ऐतिहासिक और प्रशासनिक रूप से पौड़ी का विशेष महत्व रहा है। इसी ऐतिहासिकता की दृष्टि से पौड़ी को गढ़वाल मंडल का मंडल मुख्यालय बनाया गया। समय के साथ पौड़ी से धीरे-धीरे मंडल स्तरीय कार्यालयों का देहरादून या अन्यत्र स्थानों से संचालित होने की परम्परा शुरू हुई, जिससे पौड़ी मंडल मुख्यालय का महत्व कम होने लगा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा पौड़ी की इस पीड़ा को महसूस किया गया। गत वर्ष जुलाई में पौड़ी का भ्रमण खत्म होने के तत्काल बाद ही मुख्यमंत्री धामी ने इस बाबत आदेश जारी किए और कहा कि मंडलीय अधिकारियों को देहरादून से नहीं, बल्कि पौड़ी से ही कार्य संचालित करने होंगे। सीएम धामी ने इन आदेशों के जरिए पौड़ी के विकास की कार्य योजना के साथ-साथ पौड़ी की ऐतिहासिकता और गौरव को पुनः स्थापित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया लेकिन उनके आदेशों का पालन पूरी तरह नहीं हो पा रहा है

उत्तर प्रदेश शासन काल में गढ़वाल मंडल मुख्यालय पौड़ी का अपना ही रुतबा हुआ करता था लेकिन उत्तराखण्ड राज्य बनने पर देहरादून का मोह पौड़ी पर भारी पड़ने लगा जिसके कारण मंडलीय मुख्यालय होने के बाद भी कई महत्वपूर्ण कार्यालय पौड़ी से स्थानांतरित होकर देहरादून में कैम्प स्थापित हो गए। कई अधिकारी पौड़ी कार्यालय में न बैठकर देहरादून से ही कार्य संचालन करते हुए नजर आ रहे हैं। खुद गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पाण्डेय इस मामले में सबसे आगे दिखाई दिए। उन्होंने पौड़ी में आने के बजाय 3 जुलाई 2023 को अपने कैम्प कार्यालय देहरादून से ही चार्ज ले लिया था। उनके बाद कमिश्नर मात्र दो या तीन बार ही अपने पौड़ी कार्यालय में पहुंचे हैं। यहां तक कि 26 जनवरी को विभागाध्यक्ष पौड़ी स्थित अपने कार्यालय में ध्वजारोहण करते हैं पर ये पहली बार हुआ कि विनय शंकर पांण्डेय ने अपने देहरादून स्थित कैम्प कार्यालय में ही ध्वजारोहण कर इतिश्री कर दी।

गौरतलब है कि पिछले साल फरवरी 23 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने दो दिवसीय दौरे पर पौड़ी पहुंचे थे। यहां उन्होंने रात्रि विश्राम किया था और मंडलीय अधिकारियों को पौड़ी से ही कार्य संचालन के आदेश दिए थे। तब दावा किया गया था कि मंडलीय कार्यालयों से होने वाले कार्य पौड़ी से ही संचालित होंगे। इससे लोगों को देहरादून जाकर कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। लेकिन इस पर अमल नहीं हो सका। लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आदेश को मंडलीय अधिकारियों द्वारा अमलीजामा पहनाने में दिलचस्पी दिखाई गई होती तो पौड़ी शहर की खोई हुई रौनक लौटती हुई नजर आ जाती। फिलहाल मंडलीय अधिकारियों को कोई फर्क नही पड़ा वे अभी भी देहरादून में अपने कैंप कार्यालय में ही जमे हुए हैं। हालांकि कुछ मंडलीय कार्यालय पौड़ी से संचालित हो रहे हैं, लेकिन कई कार्यालयों की स्थिति अभी तक स्पष्ट नहीं है। तत्कालीन आयुक्त गढ़वाल सुशील कुमार ने संबंधित विभागों के सचिवों को पत्र भेजकर ऐसे मंडलीय कार्यालयों की स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया था। लेकिन इस पर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई।

रामनगर गया विद्यालयी शिक्षा का मुख्यालय
उत्तराखण्ड राज्य बनने से पहले शिक्षकों का क्षेत्रीय कार्यालय पौड़ी में ही हुआ करता था। लेकिन पृथक राज्य बनने के बाद राज्य मुख्यालय में तब्दील कर इसे नैनीताल जिले के मैदानी क्षेत्र रामनगर में शिफ्ट कर दिया गया। फिलहाल यह कार्यालय उत्तराखण्ड विद्यालयी शिक्षा परिषद् के नाम से रामनगर में स्थित है।

सहायक निदेशक खेल का कार्यालय देहरादून हुआ शिफ्ट

पौड़ी में 2015 से पूर्व खेल विभाग का मंडलीय कार्यालय हुआ करता था। तब यहीं से गढ़वाल मंडल के सभी जनपदों में खेल से जुड़ी गतिविधियों को आयोजित करने के दिशा-निर्देश जारी होते थे। बाद में यहां से सहायक निदेशक का कार्यालय देहरादून शिफ्ट कर दिया गया। तब से यह कार्यालय देहरादून से ही संचालित हो रहा है।

