प्रधानमंत्री आवास योजना में गड़बड़ी की जानकारी देने वाले लोगों को मध्य प्रदेश में पांच हजार रुपए का इनाम मिलेगा। दूसरी तरफ उत्तराखण्ड में इस योजना में हुए करोड़ों रुपए के घोटाले पर लीपापोती की जाती है। यही नहीं राज्य में करोड़ों का फर्जीवाड़ा करने वाले निगम को प्रधानमंत्री आवास योजना का काम दे दिया गया। योजना के तहत जिन लोगों को आवास आवंटित किए गए उनमें से अधिकांश पात्र नहीं थे

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ में गड़बड़ी और घोटाला न हो, इसके लिए मध्य प्रदेश में इनामी योजना की शुरुआत की जा चुकी है। इस प्रदेश में जो भी योजना में जुड़ी गडबड़ी और घोटाले की जानकारी सरकार से साझा करेगा उसे बतौर इनाम पांच हजार रुपये दिए जाएंगे। इस बात की घोषणा बकायदा मध्य प्रदेश विधानसभा में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव ने गत वर्ष की थी। खास बात यह है कि जो भी इस गड़बड़ी और घोटाले में शामिल पाया जाएगा उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। जिन अधिकारियों-कर्मचारियों की वजह से अपात्रों को फायदा पहुंचाया गया उन्हें फौरन बर्खास्त कर दिया जाएगा। अगर किसी जनप्रतिनिधि का नाम घोटाले में आता है, तो उसका ओहदा भी छीन लिया जाएगा। लेकिन देवभूमि उत्तराखण्ड में ऐसा नहीं है। यहां के जसपुर में नगर पंचायत महुआडाबरा में प्रधानमंत्री आवास योजना में घोटाला हुआ, लेकिन साढ़े तीन करोड़ का घोटाला सिद्ध हो जाने के बाद भी कार्रवाई ज्यादा आगे नहीं बढ़ सकी है। हालांकि आरोपियों पर धारा 420 के तहत मामले जरूर दर्ज कर लिए गए हैं। लेकिन फिलहाल मामले को जांच के नाम पर लटकाया जा रहा है। आरोपियों को न तो जेल पहुंचाया जा रहा है और न ही मामले में संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्यवाही की जा रही है। इस घोटाले में 115 अपात्र लोगों को पात्र बनाकर धनराशि जारी कर दी गई। अगर एक स्थानीय निवासी इस मामले की शिकायत उपजिलाधिकारी से नहीं करता तो जिन लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना का धन जारी किया गया, वह पकड़ में ही नहीं आ पाते चौंकाने वाली बात यह है कि इस मामले की पहले जांच हो चुकी है। इसी जांच के आधार पर रिपोर्ट दर्ज किए जाने के आदेश हुए थे। लेकिन एक बार फिर से जांच कराने की घोषणा की गई है। दुबारा जांच को मामले पर लीपापोती के नजरिए से देखा जा रहा है।

महुआडाबरा में वर्ष 2015 से 2017 तक योजना के तहत 151 लोगों को लाभ दिए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई थी। जिसके बाद सभी लोगों को नगर पंचायत के माध्यम से दो-दो लाख रुपए तीन किश्तों में वितरित किए गए थे। नगर के ही एक व्यक्ति ने इस फर्जीवाड़े की शिकायत जसपुर के उपजिलाधिकारी दयानंद सरस्वती से की। उपजिलाधिकारी ने मामले की जांच कराई। जांच में अधिकतर लोग अपात्र पाए गए थे। इसके बाद नगर पंचायत के ईओ समेत 164 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी गई। लेकिन अभी तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की पाई है। इस मामले में एक नई जांच बिठा दी गई है। फिलहाल जसपुर थाने के उपनिरीक्षक सुशील कुमार मामले की जांच कर रहे हैं। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2022 तक सभी को आवास मुहैया कराने की घोषणा की गई है। उसके तहत ही उत्तराखण्ड राज्य को भी इस योजना के क्रियान्वयन के लिए 85 करोड़ की धनराशि जारी की गई है। लेकिन उत्तराखण्ड में इस योजना की प्रगति काफी धीमी है। इसमें 1. 4 लाख आवास के सापेक्ष अभी तक 17 हजार आवास भी तैयार नहीं हुए हैं। जबकि इस बाबत जून माह में ही प्रदेश के मुख्य सचिव उत्पल कुमार ने गहरी नाराजगी जताई।

