्टी को डैमेज करने का काम करती दिखाई देती है?
हमारे यहां केवल एक ही गुट है भारतीय जनता पार्टी और कमल का फूल। इसके अलावा और कोई गुट नहीं है। हमें कहीं से कोई गुटबाजी नहीं दिखाई देती है बाकि ऐसा कुछ है तो गुटबाजी करने वालों को सद्बुद्धि आनी चाहिए।
पूर्व में यहां के विधायक और वर्तमान में नैनीताल के सांसद अजय भट्ट के समर्थक यह कहते सुने जाते हैं कि भट्ट की हार का कारण प्रमोद नैनवाल थे। भट्ट के समर्थक आपके विरोध में धरना- प्रदर्शन तक करते रहे हैं?
मेरी कोई व्यक्तिगत शिकायत है तो मैं पार्टी लेवल पर रखता हूं बाकी मेरा किसी से भी चाहे वो अजय भट्ट हों या कैलाश पंत कोई मतभेद नहीं हैं और न ही वैमनस्य है, न ही मेरा मन खराब है। मैं तो जनता जनार्दन को अपना सर्वोच्च मानता हूं उनके आशीर्वाद से ही मुझे यहां तक पहुंचने का अवसर मिला। मैं तो जमीन से कई फुट नीचे था। मेरे सपनों में भी कभी नहीं था कि मैं क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर पाऊंगा, क्षेत्र की जनता ने, परमात्मा ने मुझे मौका दिया है। मैं उस जनता का आभारी हूं। बाकी जो जैसा सोचता है भगवान उसको उसका वैसा फल देता है। किसी की मेरे प्रति कोई भावना है तो परमात्मा न्याय करेगा।
पिछले दिनों जब आपके भाई सतीष नैनवाल का एक प्रधान से विवाद हुआ तो आपके भाई और भांजे के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने थाने में भाजपा के ही एक दर्जाधारी नेता पहुंचे थे, इससे पार्टी कहीं न कहीं दो फाड़ नजर आई?
‘उनका जो काम है वो अहल-ए-सियासत जाने, मेरा पैगाम मोहब्बत है जहां तक पहुंचे’। बाकी अगर दो बच्चों का झगड़ा हो रहा है तो उन दोनों की तरफ से एक ही समय में तहरीर दी गई और सुसंगत धाराओं में मुकदमा भी दर्ज हो गया। यह बहुत बड़ा मुद्दा नहीं है। दो बच्चों का जब झगड़ा हो तो बड़ों को बीच बचाव करके मुद्दा सुलझाना चाहिए था। बड़े-बड़े बुद्धिजीवी लड़ जाते हैं, ये तो बच्चे थे। लेकिन मीडिया को भी चटपटा मसाला चाहिए था। हमारा कहीं से कहीं तक कोई वैमनस्य नहीं था।
इस घटना के बाद एक ऑडियो बहुत तेजी से वायरल हुई जिसमें आप 30 लाख रुपए का जिक्र करते हुए अपने आपको मंत्री बनाने की बात कर रहे थे, उसका सच क्या है?
आपने देखा होगा कि हमारे देश के बड़े से बड़े नेता की फेक आईडी और ऑडियो-वीडियो बनाकर वायरल किए जाते हैं। मेरी भी यह फेक ऑडियो था। कहीं से कहीं तक भी ये न मेरी आवाज है न कोई इसमें सच है। यह बिल्कुल फर्जी है। यह मुझे बदनाम करने की साजिश है। इस पर जो भी कार्यवाही होनी चाहिए उसके लिए पार्टी से मैं राय ले रहा हूं और इस फेक ऑडियो को बनाने वालों के खिलाफ कानूनी लड़ाई लडूंगा। राजनीति में ऐसा ही घिनौना काम आजकल होता है। रोज-रोज ये जिस तरह मेरे खिलाफ फर्जी मामले आ रहे हैं, ऑडियो-वीडियो जो भी फैलाए जा रहे हैं और जिस प्रकार से मेरे खिलाफ षड्यंत्र रचे जा रहे हैं उससे और भी ज्यादा मुझे जनता का आशीर्वाद मिल रहा है।
आप उन विधायकों में हैं जिनकी ज्यादातर ऑडियो-वीडियो वायरल होती रहती हैं। अभी पिछले दिनों एक वीडियो आपकी वायरल हुई जिसमें आप गाड़ी में बैठे थे और एक बुजुर्ग व्यक्ति आपसे कुछ मुद्दों पर बहस कर रहे थे, यह क्या मामला है?
