पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की मुसीबतें बढ़ती ही जा रही हैं। तोशाखाना मामले में तीन साल जेल की सजा के बाद अब इमरान पांच साल तक चुनाव भी नहीं लड़ सकेंगे। यदि इमरान को उच्च न्यायालय से राहत नहीं मिलती है तो उनका और उनकी पार्टी का राजनीतिक अस्तित्व खतरे में आ जाएगा, वहीं सवाल उठ रहे हैं कि क्या इमरान की सियासी पारी के अंत की यह शुरुआत है?
क्रिकेट के मैदान से राजनीति के अखाड़े में खुद को आजमाने वाले पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को तोशाखाना मामले में तीन साल की सजा के बाद अब इमरान पांच साल तक चुनाव भी नहीं लड़ सकते हैं। पाकिस्तान में काफी समय से राजनीतिक अस्थिरता अपने चरम पर है। ऐसे में इमरान की गिरफ्तारी के बाद हालात और बिगड़ने का अंदेशा जताया जा रहा है। वहीं इमरान की गिरफ्तारी के बाद उनके राजनीतिक भविष्य पर भी सवाल उठने लगे हैं। वर्तमान सरकार का कार्यकाल 12 अगस्त को खत्म हो रहा है। इसके बाद अक्टूबर या नवंबर में पाकिस्तान में आम चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में यदि इमरान खान को उच्च न्यायालय से राहत नहीं मिलती है तो उनका और उनकी पार्टी का राजनीतिक अस्तित्व खतरे में आ जाएगा।
तोशाखाना केस
‘तोशाखाना’ एक फारसी शब्द है। इसका अर्थ है वह कमरा जहां शासन का खजाना या विदेशों द्वारा प्राप्त उपहार रखे जाते हैं। पाकिस्तान में तोशाखाना की स्थापना वर्ष 1974 में हुई थी। इसे प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, कैबिनेट मंत्रियों, सरकारी अधिकारियों को विदेशी दौरों पर मिले उपहारों को रखने के लिए बनाया गया था। पाकिस्तान में 1978 में एक कानून बनाया गया था कि प्रधानमंत्री को मिलने वाले हर उपहार को 30 दिनों की समय सीमा के भीतर तोशाखाना में जमा करना होगा। इसकी जिम्मेदारी विदेश मंत्रालय को दी गई। हालांकि इमरान खान पर आरोप है कि उन्होंने 2018 से 2021 के बीच प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान विदेश से प्राप्त उपहारों को तोशाखाना में जमा कराने के बजाय इन उपहारों को बाजार में बेचकर पैसा कमाया। जब उस वक्त की इमरान खान सरकार से सवाल पूछा गया तो उन्होंने इसे स्टेट सीक्रेट बता दिया।
तोशाखाना केस का खुलासा कैसे हुआ
पाकिस्तान के एक पूर्व कैबिनेट सचिव ने सितंबर 2021 में तोशाखाना मामले को लेकर बड़ा खुलासा किया था। उन्होंने दावा किया था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान तोशाखाना के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने विदेश से मिले उपहारों में से कुछ को छिपा लिया और कुछ को बेच दिया। आरोप है कि पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी ने केवल 4 करोड़ रुपए देकर तोशाखाना से 14.2 करोड़ रुपये के 112 उपहार हड़प लिए थे। इसमें इमरान खान को दुनिया के अलग-अलग देशों से सात रोलेक्स घड़ियां, साथ ही अन्य महंगी घड़ियां, सोने और हीरे के गहने, महंगे पेन, सोने के कफ लिंक, अंगूठियां, लाखों रुपए के डिनर सेट और परफ्यूम मिले।
पाकिस्तानी तोशाखाना अधिनियम के अनुसार, विदेश से एक निश्चित मूल्य से अधिक मूल्य पर प्राप्त उपहारों को तोशाखाना में जमा करना होता है। अगर कोई प्रधानमंत्री कोई उपहार रखना चाहता है तो उसे कीमत चुकानी पड़ती है, हालांकि यह कीमत उपहार की वास्तविक कीमत से कम होती है। उपहारों की कीमतें तय करने के लिए एक कमेटी भी बनाई गई है। उपहार मिलने पर पाकिस्तानी नेताओं को कैबिनेट डिविजन को उसकी अनुमानित कीमत बतानी होती है। यदि कोई उपहार ऐतिहासिक महत्व का है तो उसे किसी भी कीमत पर बेचा नहीं जा सकता। ऐसे उपहार तोशाखाने में ही रखे जाते हैं।
सबसे महंगा उपहार
