आजादी के तुरंत बाद कांग्रेस के सांसद पर लोकसभा में सवाल के बदले धन लेने के आरोप लगे थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू इन आरोपों से इतने व्यथित हुए कि उन्होंने अपने सांसद का इस्तीफा अस्वीकार कर लोकसभा में प्रस्ताव पारित करा उस सांसद को निष्कासित कर दिया था। दशकों बाद एक बार फिर सवाल के बदले धन का मामला देश की राजनीति को गर्मा रहा है जिससे सांसदों की नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं

संसद में अपने अच्छे और जोरदार भाषणों के लिए कई नेताओं की तारीफ होती है। चाहे वो सत्ता पक्ष से हो या विपक्ष से। ऐसे सांसदों में से ही एक हैं तृणमूल पार्टी की महुआ मोइत्रा। वह पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर से लोकसभा सांसद हैं। मोइत्रा वर्तमान में संसद में किए गए प्रश्नों की वजह से विवादों में घिरी हुई हैं। पिछले हफ्ते बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने उन पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। दुबे का आरोप है कि महुआ लोकसभा में सवाल पूछने के लिए पैसे लेती हैं और पैसे देने वाले शख्स का नाम है बिजनेसमैन दर्शन हीरानंदानी।
अब सवाल उठता है कि आखिरकार कौन है दर्शन हीरानंदानी तो इसका जवाब है कि वह देश के प्रमुख रियल एस्टेट समूह हीरानंदानी ग्रुप के सीईओ हैं। इस हीरानंदानी ग्रुप की स्थापना निरंजन हीरानंदानी और सुरेंद्र हीरानंदानी नाम के दो सगे भाइयों ने की थी। दर्शन हीरानंदानी निरंजन हीरानंदानी के बेटे हैं। हीरानंदानी ग्रुप की गिनती देश के सबसे बड़े रियल एस्टेट ग्रुप में होती है। इस कंपनी ने मुंबई में पवई झील के आसपास स्थित प्रसिद्ध हीरानंदानी सोसायटी का निर्माण किया है। इस ग्रुप के कई प्रोजेक्ट हैं। रियल एस्टेट के अलावा, हीरानंदानी ग्रुप स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, डेटा सेंटर, क्लाउड कंप्यूटिंग, लॉजिस्टिक्स और आतिथ्य क्षेत्रों में भी फैला हुआ है।
आरोपों के इस सिलसिले के बाद मीडिया में दर्शन हीरानंदानी के नाम से एक चिट्ठी सामने आने के बाद सांसद महुआ और भी मुसीबत में फंस गई हैं। मीडिया में सामने आई चिट्ठी में हीरानंदानी ने कथित तौर पर आरोपों को सही ठहराया है। फिलहाल अब ये मामला संसद की एथिक्स कमेटी के पास है। कैश के बदले संसद में सवाल पूछने के आरोपों का जवाब देने के लिए टीएमसी सांसद महुआ एथिक्स कमेटी के सामने पेश जरूर हुई लेकिन कुछ ही समय बाद कमेटी के अध्यक्ष पर अभद्रता का आरोप लगाते हुए उन्होंने बैठक का बहिष्कार कर दिया। उन्होंने लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला को चिट्ठी लिखकर कमेटी के अध्यक्ष पर कई गंभीर आरोप भी लगा दिए।
विपक्ष के सांसदों द्वारा भी आरोप लगाया गया कि कमेटी के चीफ विनोद कुमार सोनकर की ओर से तृणमूल नेता से काफी निजी सवाल पूछे गए थे। कथित तौर पर उनसे पूछा गया कि आपने इस साल दर्शन हीरानंदानी से कितनी बार संपर्क किया? आप कितनी बार दुबई गई? आप किस होटल में ठहरी थीं? इसके अलावा उनसे कॉल और फोन रिकॉर्ड पर भी सवाल किए गए, जिससे महुआ नाराज हो गई और वहां से लौटकर उन्होंने स्पीकर ओम बिरला को चिट्ठी लिखते हुए कमेटी के सवालों की तुलना ‘चीरहरण’ तक से कर दी। इस बीच एथिक्स कमेटी की 500 पेजों की रिपोर्ट के अनुसार महुआ की संसद सदस्यता रद्द और मामले की गहन जांच करने की सिफारिश की है। वहीं दुबे ने दावा किया है कि लोकपाल ने मामले की सीबीआई जांच के आदेश भी दे दिए हैं।
क्या है मामला?
