महाराष्ट्र में पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख पर लगे आरोपों के बाद से सूबे की राजनीति गरमाई हुई है। विपक्षी भारतीय जनता पार्टी राज्य सरकार पर हमलावर है। इस बीच मुंबई पुलिस से 100 करोड़ रुपए की वसूली के मामले में अनिल देशमुख के गृहमंत्री पद से हटने के बाद अब उपमुख्यमंत्री अजित पवार और शिवसेना नेता व परिवहन मंत्री अनिल परब भाजपा के निशाने पर हैं। भाजपा ने वसूली के मामले में इन दोनों के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग की है।
महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह और बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे से संबंधित मामले में अजीत पवार और अनिल परब की भी सीबीआई जांच की मांग की।
गौरतलब है कि फरवरी में रिलायंस समूह के मालिक मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के पास जिलेटिन की छड़ों से लदी कार मिली थी। इस मामले में एनआईए ने मुंबई पुलिस की क्राइम इंटेलिजेंट यूनिट (सीआईयू) के प्रमुख एपीआई सचिन वाजे को गिरफ्तार किया था।
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इस प्रकरण में वाजे की संलिप्तता को लेकर हुए विवाद में परमबीर सिंह को आयुक्त के पद से हटाकर होमगार्ड विभाग में भेज दिया गया था। इसके बाद सिंह ने अनिल देशमुख पर 100 करोड़ रुपए की वसूली का आरोप लगाया था।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस मामले की सीबीआई जांच शुरू है। इसके बाद सचिन वाजे ने भी अजीत पवार और अनिल परब पर 100-100 करोड़ रुपए की वसूली करने का आरोप लगाया था। अब इसकी जांच को लेकर भाजपा ने मोर्चा खोल दिया है।
पवार-परब पर आरोप
सचिन वाजे ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की पूछताछ में कई खुलासे किए हैं। वाजे ने इस संबंध में विशेष कोर्ट को एक पत्र दिया था जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि अजीत पवार के करीबी दर्शन घोड़ावत ने उनसे गुटखा विक्रेताओं से 100 करोड़ रुपए वसूलने को कहा था।
हालांकि अजित पवार ने इस आरोप को सिरे से नकार दिया था। पवार ने कहा था कि वह सचिन वाजे से कभी नहीं मिले। इसके अवाला वाजे ने आरोप लगाया था कि अनिल परब ने जनवरी 2021 में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के 50 ठेकेदारों से (प्रत्येक से 2-2 करोड़) 100 करोड़ रुपए की वसूल करने को कहा था।लेकिन परब ने वाजे के दावे को खारिज करते हुए इसे महाविकास आघाड़ी सरकार को बदनाम करने की साजिश बताया था।
यह है पूरा मामला
परमबीर सिंह ने मुंबई के पुलिस कमिश्नर पद से हटाए जाने के बाद प्रदेश होम गार्ड का डीजी बनाए जाने के बाद बीते बीस मार्च को सूबे के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिख आरोप लगाया था कि तत्कालीन गृहमंत्री अनिल देशमुख ने कुछ पुलिस अधिकारियों को हर महीने मुंबई के बार और रेस्ता से 100 करोड़ रुपए की वसूली करने को कहा था।
इस पूरे मामले की जाँच के लिए सरकार ने एक आयोग का गठन किया था। इस पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि समिति को न्यायिक आयोग नहीं कहा जा सकता है। क्योंकि इसे जाँच आयोग अधिनियम 1952 के तहत शक्तियां नहीं दी गई हैं। इसके बाद सरकार ने आयोग को सिविल कोर्ट की शक्तियां दे दी थी।