हमारे एक गांव की प्रधान थीं। वह स्वर्गवासी हो गई थीं। मैं वहां जा रहा था तभी कोई नशे में धुुत व्यक्ति मेरी गाड़ी के सामने आ गए। वहां पर वह व्यक्ति जो मेरे सामने चुनाव लड़ा था वह भी बैठा था। मेरी और उन बुजुर्ग की सिर्फ बातचीत चल रही थी। वह कह रहे थे कि आपने विकास नहीं किया। मैंने हाथ जोड़कर कहा भी था कि आपकी जो भी समस्याएं हैं मैं उनका समाधान करूंगा। वह जरा सी वीडियो थी, दो-तीन मिनट की फिर मैं चला गया। लेकिन वह वीडियो इस प्रकार से प्रचारित-प्रसारित किया गया कि न जाने कितना बड़ा मुद्दा है। उन बुजुर्ग की पत्नी का मुझे फोन आया था, खुद उनके परिवार के बच्चे आए थे कि भाई साहब विपक्षी लोगों ने ऐसा वीडियो बनाकर वायरल किया। उसके खिलाफ मैं पुलिस में जल्द ही शिकायत करने जा रहा हूं।
उद्यान घोटाले में आपका और आपके भाई का नाम आया तो सनसनी मच गई। न्यायालय ने सीबीआई को जांच के आदेश दिए यह मामला पूरे प्रदेश भर में छाया रहा। आखिर क्या मामला है यह?
उद्यान में क्या हुआ किसी को कुछ नहीं पता। नैनीताल जिले में भतरौंजखान में मेरी पैतृक जमीन है। उसमें गांव वालों ने आवेदन किया। 577 लोगों ने एक समिति बना रखी है जिसका नाम है ‘किसान प्रगतिशील समिति। उन्होंने आवेदन किया कि खेतों में पेड़ लगाने हैं। उसमें दो-तीन स्कीमें थी, एक ‘एकीकृत ग्रामीण योजना’ जिसमें 50 प्रतिशत किसान को और 50 प्रतिशत सरकार को देना होता है। यह पेड़ नर्सरी वालों को मिलते हैं। दो साल बाद नर्सरी वालों ने पेड़ जिंदा रहने पर किसानों को दिए। इसमें पेड़ जमीन के हिसाब से मिलते हैं। किसी किसान को 500 पेड़ मिले, किसी को हजार पेड़ मिले। यहां तक कि किसानों को 5-5 हजार पेड़ भी मिले हैं। हमारी जमीन को 2400 पेड़ मिले। उन पेड़ों में न कोई अकाउंट में पैसा आए और न ही कोई एक रुपए का लेन-देन हुआ है। आज भी लगभग सभी पौधे सुरक्षित हैं। उसमें ऐसा बतंगड़ बना दिया गया। लेकिन कोर्ट ने इस मामले में एक भी शब्द ये नहीं कहा है कि कहीं पर भी हमारा नाम है। 11 लोगों को पार्टी बनाया गया है। उन 11 लोगों में मेरे छोटे भाई का भी नाम है। जबकि उसमें मेरा कहीं कोई मतलब नहीं है। मुझे आज तक तरस आता है कि किस तरह मीडिया ने मेरी छवि पर सवाल उठाए हैं। मैंने उनको मानहानि के नोटिस भी भेजे हैं। कोर्ट में जब बहस चल रही थी तो जो विपक्ष के वकील थे उन्होंने सिर्फ एक बात कही कि ‘सतीश नैनवाल ने 2400 पेड़ लगाए हैं जो कि विधायक प्रमोद नैनवाल का भाई है।’ विपक्ष ने सिर्फ उस पन्ने को निकाला जिसमें मेरा जिक्र था और मीडिया को दे दिया। मैंने ‘दि संडे पोस्ट’ की भी न्यूज पढ़ी है। आप शायद नहीं जानते है कि मीडिया का एक शब्द लोगों की जिंदगियां बर्बाद कर सकता है। मीडिया को कम से कम अन्य पन्नों को तो पढ़ना चाहिए था। कोर्ट में हम कहीं पार्टी नहीं हैं। मैं भी 15-20 साल तक पत्रकारिता से जुड़ा रहा हूं। हमने भी बहुत संवेदनशील पत्रकारिता की है। मीडिया को सिर्फ एक पक्ष की ही जानकारी नहीं लिखनी चाहिए, बल्कि जो दूसरा पक्ष है उसको भी जानना चाहिए। उसको भी पूछकर उसका भी वर्जन लिखना चाहिए, बल्कि धरातल पर जाकर वस्तुस्थिति से अवगत होकर सच्चाई लिखनी चाहिए। जब आप मौके पर पहुंचेंगे तो पाएंगे कि सत्यता कुछ और ही होती है। इस प्रकरण में हम कहीं से कहीं तक भी न तो दोषी हैं और न ही इसमें हमारी कोई भूमिका है। यह सिर्फ मेरे राजनीतिक विरोधियों का षड्यंत्र है।
आप पर एक महिला ने आरोप लगाया है कि आपने उनकी पैतृक जमीन को कब्जा कर उस पर सेब के पेड़ लगा दिए हैं जहां आपके द्वारा तार-बाड़ कर दी गई है। महिला का आरोप है कि अपनी जमीन पर उन्हें नहीं जाने दिया जा रहा है?
