अमेरिका ने रुस पर सख्ती दिखाते हुए 15 अप्रैल को रुस के कई राजनयिकों को प्रतिबंधित कर दिया था। लेकिन अब रुस ने अमेरिका को उसी की भाषा में जवाब देते हुए जैसे को तैसा वाली नीति अपनाई है। रुस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए 10 राजनयिकों को निष्कासित और 8 को ब्लैकलिस्ट में डाल दिया है। जिन अमेरिकी राजनयिकों पर रुस ने प्रतिबंध लगाया है उनमें अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई के निदेशक और अटार्नी जनरल शामिल है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक और राजनीतिक संबंध काफी ज्यादा खराब हो चुके है।
दरअसल रुस बड़ी संख्या में यूक्रेन के पास अपने सैनिकों की तैनाती कर रहा है। अमेरिकी भी ब्लैक सागर में अपने फाइटर जहाजों को भेज रहा है। रुस ने अमेरिका इस कदम पर उसे चेतावनी भी दी है। 15 अप्रैल को अमेरिका ने रुस पर आरोप लगाया था कि रुस ने अमेरिका पर साइबर हमला, चुनावों को ट्रंप की तरफ झुकाने के लिए और अन्य शत्रुतापूर्ण गतिविधियों में सलिप्त पाएं जाने के कारण रुस के 10 राजनीतिकों को प्रतिबंध कर दिया था।
यह भी पढ़े:रुस और ईरान ने अमेरिकी चुनाव नतीजों को व्यापक प्रभावित करने की कोशिश की: US National Intelligence Office
वाशिंगटन ने अपने बयान में कहा था कि प्रतिबंध से वह रुस की हानिकारक विदेश नीति की रोकथाम करना चाहता है। इतना ही नहीं अमेरिका ने रुस पर आरोप लगाते हुए कहा था कि सोलरविन्डस की हैकिंग के पीछे रुस के राजनयिकों का हाथ था।
मार्च में अमेरिका ने रुस के उन सात अधिकारियों को प्रतिबंधित किया था, जिन्होंने व्लादिमीर पुतिन के कटु आलोचक और रुस के नेता एलेक्स नवलनी को जहर दिया था। पंरतु दूसरी तरफ रुस इन सभी आरोपों को खारिज करता आया है।
रुस में जब एलेक्स नवलनी को गिरफ्तार किया गया था, तब मास्को में पुतिन के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन हुए थे्। रुस ने इन प्रदर्शनों के पीछे पश्चिमी देशों का हाथ बताया था।
एक तरफ दोनों देशों के रिश्तें भयानक मोड़ पर पहुंच चुके है तो वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने रुस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक बैठक का प्रस्ताव रखा है। रुस ने कहा कि वह इसे दोनों देशों के लिए सकारत्मक कदम मान रहा है और इस पर विचार कर रहा है।