आका का डाका

उन्नीस जुलाई को मेरे पास कुछ लोग आए और उन्होंने बताया कि आपके खेतों में पटवरी नाप-जोख कर रहा है। मैं जब खेतों में गया तो वहां का दृश्य देखकर हतप्रभ रहा गया। खेतों में कई बाउंड्रियां हो चुकी थी। यह दीवारें कब और किसने लगाई पता ही नहीं चला, जबकि खेत में स्थानीय पटवारी कई लोगों के साथ खेत की नाप-जोख कर रहा था। मैंने पटवारी से पूछा कि यह सब क्या हो रहा है, तो उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्लॉट काटे जा रहे हैं। मैंने कहा कि यह खेत तो मेरा है। इसमें प्लॉट काटने की परमिशन किसने दी। इस पर उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत हमें पात्र लोगों के लिए प्लॉट काटने थे। तुम्हारी जमीन वर्ग एक (क) की है इसलिए प्लॉट काट दिए। जबकि मेरी जमीन वर्ग एक (क) के अंतर्गत नहीं आती है।

यह कहना है लालकुआं के मोटाहल्दू निवासी भुवन प्रसाद का। भुवन प्रसाद की मोटाहल्दू में आठ एकड़ जमीन है। जिसके पास दो एकड़ जमीन एलएमसी (सरकारी) है। फिलहाल भुवन की जमीन में सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पात्र लोगों के लिए 16 प्लॉट काट दिए हैं। दो एकड़ सरकारी जमीन पर प्लॉट काटने के बाद जब जमीन नहीं बची तो सरकारी कारिंदों ने भुवन की खाली पड़ी जमीन पर ही प्लॉट काट दिए। बहरहाल भुवन प्रसाद अपनी जमीन को सरकारी चंगुल से आजाद कराने के लिए दरबदर भटक रहा है।

भुवन बताता है कि इस मामले की शिकायत उन्होंने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से की थी। जहां से हमें ऊधमसिंहनगर जिला प्रशासन के पास भेज दिया गया। शिकायत करने के बाद भी प्रशासन भुवन प्रसाद के खेत में प्लॉट काट रहा है, जबकि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के दरबार में कहा गया था कि आगे से उसके खेत में कोई प्लॉट नहीं काटा जाएगा। वह अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए आमरण अनशन की भी चेतावनी दे रहा है, लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

 

पैसा लेकर ठेका दिलाने का आरोप

नगर पंचायत महुआडाबरा में काम दिलाने को लेकर पांच लाख रुपये वसूलने का मामला चर्चा में है। जसपुर के विधायक आदेश चौहान ने इस मामले का खुलासा किया है। जसपुर के विधायक आदेश चौहान के अनुसार पांच महीने पूर्व एक ठेकेदार ने बताया था कि नगर पंचायत महुआडाबरा में तीन ठेकेदारों को नगर पंचायत विकास निधि से पचास लाख रुपए का काम दिलाए जाने के लिए भाजपा जिला महामंत्री मनोज पाल ने पांच लाख रुपये वसूल किए थे। विधायक आदेश चौहान के अनुसार भाजपाई भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने भाजपा को विकास विरोधी बताते हुए कई आरोप लगाए साथ ही जिले में जितने भी ठेके दिए गए हैं, सभी की एसआईटी से जांच कराने की मांग की। उधर शिकायतकर्ता ठेकेदार ने खुद को भाजपा कार्यकर्ता बताते हुए भाजपा जिला महामंत्री मनोज पाल पर अवस्थापना विकास निधि के नाम पर पांच लाख रुपये लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि उसने इसकी शिकायत भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से की है।

