अगले साल केरल में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी अभी से तैयारियों में जुट गई है। बीते छह अक्टूबर को बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने नए पदाधिकारियों के साथ पहली बैठक में जिन चुनावी राज्यों पर चर्चा की, उनमें केरल का नाम महत्वपूर्ण राज्यों में शामिल रहा।
चुनाव से पहले ही दक्षिण के इस प्रमुख राज्य में अपनी जमीनी स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए भाजपा एक्शन में है। बीजेपी की ओर राज्य में पकड़ बनाने के लिए लगातार प्रदेश इकाई को जनता के मध्य जाकर गंभीर और महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाने के लिए आदेश दिया गया है। इस समय भाजपा को केरल की पी विजयन सरकार के राज में सामने आए गोल्ड स्मगलिंग (Smuggling) जैसे मुद्दों का लाभ उठाने का भी एक अच्छा अवसर मिल गया है। बीजेपी लगातार इन मुद्दों को राज्य में उठा रही है और लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रही है।
इतना ही नहीं कि भाजपा का फोकस केरल में ईसाइयों (Christians) के 20 प्रतिशत वोट बैंक पर भी केंद्रित है। अगले साल मई 2021 में विधानसभा चुनाव संभावित माने जा रहे हैं।
धार्मिक वोट-बैंक रहेगा हावी!
पार्टी केरल के प्रदेश नेतृत्व से लगातार राज्य के माहौल की रिपोर्ट लेने में जुटी हुई है। माना जा रहा है कि इस बार धार्मिक वोट-बैंक हावी रहेगा। दरअसल, अगर राजनैतिक दृष्टि से देखा जाए तो इस बार धार्मिक वोट बैंक केरल की सियासत में हावी है। एक तरफ जहाँ 30 प्रतिशत मुस्लिम हैं तो 20 प्रतिशत ईसाई हैं। राज्य की सियासत का रुख दोनों धर्मों के 50 प्रतिशत वोट बैंक मिलकर तय करते हैं। वहीं लव जिहाद का मुद्दा भी बीजेपी लागतार उठा रही है।
क्योंकि लव जिहाद के कई मामले केरल में सामने आए। इसकी चपेट में इसाई समुदाय की कई लड़कियां भी आई हैं, जिससे भाजपा को भरोसा है कि थोड़ी और मेहनत करने पर उसे ईसाई समुदाय का विश्वास हासिल हो सकता है। बीजेपी नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता टॉम वडक्कन का दावा है कि केरल में भाजपा का जनाधार लगातार तेजी से बढ़ रहा है। क्योंकि जनता लेफ्ट के शासन से परेशान है। हाल में सामने आये गोल्ड स्मगलिंग, हाउसिंग घोटाले के खुलासे से जनता सरकार से काफी नाराज है। ये भी एक बड़ा कारण है कि राज्य के ईसाई समुदाय का भाजपा की तरफ झुकाव हो रहा है। इन आने वाले चुनाव में भाजपा की स्थिति बहुत बेहतर होगी।

राज्य में इस वक़्त सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाली लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) कबिज है। साल 2016 के चुनाव में एलडीएफ ने 91 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं , कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के खाते में 47 सीटें आयीं थीं। भाजपा का तब प्रदर्शन खासा निराशा जनक रहा था। पिछले चार सालों में लेकिन पार्टी ने अपना जनाधार मजबूत कर लिया है।
केरल की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी
भारतीय जनता पार्टी ने केरल के मलप्पपुरम जिले में होने वाले स्थानीय निकाय के चुनावों में 2 मुस्लिम महिलाओं को अपना प्रत्याशी बनाकर चुनावी मैदान में उतारा है। मुस्लिम बहुल मलप्पपुरम जिला इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) का गढ़ माना जाता है।

केरल के राजनीतिक इतिहास में ऐसा पहली बार है कि बीजेपी ने इस तरह का कदम उठाया है। ऐसा माना जा रहा है कि बीजेपी के इस फैसले से बीजेपी कार्यकर्ताओं का उत्साह काफी बढ़ेगा।
वैसे, बीजेपी के टिकट पर कई मुस्लिम उम्मीदवार है लेकिन सिर्फ यही दो महिला उम्मीदवार हैं। ये महिला उम्मीदवार है- टीवी सुलफथ जो वंडूर ग्राम पंचायत के वार्ड 6 से उम्मीदवार हैं, वहीं आयशा हुसैन पोनमुदम ग्राम पंचायत में वार्ड 9 से बीजेपी कैंडिडेट हैं।
मलप्पपुरम में बीजेपी कमजोर
सुलफथ केंद्र की बीजेपी सरकार की ‘प्रगतिशील’ नीतियों की मुरीद हैं। वहीं आयशा के पति बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चा के सदस्य हैं। वह भी मलप्पपुरम जिला पंचायत की इडारीकोड डिविजन में बीजेपी के झंडे तले चुनाव लड़ रहे हैं। आयशा को कहना है कि उन्हें पीएम मोदी के बोल्ड फैसले पसंद आते हैं। वह आगे कहती हैं कि मैं मोदी जी और बीजेपी के उन कदमों का समर्थन करती हूं जो उन्होंने देश के भले के लिए उठाए हैं। मलप्पपुरम में बीजेपी कमजोर है लेकिन इन दो मुस्लिम महिलाओं की उतारने से बीजेपी को उम्मीद है कि वे आईयूएमएल के गढ़ में सेंध लगा पाएगी।
राष्ट्रीय टीम में भी केरल का कद बढ़ा
भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में केरल के दो नेताओं को राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा द्वारा बदल दिया गया है। मुस्लिम चेहरे अब्दुल्ला कुट्टी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि ईसाई चेहरे टॉम वडक्कन को राष्ट्रीय प्रवक्ता की जिम्मेदारी दी गई है। खास बात यह है कि इससे पहले दोनों नेता कांग्रेस में रहे हैं। केंद्र सरकार के बारे में बात करते हुए, प्रधान मंत्री मोदी ने अपने मंत्रिपरिषद में केरल के नेता वी मुरलीधरन को विदेश राज्य मंत्री के रूप में नियुक्त किया है। इस प्रकार, भाजपा ने सरकार और संगठन दोनों में केरल को उचित भागीदारी देकर राज्य में अपनी पकड़ बनाने की कोशिश की है।
भाजपा का जनाधार लगातार बढ़ रहा है
राज्य में भाजपा का जनाधार लगातार बढ़ रहा है। चुनाव के आंकड़े भी इसकी पुष्टि करते हैं। 2011 के विधानसभा चुनावों में केवल छह प्रतिशत वोट पाने वाली भाजपा को मई 2016 में 15 प्रतिशत से अधिक मत प्रतिशत मिला था। भाजपा 2016 के विधानसभा चुनावों में अपना खाता खोलने में भी सफल रही थी।
यानी वोटों में सौ प्रतिशत से अधिक की उछाल थी। भाजपा को उम्मीद है कि 2021 के विधानसभा चुनावों में पार्टी की स्थिति में और सुधार होगा। 2016 के विधानसभा चुनावों में, लेफ्ट के नेतृत्व वाले एलडीएफ ने 140 में से 83 विधानसभा सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस की अगुवाई वाली यूडीएफ को 47 और बीजेपी और निर्दलीय को एक मिली।