यह सब मेरे खिलाफ राजनीतिक षड्यंत्र किया जा रहा है। पहले पीडब्ल्यूडी की जमीन पर कब्जा बताया गया। इसके बाद वन पंचायत और फिर वन विभाग की जमीन पर कब्जे की झूठी खबर फैलाई गई। इस मामले में मैंने सभी विभागों से आरटीआई में जवाब मांगे हैं जिससे सभी विभागों ने स्पष्ट कर दिया है कि हमारे द्वारा उनकी कोई जमीन नहीं कब्जाई गई है। इसके बाद मेरे कुछ राजनीतिक विरोधी एक अंजान महिला को गाड़ी में बैठाकर देहरादून ले गए और मीडिया में मेरे खिलाफ अनाप-शनाप खबरें लिखवा दी। जो महिला जमीन कब्जाने का आरोप लगा रही है वह जिस गांव की बता रही है वह वहां नहीं रहती है। मेरे द्वारा उसकी जमीन पर अगर कब्जा किया गया होता तो वह 10-12 साल में कभी तो यह कहती कि मैंने या मेरे परिवार ने उसकी जमीन पर कब्जा किया। लेकिन न कब्जा हुआ और न ही उसने कुछ कहा। उसके माट्टयम से मेरे खिलाफ षड्यंत्र कराए जा रहे हैं। मुझे बदनाम किए जाने के लिए यह दावा किया जा रहा है। यह जमीन मेरे पिताजी ने 2010 में खरीदी थी। जिस पर हमने पेड़ भी लगाए हैं। इसके हमारे पास सभी साक्ष्य हैं। फिलहाल मैं खबर निकालने वाले पत्रकारों और आरोप लगाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर रहा हूं।
रानीखेत में बहुत दिनों से पॉलिटेक्निक कॉलेज की मांग की जा रही है इस संबंध में आपने क्या किया है?
मेरे विधानसभा क्षेत्र में एक पॉलिटेक्निक कॉलेज चौनलिया में चल रहा है। जिसमें इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रीकल तथा मैकेनिकल के ट्रेड चल रहे हैं। मेरी भास्कर खुल्बे जी से बात हुई है कि टेक्नोलॉजी के जरिए कैसे हम डिप्लोमा कराकर बच्चों को अपने पैरों पर खड़ा कर सकते हैं। इस पर उनका काफी मार्ग दर्शन मिला है, उनका आशीर्वाद हमें मिला तो हम इस मामले में भी सार्थक कर पाएंगे और पलायन पर रोकथाम लगा
सकेंगे।
हाईकोर्ट के ऋषिकेश में शिफ्ट होने या गौलापार में ही स्थापित होने का मुद्दा कुमाऊं-गढ़वाल में दरार बढ़ाता दिख रहा है?
न्यायपालिका, कार्यपालिका, विधायिका संविट्टाान के महत्वपूर्ण स्तम्भ हैं। इन स्तम्भों को एक-दूसरे की सीमाओं का सम्मान करना चाहिए। कार्यपालिका ने जो पहले ही तय कर रखा है। न्यायपालिका को उसका सम्मान करना चाहिए।
कहा जा रहा है कि 2027 में विधानसभा की सीटों का परिसीमन होगा। जिसमें कयास लगाए जा रहे हैं कि पहाड़ की सीटें फिर से कम होंगी और मैदान में बढ़ेंगी, तो क्या एक बार फिर पहाड़ों से पलायन का असर दिखेगा?
