सऊदी अरब के नायक और भावी राजा कहे जाने वाले सलमान एक नहीं कई प्रकार के आरोपों से घिरे हुए हैं। हत्या, से लेकर मानवाधिकारों के उल्लंघन करने के आरोप उनके खिलाफ दर्ज हैं। मोहम्मद बिन सलामन ने क्राउन प्रिंस बनने के लिए कई प्रतिद्वंद्वियों को मात दी है। जिसके बाद से ही वे अपने कई विरोधियों से घिर चुके हैं। हाल ही में उन्होंने स्वीकार किया है कि सऊदी-इजरायल संबंट्टाों को सामान्य बनाने के उनके प्रयासों के कारण शायद उनकी हत्या की जा सकती है। वहीं शाही परिवार के भीतर षड्यंत्र का डर सलमान को हमेशा से सताता रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर सऊदी प्रिंस सलमान पर ऐसे क्या आरोप हैं जिनका उन्हें डर सता रहा है
इस्लाम का उद्गम स्थल माने जाने वाले सऊदी अरब में अब्दुल्लाह
बिन अब्दुल अजीज ने करीब 10 साल तक राज किया। उनकी मृत्यु के बाद उनके सौतेले भाई सलमान बिन अब्दुल अजीज 2015 से अब तक वहां के राजा हैं। उनकी उम्र अब करीब 90 साल की हो चुकी है। ऐसे में कहा जा रहा है कि क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान जो कि सलमान बिन अब्दुल अजीज के उत्तराधिकारी हैं, वो सऊदी की सत्ता जल्द ही संभाल सकते हैं। लेकिन उनकी इस राह में उन पर लगे गंभीर आरोप आड़े आ रहे है। वहीं शाही परिवार के भीतर षड्यंत्र का डर सलमान को हमेशा से सताता रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर सऊदी प्रिंस सलमान पर ऐसे क्या आरोप हैं जिनका उन्हें डर सता रहा है।
एक वक्त ऐसा भी था कि सत्ता को हथियाने के लिए खुद मोहम्मद बिन सलमान ने कथित तौर पर पूर्व राजा ‘अब्दुल्लाह बिन अब्दुल अजीज’ को मारने की साजिश रची थी। जिसे सऊदी अरब के इतिहास की सबसे बड़ी राजनीतिक साजिश कही जा सकती है। सऊदी अरब के नायक और भावी राजा कहे जाने वाले सलमान एक नहीं कई प्रकार के आरोपों से घिरे हुए हैं। हत्या, से लेकर मानवाधिकारों के उल्लंघन करने के आरोप उनके खिलाफ दर्ज हैं।
राजा की हत्या का आरोप कहा जाता है कि क्राउन प्रिंस अपने पिता को राजा बनाने के लिए इतने गंभीर और अधीर थे कि उन्होंने कथित तौर पर रूस से प्राप्त जहर की अंगूठी से राजा अब्दुल्लाह और चाचा को मारने का प्रयास किया था। साद अल-जाबरी के कहे अनुसार उन्होंने क्राउन प्रिंस का एक गुप्त रूप से रिकॉर्ड किया गया वीडियो भी देखा है, जिसमें वह राजा और चाचा को मारने की बात कर रहे हैं। यही वजह थी कि अदालत द्वारा उन्हें राजा से काफी समय तक हाथ मिलाने से प्रतिबंधित कर दिया गया था। सऊदी के वरिष्ठ अधिकारी रहे अल-जाबरी फिलहाल कनाडा में निर्वासित जीवन बिता रहे हैं और सऊदी सरकार के साथ उनकी लंबे समय से दुश्मनी चल रही है। उनके दो बच्चे सऊदी अरब की जेल में बंद हैं जिसे लेकर जाबरी का कहना है कि सऊदी सरकार उनके बच्चों को कैद कर उन्हें देश लौटने पर मजबूर करना चाहती है।
जाली हस्ताक्षर कर युद्ध का फरमान
सऊदी के युवराज मोहम्मद बिन सलमान को साल 2015 में रक्षा मंत्री नियुक्त किया गया तो उन्होंने देश को युद्ध में झोंक दिया था। उनके पिता और सऊदी के राजा वैस्कुलर डिमेंशिया से पीड़ित थे। ऐसे में सलमान ने राजा के जाली हस्ताक्षर कर यमन में हुतियों के खिलाफ युद्ध का फरमान जारी कर दिया था। मोहम्मद बिन सलमान ने यमन में हुती आंदोलनों के खिलाफ युद्ध में खाड़ी देशों के गठबंधन का नेतृत्व किया। जिसने पश्चिमी यमन के अधिकतर हिस्से पर कब्जा कर लिया था। इस युद्ध के बाद वो सऊदी के नायक बन उभरे। हालांकि इस युद्ध ने लाखों लोगों को अकाल का ग्रास बना दिया।
