दुनिया के सबसे शांत और सभ्य देशों में एक न्यूजीलैंड को यूं तो महिलाओं के लिए एक आदर्श देश माना जात है, यहां अबाॅर्शन यानी गर्भपात कराना आज भी आपराधिक कøत्य यानी ऐसा अपराध है जिसकी सजा दो सौ डाॅलर का आर्थिक दंड गर्भपात कराने वाली महिला को देना पड़ता है। साथ ही ऐसा करने वाले डाॅक्टर या गर्भपात की गोलियां बेचने वाले को चैदह बरस की कैद हो सकती है। जाहिर है महिला अधिकारों की दृष्टि से यह जायज नहीं कहा जा सकता। 1840 में न्यूजीलैंड ब्रिटेन की काॅलोनी बन गया था। वहां तभी से गर्भपात कराने को अपराध करार दे दिया गया। 1930 में ब्रिटेन की गुलामी से आजाद होने के बाद भी यह कानून बदला नहीं। इस कानू के चलते न्यूजीलैंड में गर्भवती महिला को तीन डाॅक्टरों से यह प्रमाण पत्र लेना जरूरी होता है कि यदि गर्भपात नहीं कराया गया तो महिला को जान का अथवा मेंटल हेल्थ प्राॅब्लम का खतरा हो सकता है। इन तीन डाॅक्टरों में से दो सरकार द्वारा नियुक्त स्पेशल डाॅक्टर होते हैं। समस्या यह है कि ये डाॅक्टर ऐसा प्रमाण पत्र आसानी से जारी नहीं करते। साथ ही महिलाओं को मानसिक उत्पीड़न से भी गुजरना पड़ता है। सामाजिक दृष्टि से भी उनको एक प्रगतिशील राष्ट्र का नागरिक होते हुए भी लज्जित होना पड़ता है। हालांकि 1960 के दशक से ही महिलाओं ने ‘अपने शरीर पर अपना अधिकार’ की मांग बुलंद करनी शुरू कर दी थी। 1974 में देश में पहला सरकारी गर्भपात क्लिनिक खोला। इसके बाद 1977 में सरकार ने कुछ और रियायत इस बाबत दी लेकिन इनका विरोध भी वहां के कुछ संगठनों ने यह कहते हुए करना शुरू कर दिया कि ऐसा करना उन बच्चों के जीवन अधिकार का हनन् है जो पैदा नहीं हुए यानी मां के गर्भ में ही हैं। इसके बाद वहां की सरकारें और राजनेता बैकफुट में चले गए और गर्भवती महिलाओं का संकट जारी रहा।

महिला संगठनों का कहना है कि गर्भपात कराने के लिए गर्भवती महिला को झूठ का सहारा लेना पड़ता है। उसे यह साबित करना पड़ता है कि यदि उसको अबाॅर्शन कराने की इजाजत नहीं मिली तो वह मानसिक रोगी हो जाएगी। 2017 में जारी सरकारी आंकड़ों से भी यह साबित होता है। 2017 में जिन महिलाओं को गर्भपात की इजाजत मिली उनमें से 97 प्रतिशत ने मेंटल हेल्थ के नाम पर गर्भपात कराया। अब लेकिन न्यूजीलैंड इस कानून को बदलने जा रहा है। देश की प्रधानमंत्री जेकिडा आर्डन ने इस मुद्दे पर पहल करते हुए गर्भपात को कानूनी अपराध की श्रेणी से बाहर रखने का फैसला लिया है। 15 अगस्त के दिन देश की संसद में इस बाबत एक विधेयक सरकार ने रखा है जिसके संसद से स्वीकøत होने क बाद गर्भपात कराने के लिए सरकार से नियुक्त किए जाने वाले दो डाॅक्टरों की व्यवस्था समाप्त हो जाएंगी, साथ ही गर्भपात कराना कानूनी अपराध नहीं रहेगा।