जब से प्रदेश के सीएम पुष्कर सिंह धामी बने हैं तब से उन्होंने धरातल पर बहुत काम किया है। हमारी होम स्टे योजना है। यहां पर ज्यादा से ज्यादा पर्यटक कैसे आए इस पर बहुत महत्वपूर्ण योजनाएं बनाई जा रही हैं। यहां होटल व रेस्टोरेंट आदि पर 50 प्रतिशत की सब्सिडी दी जा रही है। टूरिस्ट को बढ़ावा देने के लिए सड़कों का चौड़ीकरण और सुधारीकरण किया जा रहा है। पलायन पर रोक लगाने के लिए खेती को लेकर सुधार किए जा रहे हैं। मेरी विधानसभा क्षेत्र में पहली बार बड़े स्तर पर खेतों की तार-बाड़ की गई है जिससे कि जंगली जानवरों से खेती की रक्षा कर उत्पाद बढ़ाया जा सके। हमारी खेती में व्यवसायिक फसलें होंगी तो लोगों को रोजगार मिलेगा और पलायन रूकेगा। इस बीच पलायन की दर भी कम हुई है।
प्रदेश के दो जिले पौड़ी और अल्मोड़ा में ही ज्यादातर पलायन क्यों हुआ है?
पलायन के कारण शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार हैं। आज तक इस ओर काम नहीं हुए। जनता की नब्ज को हम लोग पहचान नहीं पाए। इस पर हमारी सरकार गम्भीरता से काम कर रही है। अस्पतालों में ही देखें तो लगभग सभी अस्पतालों में डॉक्टर आ चुके हैं। हमारे रानीखेत में ही 30 से ज्यादा डॉक्टर आ चुके हैं। ऐेसे ही भिकियासैंण, भतरौंजखान, सिलौर सहित सारे अस्पतालों में डॉक्टर पूरे हैं। शिक्षा का भी सुधार यहां पर काफी हुआ है। निश्चित तौर पर पलायन कम होगा।
प्रदेश की सभी सरकारें दावा करती रही हैं कि खेती को बंजजर होने से बचाया जाएगा लेकिन बावजूद इसके खेती-बाड़ी में विस्तार क्यों नहीं हो पा रहा है?
मैंने अपनी विधानसभा क्षेत्र के 15 गांवों को हर साल तार-बाड़ से सुरक्षित करने का लक्ष्य रखा है। मैं कभी आपको अपने गांव ले जाऊंगा वहां देखना कि तार-बाड़ वाले किसान कितने खुश हैं। जंगली जानवरों ने उनके खेतों में आना छोड़ दिया है। हमारे पूरे उत्तराखण्ड में तार-बाड़ किए जाने चाहिए जिससे चारों तरफ हरियाली आ सके। मैंने कृषि पर रथ यात्रा निकालने के मुद्दे भी कृषि विभाग से कहा था कि जब कृषि ही नहीं रहेगी तो रथ यात्रा निकालकर क्या फायदा होगा? मेरी विट्टाानसभा क्षेत्र के 85 गांव जलागम से आच्छादित हो चुके हैं जिनमें 10 से लेकर 50-50 लाख तक के काम हुए हैं। लेकिन उसमें तार-बाड़ का जिक्र ही नहीं था। मैं माननीय मुख्यमंत्री और माननीय कृषि मंत्री से मिला, डीएम से मिला और सचिव आनंदवर्धन से भी मिला। इसके बाद पहली बार जो 5 प्रतिशत अन्य काम का बजट था उसे 15 प्रतिशत किया गया और तार-बाड़ लगाई गई।
एक समय था जब डॉ. प्रमोद नैनवाल नशे के खिलाफ जागरूकता के लिए जाने जाते थे। नशे पर प्रतिबंध लगाने के लिए आपके द्वारा सभाएं और धरना-प्रदर्शन तक किए गए। लेकिन अब न तो आप और न ही कोई अन्य जनप्रतिनिधि नशे के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं। वह भी तब जब नशा उत्तराखण्ड के लिए एक बड़ी सामाजिक बुराई बन गया है?
उत्तराखण्ड के युवाओं को अगर कोई खोखला कर रहा है तो वो नशा है। पलायन का एक कारण भी नशा ही है। मैं माननीय मुख्यमंत्री जी से इस सम्बंध में कई बार मिला हूं। नशा केवल शराब का ही नहीं स्मैक, चरस, अफीम, गांजा, भांग सभी का हो रहा है। यह बहुत चिंताजनक स्थिति है। इस पर प्रभावी रोक लगनी बहुत जरूरी है। हमारे मुख्यमंत्री लगातार नशे के खिलाफ लड़ रहे हैं, सीएम साहब ने ‘नशा मुक्त प्रदेश’ बनाने का संकल्प लिया है। 2025 तक प्रदेश को नशा मुक्त करने में हमारी सरकार को जरूर सफलता मिलेगी।
रानीखेत विधानसभा क्षेत्र के लिए आपका क्या विजन है?