पत्रकार की हत्या का आरोप
प्रिंस पर सऊदी अरब के आलोचक और पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या का आरोप भी है। साल 2018 में तुर्की के राष्ट्रपति अर्दाेआन द्वारा क्राउन प्रिंस पर अप्रत्यक्ष रूप से हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया गया था। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा था कि सऊदी एजेंटों ने प्रिंस के आदेश के बाद ही जमाल खशोगी की हत्या की थी। उन्हें पता है कि खशोगी को मारने के आदेश सऊदी सरकार के सबसे उच्च स्तर से आए थे। इसके अलावा अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के अनुसार भी क्राउन प्रिंस ने खशोगी को जिंदा पकड़ने या मारने के लिए एक ऑपरेशन की इजाजत दी थी। हालांकि मोहम्मद बिन सलमान इन आरोपों से इनकार करते आए हैं।
महिलाओं को हिरासत में लेने का आरोप
सलमान पर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और महिलाओं को हिरासत में लेने का आरोप लगाया गया है। इसी साल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला मानवाधिकार के हित में काम करने वाले संगठनों द्वारा सऊदी अरब से उन सभी महिला मानवाधिकार रक्षकों (डब्ल्यूएचआरडी), महिला अट्टिाकार कार्यकर्ताओं और उनके समर्थकों को रिहा करने का आह्वान किया गया है। इन संगठनों के मुताबिक सऊदी अरब इस प्रकार से लोगों को हिरासत में लेकर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का उल्लंघन कर रहे हैं। अभी भी सऊदी अरब में महिला अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाली कई महिलाओं को मनमाने ढंग से हिरासत में लेना,उन पर यात्रा प्रतिबंध लगाना जारी है। पिछले साल ही सऊदी अरब के स्पेशलाइज्ड क्रिमिनल कोर्ट (एससीसी) ने अकादमिक सलमा अल-शहाब को 27 साल जेल की सजा सुनाई, जिसके बाद उसी अवधि के लिए यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया गया। उन पर लगे झूठे ‘आतंकवाद’ के आरोप सिर्फ सऊदी मानवाधिकार और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं के लिए उनके समर्थन को व्यक्त करने वाले
सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित थे।
इसी तरह अदालत ने नूराह अल-कहतानी को एक घोर अनुचित मुकदमे के बाद 45 साल की जेल की सजा सुनाई, जिसके बाद 45 साल के लिए यात्रा प्रतिबंध लगा दिया गया। खबरों के अनुसार अदालत ने सऊदी अधिकारियों द्वारा किए गए मानवाधिकारों के हनन की आलोचना करने और राजनीतिक कैदियों की रिहाई का आह््वान करने वाले उनके ट्वीट के लिए उन पर अस्पष्ट रूप से परिभाषित ‘आतंकवाद’ के आरोप लगाए। 2023 में, मनमाने ढंग से हिरासत में लिए जाने पर संयुक्त राष्ट्र कार्य समूह (यूएन डब्ल्यूजीएडी) ने अल-शहाब और अल-कहतानी दोनों की हिरासत को मनमाना और सऊदी अधिकारियों से उन्हें तुरंत रिहा करने का आग्रह किया।
गौरतलब है कि सऊदी में वंशानुगत तानाशाही के तहत शासन होता है। इस देश में शाही परिवार अल सऊद का प्रभुत्व है। इसलिए इस परिवार के सदस्य ही सरकार में अहम भूमिका निभाते हैं। 29 की उम्र में क्राउन प्रिंस बनने के बाद मोहम्मद बिन सलमान ने देश में कई ऐसे बदलाव किए, योजनाओं को लागू किया जो अब तक सऊदी का कोई लीडर नहीं कर पाया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सऊदी अरब को विकास की ऊंचाइयों तक ले जाने की उनकी महत्वाकांक्षा रही है। जानकारों का मानना है कि सत्ता में आने से पूर्व ही क्राउन प्रिंस सऊदी की कमान और उसे विकास की ऊंचाइयों तक ले जाने की योजना बना चुके थे। जिसे पूरा करने के लिए मोहम्मद बिन सलमान ने साम-दाम-दंड-भेद सभी प्रक्रियाओं को अपनाया।