शुरुआत उस चिट्ठी से करते हैं जहां से ये विवाद शुरू हुआ। तारीख थी 15 अक्टूबर 2023 ‘जब झारखंड के गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को शिकायती पत्र लिखा। दुबे ने आरोप लगाया कि महुआ मोइत्रा संसद में अडानी ग्रुप के खिलाफ सवाल पूछने के लिए पैसे लेती हैं। इसलिए उन्हें लोकसभा से निलंबित किया जाना चाहिए और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच की जानी चाहिए।
निशिकांत दुबे ने कहा कि अडानी ग्रुप की वजह से हीरानंदानी ग्रुप को ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा बड़ा कॉन्ट्रैक्ट नहीं मिल सका। साथ ही अडानी ग्रुप और हीरानंदानी ग्रुप ने ठेके पाने के लिए देश के कई इलाकों में एक-दूसरे के खिलाफ बोली लगाई। यानी दोनों गुटों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा की स्थिति है। इसलिए दर्शन हीरानंदानी ने लोकसभा में अडानी के बारे में सवाल उठाने के लिए महुआ मोइत्रा को भुगतान किया था।
निशिकांत दुबे ने एक नहीं बल्कि तीन चिट्ठियां लिखी। एक लोकसभा स्पीकर को दूसरी केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव को और तीसरी आईटी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर को। इस चिट्ठी में निशिकांत दुबे द्वारा लिखा गया कि महुआ मोइत्रा ने दर्शन हीरानंदानी को अपना लोकसभा वेबसाइट का लॉगइन, आईडी पासवर्ड दे दिए ताकि इसका इस्तेमाल वे अपने फायदे के लिए कर सकें जो भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।
मोइत्रा के समिति के सामने पेश होने ठीक पहले बीजेपी द्वारा दावा किया गया था कि तृणमूल सांसद के संसदीय अकाउंट से लगभग 47 बार दुबई से लॉगइन किया गया था। राजनीतिक मामलों से इतर करीबी मित्र संग उनके अनबन की खबरें भी सुर्खियों में हैं। अनबन भी ऐसी-वैसी नहीं। दोनों कभी एक डॉगी की कस्टडी, उसके खिलौने की चोरी तो कभी पर्सनल फोटोज लीक करने के आरोप में थाने और अदालत पहुंच रहे हैं।
महुआ ने अपने पूर्व प्रेमी को ‘जिल्टेड एक्स’ बताते हुए उन पर पर्सनल फोटोज और जानकारियां लीक करने के आरोप लगाए हैं। दूसरी ओर उनके पूर्व प्रेमी और सुप्रीम कोर्ट में वकील जय अनंत देहाद्राई ने महुआ पर कुत्ता चोरी और ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाया है। आपसी आरोप-प्रत्यारोप से इतर महुआ और अनंत का रिश्ता एक-दूसरे को गंभीर नुकसान पहुंचाने की कोशिशों के स्तर तक पहुंच गया। अनंत ने महुआ पर पैसे लेकर संसद में सवाल पूछने के आरोप लगाए। इस मामले में महुआ पर जांच की तलवार लटकी है और आरोप साबित होने पर उनकी संसदीय सदस्यता भी जा सकती है। जानकारों के अनुसार जय अनंत देहाद्राई ने ही भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को महुआ के खिलाफ सारे सबूत उपलब्ध कराए हैं।
कौन हैं जय अनंत देहाद्राई
नेहरूकाल में भी सवाल के बदले दिए गए थे पैसे
ये पहली बार नहीं है किसी नेता ने पैसे लेकर संसद में सवाल पूछा हो। इससे पहले भी आजाद भारत में साल 1951 में कांग्रेस के एक सांसद एचजी मुदगल पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने बुलियन मर्चेंट एसोसिएशन से दो बार हजार-हजार रुपयों की रिश्वत लेकर संसद में प्रश्न पूछे थे। उस समय नेहरू सरकार द्वारा इस मामले को तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष जीवी मावलंकर से सलाह मशविरा कर इस आरोप की जांच एक संसदीय कमेटी से कराई गई थी। 24 सितंबर, 1951 को कमेटी की रिपोर्ट सदन में रखी गई और प्रधानमंत्री ने सदन से मुदगल को निष्कासित किए जाने का प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने संसद में प्रस्ताव पेश करते हुए कहा ‘यह मामला उतना ही खराब है जितना यह हो सकता था। यदि हम इसे एक मामूली घटना मान कुछ ढील देने की सोचते हैं तो मैं समझता हूं कि यह दुर्भाग्यपूर्ण होगा क्योंकि यह ऐसा पहला मामला है जो इस सदन के समक्ष आया है।