मेरा पहला विजन रानीखेत के हॉस्पिटल को आदर्श हॉस्पिटल के रूप में पहचान दिलाने का है। हमारे हॉस्पिटल में सीटी स्कैन सहित कई ऐसी चिकित्सीय जांच नहीं थी जिनके लिए हमें दिल्ली जैसे महानगर को कूच करना पड़ता था। माननीय मुख्यमंत्री जी ने हमारी मांगें मान ली हैं। दूसरा है रानीखेत में स्टेडियम बनाने का संकल्प। इसे मैंने मुख्यमंत्री को भेजी, 10 मुख्य मागों में भी शामिल किया है। हमारे बमस्यू और चिलियानौला का आईटीआई लगभग बंद हो चुका है इनको सुचारू करने का मेरा लक्ष्य है। भिकियासैंण के हॉस्पिटल का उच्चीकरण कराना भी बहुत जरूरी कार्य है। भतरौंजखान के हॉस्पिटल की 50 साल पहले स्थापना हुई थी आज उसकी हालत दयनीय है, उसका भी उच्चीकरण कराना है। ड्रग फैक्ट्री का भी कायाकल्प कराना है। चौबटिया में उद्यानिक कॉलेज भी खुलना जरूरी है जिससे कि हमारे बच्चों को उद्यानीकरण की शिक्षा मिलने का मौका मिले। इसके अतिरिक्त हमारे पेयजल के साथ ही सड़कों का सुदृढ़ीकरण भी होना है। रामनगर से लेकर रानीखेत और भुजान वाली सड़क तथा
भतरौंजखान से ब्रदीनाथ का जो पुराना सड़क मार्ग है, आज उस पर न केवल बस चलती और बहुत से यात्री उसमें जाते हैं। यह सड़क डबल लेन बननी चाहिए जिससे यात्रियों को सुविधा हो। सिलोर में एक नर्सिंग कॉलेज खोलने का भी मेरा सपना है। इसके अलावा रानीखेत से सोनी रोड के बीच में एक चिड़ियाघर भी खुलवाने की मेरी मंशा है। जहां होटल और रेस्टोरेंट भी खुलेंगे तो लोगों को रोजगार मिलेगा।
मेरी कोई व्यक्तिगत शिकायत है तो मैं पार्टी लेवल पर रखता हूं, बाकी मेरा किसी से भी चाहे, वो अजय भट्ट हों या कैलाश पंत कोई मतभेद नहीं है और न ही वैमनस्य है, न ही मेरा मन खराब है। मैं तो जनता जनार्दन को अपना सर्वोच्च मानता हूं उनके आशीर्वाद से ही मुझे यहां तक पहुंचने का अवसर मिला। मैं तो जमीन से कई फुट नीचे था। मेरे सपनों में भी कभी नहीं था कि मैं क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर पाऊंगा, क्षेत्र की जनता ने, परमात्मा ने मुझे मौका दिया है। मैं उस जनता का आभारी हूं। बाकी जो जैसा सोचता है भगवान उसको उसका वैसा फल देता है। किसी की मेरे प्रति कोई भावना है तो परमात्मा न्याय करेगा। ‘उनका जो काम है वो अहल-ए-सियासत जाने, मेरा पैगाम मोहब्बत है जहां तक पहुंचे’
प्रमोद नैनवाल का राजनीतिक सफर
जीवन परिचय: जन्म- 18 मई 1971 भतरौंजखान, रानीखेत।
शिक्षा: स्नातक (अर्थशास्त्र)
जनप्रतिनिधि के रूप में: 2022 में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीत कर विधायक निर्वाचित हुए। वर्तमान में उत्तराखण्ड विधानसभा के सदस्य हैं। इससे पूर्व वे 80 के दशक से आरएसएस के सक्रिय कार्यकर्ता रहे। भाजयुमो के जिला व प्रदेश उपाध्यक्ष रहे। भाजपा संगठन में कई पदों पर रह चुके हैं। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में पहली बार तत्कालीन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट की दावेदारी के बावजूद खुद भी टिकट की दौड में शामिल हुए। टिकट न मिलने पर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे और ठीकठाक वोट लेकर भाजपा उम्मीदवार अजय भट्ट की हार का कारण बने। हालांकि डा.