यही वजह थी कि अपनी महत्वाकांक्षाओं और योजनाओं को पूरा करने के लिए उन्होंने महल के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी साद अल जाबरी को एक गुप्त बैठक के उद्देश्य से बुलाया था। बीबीसी की एक रिपोर्ट अनुसार उस दौरान उन्होंने सिकंदर महान की तरह आगे बढ़ते रहने की ओर संकेत करते हुए देश को आगे बढ़ाने और सऊदी को वैश्विक मंच पर बड़ा स्थान देने की अपनी योजना के बारे में जाबरी को बताया। इन योजनाओं में अर्थव्यवस्था की तेल पर निर्भरता कम करने से लेकर कानूनों में नरमी करने तक की योजना शामिल थी। एमबीएस के नाम से चर्चित मोहम्मद बिन सलमान सोए हुए देश को जगाकर आगे ले जाना चाहते हैं, जिससे वह वैश्विक मंच पर अपनी सही जगह हासिल कर सके।
साद अल जाबरी के अनुसार तत्कालीन समय में मोहम्मद बिन सलमान ने बैठक के दौरान उनसे कहा था कि वो दुनिया में सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली तेल उत्पादक कंपनी अरामको में हिस्सेदारी बेचकर अपनी अर्थव्यवस्था की तेल से निर्भरता दूर करना शुरू कर देंगे। टैक्सी फर्म उबर सहित सिलिकॉन वैली में टेक स्टार्टअप में अरबों का निवेश करना चाहते थे। इसके अलावा क्राउन प्रिंस के पास महिलाओं को काम करने की आजादी देकर देश में 60 लाख से ज्यादा नई नौकरियों को निकालने की योजना थी। खबरों के अनुसार साद अल-जाबरी को बताई गई कई अहम योजनाओं की शुरुआत उन्होंने कर दी है।
सम्भवतः इन्हीं योजनाओं का असर है कि कट्टर इस्लामिक राष्ट्र के तौर पर पहचान बना चुका सऊदी अरब तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है। 20वीं सदी के सऊदी और आज के सऊदी में बड़ा परिवर्तन आ गया है। देश की युवा आबादी को अब उन सामाजिक बंधनों से मुक्त किया जा रहा है जो पिछली पीढ़ियों को उनके सपने पूरा होने से रोकती थी। 2014 तक एमआई 6 के प्रमुख रहे सर जॉन सॉवर्स का कहना है कि मोहम्मद बिन सलमान को विरोध पसंद नहीं है, लेकिन इसी वजह से वो उन बदलावों को लागू करने में कामयाब हुए हैं जो अब तक कोई भी सऊदी अरब का लीडर नहीं कर पाया था।
सबसे स्वागत योग्य बदलावों में से एक विदेशी मस्जिदों और धार्मिक स्कूलों की फंडिंग में कटौती करना भी था, जिसके बारे में माना जाने लगा था कि ये जगह इस्लामी जिहाद को बढ़ावा देने वाली जगह बन गई है जो पश्चिम की सुरक्षा के लिए बड़ी बात थी। मोहम्मद बिन सलामन ने क्राउन प्रिंस बनने के लिए कई प्रतिद्वंद्वियों को मात दी है। जिसके बाद से ही वे अपने कई विरोधियों से घिर चुके हैं। हाल ही में उन्होंने स्वीकार किया है कि सऊदी-इजरायल संबंधों को सामान्य बनाने के उनके प्रयासों के कारण शायद उनकी हत्या की जा सकती है। गौरतलब है कि अमेरिकी कांग्रेस के सदस्यों के साथ चर्चा में बिन सलमान ने इजरायल को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। गाजा में चल रहे संघर्ष को देखते हुए भी अगर सलमान इजरायल के साथ शांति समझौता करते हैं तो अरब जगत में उनके खिलाफ कड़ी प्रतिक्रियाएं भड़क सकती हैं। इस दौरान क्राउन प्रिंस ने सऊदी अरब में समर्थन खोने के बारे में भी अपनी चिंताएं साझा कीं, जहां जनता की भावनाएं फिलिस्तीनी मुद्दे के साथ दृढ़ता से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में आशंका है कि विरोधियों की संख्या और भी बढ़ सकती और उनके खिलाफ हत्या की साजिश रची जा सकती है।