पौड़ी में ये हैं मंडलीय कार्यालय

वर्तमान में आयुक्त गढ़वाल मंडल, अपर आयुक्त ग्राम्य विकास, मुख्य वन संरक्षक, महाप्रबंधक जल संस्थान, पुलिस उप महानिरीक्षक, अपर निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा, अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा, मुख्य अभियंता लोनिवि, मुख्य अभियंता पेयजल निगम, अपर निदेशक पशुपालन, संयुक्त निदेशक उद्यान, संयुक्त निदेशक अर्थ एवं संख्याधिकारी, अपर निदेशक चिकित्सा, उप निबंधक गढ़वाल बहुउद्देश्यीय सहकारी समिति के कार्यालय पौड़ी में स्थित हैं। उक्त सभी कार्यालयों के मंडलीय अधिकारियों को पौड़ी से राजकीय कार्य संचालन करने के निर्देश दिए गए। इतना ही नहीं जिन मंडलीय अधिकारियों के पास अन्य प्रभार भी हैं उन्हें रोस्टर के आधार पर मण्डल मुख्यालय पौड़ी में भी बैठने के आदेश दिए गए हैं लेकिन इसका पूरी तरह पालन होता नहीं दिख रहा है।

चार कार्यालय हो चुके हैं शिफ्ट
1. सहायक निदेशक खेल।
2. उप निदेशक समाज कल्याण पौड़ी।
3. मुख्य अभियंता ग्रामीण निर्माण विभाग पौड़ी।
4. पुलिस अधीक्षक (क्षेत्रीय) अभिसूचना पौड़ी।
इन कार्यालयों में नियमित नहीं बैठते अधिकारी
5. आयुक्त गढ़वाल मंडल पौड़ी
6. अपर आयुक्त गढ़वाल मंडल पौड़ी।
7. पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल परिक्षेत्र पौड़ी।
8. मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल मंडल पौड़ी।
9. वन संरक्षक गढ़वाल वृत्त पौड़ी।
10. मुख्य अभियंता लोनिवि गढ़वाल मंडल पौड़ी।
11. मुख्य अभियंता जल निगम पौड़ी।
12. निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग पौड़ी।
13. मुख्य अभियंता लघु सिंचाई गढ़वाल मंडल पौड़ी।
14. उप निबंधक सहकारिता पौड़ी।
15. महाप्रबंधक जल संस्थान गढ़वाल मंडल पौड़ी।
16. संयुक्त निदेशक उद्यान पौड़ी।
17. संयुक्त निदेशक अर्थ एवं संख्या गढ़वाल मंडल पौड़ी।
18. उप निदेशक रेशम श्रीनगर गढ़वाल पौड़ी।
19. उप निदेशक मत्स्य पौड़ी।
20. अपर निदेशक कृषि गढ़वाल मंडल पौड़ी।
21. मुख्य अभियंता सिंचाई, श्रीनगर गढ़वाल पौड़ी।
22. क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी पौड़ी।
ये अधिकारी बैठते हैं नियमित
23. अपर निदेशक प्राथमिक शिक्षा गढ़वाल मंडल पौड़ी।
24. अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा गढ़वाल मंडल पौड़ी।

दून से चलते हैं दो कार्यालय
पौड़ी में कहने के लिए दो कार्यालय ऐसे भी हैं जो राज्य स्तरीय हैं। ये हैं उत्तराखण्ड ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग और आयुक्त ग्राम्य विकास। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इन कार्यालयों में इनके प्रमुख अधिकारी ही नहीं बैठते हैं। बताया जाता है कि आयोग में उपाध्यक्ष नियमित रूप से नहीं बैठते हैं तो वहीं आयुक्त ग्राम्य विकास मुख्यालय में अधिकारियों की झलक भी नहीं दिखाई देती है। इसके विपरीत दूसरी तरफ कुमाऊं मंडल भी है जहां के नैनीताल जनपद के हल्द्वानी में सेवायोजन, समाज कल्याण, महिला डेयरी के राज्य स्तरीय कार्यालय स्थापित हैं। ये मुख्यालय बकायदा यही से संचालित हो रहे हैं।

 

 

 

बात अपनी-अपनी
धन्यवाद! आपका जो आपने ये मामला मेरे संज्ञान में डाला। इस सम्बंध में विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री से बात करूंगा।
विनोद कंडारी, विधायक, देवप्रयाग

इस मामले को लेकर मेरी मुख्यमंत्री से विधानसभा के विशेष सत्र में बात हुई थी और उनको पत्र लिखकर भी बताया गया है। जल्द ही कार्यावाही का आश्वासन दिया गया है।
राजकुमार पोरी, विधायक, पौड़ी

ये सरकार जुमलेबाज है, इसका काम सिर्फ जनता को बेवकूफ बनाना है। मंडल मुख्यालय की हालत ये है कि मंडलीय अधिकारी बैठते ही नहीं हैं। कई कार्यालय तो देहरादून शिफ्ट हो गए हैं और कई देहरादून कैम्प कार्यालय से ही चल रहे हैं।
सुनील लिंगवाल, जिलाध्यक्ष, सेवा दल कॉग्रेस, पौड़ी

राज्य गठन से पहले पौड़ी में खूब रौनक हुआ करती थी लेकिन राज्य गठन के बाद धीरे-धीरे यहां स्थित सभी विभागों के कैम्प कार्यालय देहरादून बन गए। अधिकारी भी कैम्प कार्यालयों में बैठकर काम कर रहे हैं और उनका पौड़ी आना कभी-कभार ही होता है। जब कमिश्नरी ही देहरादून से संचालित हो रही है तो अन्य विभागों की क्या बात की जाए। विभागों के मुख्यालय पौड़ी में ही बनाए रखने के लिए कई आंदोलन किए गए लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। कभी शिक्षकों का सबसे बड़ा कार्यालय पौड़ी में ही हुआ करता था, जो पृथक राज्य बनने के बाद राज्य मुख्यालय बनकर नैनीताल जिले के मैदानी रामनगर क्षेत्र में शिफ्ट हो गया। इसी तरह कभी खेल विभाग का मंडलीय कार्यालय भी पौड़ी में था, जो बाद में देहरादून चला गया।
जसपाल सिंह नेगी, पूर्व अध्यक्ष, नगर पालिका, पौड़ी

 

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