इमरान खान को सबसे महंगा तोहफा जो मिला वो एक गोल्डन रोलेक्स घड़ी थी। इस घड़ी की कीमत पाकिस्तान सरकार द्वारा 8 करोड़ 50 लाख रुपए आंकी गई थी। यह घड़ी सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद ने 18 सितंबर 2018 को इमरान खान को दी थी। इमरान खान ने इस घड़ी को खरीदने के लिए पाकिस्तानी तोशाखाना में केवल 1 करोड़ 70 लाख रुपए जमा किए थे। यह किसी पाकिस्तानी राष्ट्राध्यक्ष को दिया गया अब तक का सबसे महंगा विदेशी उपहार है। इसके अलावा यह किसी प्रधानमंत्री द्वारा अपने लिए इस्तेमाल किया गया सबसे महंगा उपहार भी है। इस घड़ी को बाद में इमरान खान ने 5 करोड़ रुपए में किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया।
सेना से दुश्मनी पड़ी भारी
प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद से ही इमरान खान ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है। उन्होंने सबसे पहले अमेरिका पर अपनी ही सरकार के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया। बाद में उन्होंने पलटवार करते हुए इसके लिए तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा को जिम्मेदार ठहराया था। चुनावी रैलियों से लेकर इंटरव्यू और प्रेस कॉन्फ्रेंस तक में उन्होंने पाकिस्तानी सेना को मुख्य खलनायक बताया था। यही वजह है कि विदेशी चंदे के मामले के बाद अब इमरान खान को तोशाखाना मामले में दोषी ठहराया गया है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, अगर इमरान खान और पाकिस्तानी सेना के बीच रिश्ते मधुर होते, न तो उन्हें प्रधानमंत्री की कुर्सी से हटाया जाता और न ही किसी मामले में दोषी ठहराया जाता।
इससे पहले भी गए कई पीएम जेल
इमरान खान जेल जाने वाले पहले पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नहीं हैं। पाकिस्तान के इतिहास में निर्वाचित नेताओं के साथ किए गए व्यवहार के कई ऐसे उदाहरण हैं जब पूर्व हुक्मरानों को जेल जाना पड़ा है।
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के पूर्व अध्यक्ष इमरान अब तीसरे ऐसे नेता बन गए हैं, जो पिछले करीब एक दशक में सरकारी पद के लिए अयोग्य करार दिए जा चुके हैं। इमरान के पहले पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के यूसुफ रजा गिलानी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज के नवाज शरीफ के साथ भी ऐसा ही हुआ था। हालांकि इमरान खान पहले पूर्व प्रधानमंत्री हैं जिन्हें अटक जेल में रखा गया है। जेल प्रशासन का दावा है कि इमरान खान को किताबें, अखबार, टीवी, जेल का खाना दिया जा रहा है। इमरान के लिए राहत की बात ये है कि उनके बैरक के भीतर बाथरूम की सुविधा है। पाकिस्तान में बिजली संकट चल रहा है, ऐसे में उन्हें भी एक दीपक दिया गया है। एआरवाई टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक इमरान खान की गिरफ्तारी के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन के खतरे को देखते हुए पुलिस ने इस्लामाबाद और सेना मुख्यालय रावलपिंडी में हाई सिक्योरिटी अलर्ट घोषित किया हुआ है।


पाकिस्तानी कोर्ट के फैसले के बाद इमरान के राजनीतिक भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं। माना जा रहा है कि अगर सुप्रीम कोर्ट इमरान खान को दी गई सजा पर रोक लगाता है तो वह आगामी चुनाव में हिस्सा ले सकते हैं। हालांकि अगर उन्हें राहत नहीं मिली तो उन्हें चुनाव से दूर रहना पड़ेगा। पाकिस्तान पर पैनी नजर रखने वाले विशेषज्ञों की राय है कि इमरान खान को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल सकती है। हालांकि कोर्ट ने इमरान खान के मामले की सुनवाई के लिए अभी तक कोई तारीख तय नहीं की है। माना जा रहा है कि इमरान खान की सजा को चुनाव के दौरान एक मुद्दे के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

