करीब 15 दिन और नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश के बाद सानन्द का पार्थिव शरीर मातृसदन में दर्शन के लिए रखने का रास्ता साफ हो गया है। एम्स ऋषिकेश को शरीर दान करने का कारण बताते हुए, हॉस्पिटल प्रशासन ने उनकी शरीर को देने से मना कर दिया था। एम्स ऋषिकेश प्रशासन के इस पैसले का विरोध मातृसदन सहित सानन्द के करीबी लोगों ने किया। उनकी पार्थिव शरीर को दर्शनार्थ लेने के लिए उनके करीबी लोगों को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
दरअसल जीडी अग्रवाल उर्फ सानन्द का 11 अक्टूबर को एम्स ऋषिकेश में निधन हुआ था। वे 112 दिनों से गंगा को अविरल बनने सहित कई अन्य मांगों पर अनशन पर बैठे थे। 10 अक्टूबर को हरिद्वार जिला प्रशासन ने जबरन उन्हें अनशन से उठाकर एम्स में भर्ती करा दिया था। मातृसदन के संत ब्रह्मचारी दयानंद सरस्वती का कहते हैं, ‘जब प्रशासन उन्हें आश्रम से उठा कर ले गई, तब वे स्वस्थ थे। कुछ घंटों में ही आखिर क्या हुआ की उनका निधन हो गया। मातृसदन उनके निधन को हत्या बताते हैं। जिसकी साजिश एम्स ऋषिकेश में रची गई।’
उनके मुताबिक इसी साजिश के कारण उनके डेड बॉडी को देखने तक नहीं दिया गया। जबकि हिन्दू रीति रिवाज के मुताबिक उनकी शरीर का पूजन आदि करने या उनके शरीर का अंतिम दर्शन करने के लिए रखा जाता है। प्रशासन ने इससे भी उनके चाहने वालों को वंचित रखा। जबकि मातृसदन के संस्थापक स्वामी शिवानंद सरस्वती का कहना है कि हम सानन्द के शरीर को दर्शन के बाद एम्स को शुपुर्द कर देते। फिर भी हॉस्पिटल ने हमें उनका पार्थिव शरीर नहीं दिया। आखिरकार हमें कोर्ट के शरण में जाना पड़ा।
नैनीताल हाईकोर्ट ने दशहरा की छुट्टी के बाद इस मामले पर सुनवाई करते हुए प्रशासन को खूब खरी-खोटी सुनाई। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि 8 घंटे के अंदर सानन्द की पार्थिव शरीर को मातृसदन में पहुंचाएं और 76 घंटे तक लोगों के दर्शन के लिए वहां रखा जाए। हाईकोर्ट के आदेश के बाद सानन्द का पार्थिव शरीर को मातृसदन में लाया जा रहा है। खबर के मुताबिक 27 अक्टूबर से आम लोग सानन्द के पार्थिव शरीर का दर्शन कर पाएंगे।

