अमित शाह ने कहा अल्पसंख्यकों में डर फैला रहा है विपक्ष, सिब्बल बोले कोई नहीं कहता CAA से नागरिकता जाएगी
नई दिल्ली। असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (एनआरसी) का दूसरा ड्राफ्ट जारी होने के बाद देश की राजनीति गरमा गई है। सदन में इस मुद्दे पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के भाषण के दौरान जमकर हंगामा हुआ तो उन्होंने भी पलटवार कर दिया कि क्या विपक्ष के लोग देश में अवैध रूप से घुसपैठ कर रह रहे बांग्लादेशियों के पक्ष में हैं। सत्ताधारी भाजपा राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल उठाते हुए बांग्लादेशियों के खिलाफ मुखर है, तो विपक्ष इसके विरोध में एकजुट है। विपक्ष की एकजुटता के बीच भाजपा नेताओं ने अब असम की तर्ज पर देश के दूसरे राज्यों में भी एनआरसी की मांग शुरू कर दी है। बीजेपी नेताओं ने पश्चिम बंगाल, बिहार, दिल्ली और यूपी में एनआरसी बनाने की मांग की है।
पश्चिम बंगाल में प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष दिलीप घोष और प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय, दिल्ली में प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी, बिहार में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और उत्तर प्रदेश में नरेश अग्रवाल ने एनआरसी लागू करने की मांग की है।मामले में राजनीति  तेज होने के बीच हैदराबाद के भाजपा विधायक राजा सिंह ने तो यहां तक कह दिया कि जो अवैध बांग्लादेशी अपने देश वापस नहीं लौट रहे हैं, उन्हें गोली मार देनी चाहिए।
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने एनआरसी की तर्ज पर मुंबई में अवैध तरीके से रह रहे बांग्लादेशियों का सर्वेक्षण कराने की मांग की है। पार्टी के नेता बाला नंदगांवकर ने मुंबई में एक बयान जारी कर कहा, ‘‘अब यह सिद्ध हो चुका है कि 40 लाख से अधिक लोग (असम में) अवैध घुसपैठिए हैं। (मनसे प्रमुख) राज ठाकरे वर्षों से इस मुद्दे पर बात कर रहे हैं।
विपक्षी खेमे की ओर से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एनआरसी ड्राफ्ट के खिलाफ सबसे ज्यादा आवाज बुलंद कर रहीं हैं। ममता बनर्जी ने कहा कि वे बीजेपी के मंसूबों को कामयाब नहीं होने देंगी। दिल्ली में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, हम पश्चिम बंगाल में ऐसा नहीं होने देंगे क्योंकि हम वहां हैं।’ममता ने कहा कि केवल चुनाव जीतने के लिए लोगों को पीड़ित नहीं किया जा सकता है।
असम के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता तरुण गोगोई ने कहा कि नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स ( एनआरसी) वास्तव में कांग्रेस लेकर आई थी, लेकिन इसकी जो नवीनतम सूची आई, वह खामियों से भरी है। इसकी वजह से 40 लाख लोगों का भविष्य अनिश्चित हो गया है।

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