प्रमोद नैनवाल खुद को कट्टर भाजपाई मानते रहे और उन्होंने पार्टी के बड़े धडे के विरोध के बावजूद भाजपा से नाता नहीं तोड़ा। संघ निष्ठा के लिए पार्टी हाईकमान ने संघ की सर्वे रिपोर्ट पर विगत विधानसभा चुनाव में टिकट थमा चुनाव मैदान में उतारा।
सम्प्रतिः मूलत: भाजपा और संघ के सक्रिय कार्यकर्ता।
विजन: द पहला विजन रानीखेत के हॉस्पिटल को आदर्श हॉस्पिटल के रूप में पहचान दिलाना और हॉस्पिटल में सीटी स्कैन सहित कई ऐसी चिकित्सीय जांच की सुविधा उपलब्ध कराना तथा भिकियासैंण और भतरौंजखान हॉस्पिटल का उच्चीकरण, ड्रग फैक्ट्री का कायाकल्प कराना है। द दूसरा रानीखेत में स्टेडियम बनाने का संकल्प और बमस्यू तथा चिलियानौला में बंद हो चुके आईटीआई को सुचारू करने का लक्ष्य।
द तीसरा चौबटिया में उद्यानिक कॉलेज खुलवाना जिससे कि स्थानीय बच्चों को उद्यानीकरण की शिक्षा मिल सके। द चौथा पेयजल, सड़कों का सुदृढ़ीकरण कराना, रामनगर से लेकर रानीखेत और भुजान वाली सड़क तथा भतरौंजखान से ब्रदीनाथ का सड़क डबल लेन करवाना जिससे यात्रियों को सुविधा हो द पांचवा सिलोर में एक नर्सिंग कॉलेज की स्थापना करना है। द छठा है रानीखेत से सोनी रोड के बीच में एक चिड़ियाघर खुलवाना जहां होटल और रेस्टोरेंट भी खुलें जिससे लोगों को रोजगार मिलेगा।
मुझे आज तक तरस आता है कि किस तरह मीडिया ने मेरी छवि पर सवाल उठाए हैं। मैंने उनको मानहानि के नोटिस भी भेजे हैं। मैंने ‘दि संडे पोस्ट’ की भी न्यूज पढ़ी है। आप शायद नहीं जानते हैं कि मीडिया का एक शब्द लोगों की जिंदगियां बर्बाद कर सकता है। मीडिया को कम से कम अन्य पन्नों को तो पढ़ना चाहिए था। कोर्ट में हम कहीं पार्टी नहीं हैं। मैं भी 15-20 साल तक पत्रकारिता से जुड़ा रहा हूं। हमने भी बहुत संवेदनशील पत्रकारिता की है। मीडिया को सिर्फ एक पक्ष की ही जानकारी नहीं लिखनी चाहिए, बल्कि जो दूसरा पक्ष है उसको भी जानना चाहिए। उसको भी पूछकर उसका भी वर्जन लिखना चाहिए, बल्कि धरातल पर जाकर वस्तुस्थिति से अवगत होकर सच्चाई लिखनी चाहिए। जब आप मौके पर पहुंचेंगे तो पाएंगे कि सत्यता कुछ और ही होती है। इस प्रकरण में हम कहीं से कहीं तक भी न तो दोषी हैं और न ही इसमें हमारी कोई भूमिका है। यह सिर्फ मेरे राजनीतिक विरोधियों का षड्यंत्र है
उत्तराखण्ड के युवाओं को अगर कोई खोखला कर रहा है तो वो नशा है। पलायन का एक कारण भी नशा ही है। मैं माननीय मुख्यमंत्री जी से इस सम्बंध में कई बार मिला हूं। नशा केवल शराब का ही नहीं स्मैक, चरस, अफीम, गांजा, भांग सभी का हो रहा है। यह बहुत चिंताजनक स्थिति है। इस पर प्रभावी रोक लगनी बहुत जरूरी है। हमारे मुख्यमंत्री लगातार नशे के खिलाफ लड़ रहे हैं, सीएम साहब ने ‘नशा मुक्त प्रदेश’ बनाने का संकल्प लिया है। 2025 तक प्रदेश को नशा मुक्त करने में हमारी सरकार को जरूर सफलता मिलेगी