 

घोटालेबाज निगम को फिर दिया काम

उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड उस कार्यदायी संस्था का नाम है जो उत्तराखण्ड में ब्लैक लिस्टेड है। बावजूद इसके निर्माण कंपनी को उत्तराखण्ड में भवन बनाने की जिम्मेदारी दी जाती है। उत्तराखण्ड में इंदिरा आवास योजना (वर्तमान में प्रधानमंत्री आवास योजना) में इस कंपनी ने करोड़ों के घोटाले किए। इस कंपनी को नगर पालिका और नगर पंचायतों के तहत गरीब लोगों के लिए मकान बनाने थे। लेकिन मकान बनाने से पूर्व ही कंपनी को पूरा पैसा दे दिया गया। पैसा मिलते ही कंपनी अपना बोरिया-बिस्तर समेट कर भाग गई। नतीजतन आज भी इंदिरा आवास योजना के तहत आधे-अधूरे भवनों के खंडहर खड़े हैं। यह हाल लगभग उत्तराखण्ड के हर शहर और कस्बे का है, लेकिन हल्द्वानी के सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई एक्टीविस्ट गुरुविंदर सिंह चड्ढा ने इस मामले में सक्रियता दिखाई। उन्होंने सूचना अधिकार अधिनियम के तहत 2010 में तत्कालीन हल्द्वानी नगर पालिका के तहत हुए इस घोटाले के दस्तावेज उपलब्ध कराए। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट नैनीताल में एक जनहित याचिका दायर कर दी है। फिलहाल याचिका की सुनवाई वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली कर रहे हैं।

गुरविंदर चड्ढा के अनुसार वर्ष 2010 में हल्द्वानी नगर पालिका में सैकड़ों गरीब और निर्बल वर्ग के लेगों के लिए इंदिरा आवास योजना शुरू की गई थी। इस योजना के तहत कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड को कुल 6 करोड़ का ठेका दिया गया था। उत्तराखण्ड की तत्कालीन सरकार की मेहरबानी से कार्यदायी संस्था को मकानों की छत बनाने से पूर्व ही पूरा पैसा जारी कर दिया गया, जबकि मानकों के अनुसार सिर्फ तीन करोड़ रुपया ही कार्यदायी संस्था को दिया जाना था। इस तरह अकेले हल्द्वानी शहर में ही इस कंपनी ने तीन करोड़ रुपये का चूना सरकार को लगा दिया। हालांकि बाद में शासन ने इस मामले जांच कराई। जांच के बाद कार्यदायी संस्था और नगर पालिका के ईओ के खिलाफ रिपोर्ट कराने के साथ ही बाकी तीन करोड़ रुपए सरकारी कोष में जमा कराने के आदेश दिए थे। लेकिन आज आठ साल बाद भी न तो इस मामले में कोई कार्यवाही हुई और न ही कोई गिरफ्तारी।

बात अपनी-अपनी

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रदेश में कुल 104761 आवास बनाए जाने हैं। अगर कहीं भी कोई घोटाला सामने आता है तो आरोपियों को बख्शा नहीं जाएगा।
मदन कौशिक, शहरी विकास मंत्री

भाजपा मामले को दबाने का प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के घोटाले में जब एक बार पहले जांच हो चुकी है, तो दोबारा जांच कराने की क्या जरूरत थी?
आदेश चौहान, विधायक जसपु

यूपीसीएल कंपनी ने यह घोटाला हल्द्वानी में ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में किया था। जिसमें शासन स्तर से ही जांच के आदेश हुए थे। बाद में आवंटियों के अधूरे पड़े मकानों को शासन ने पूर्ण जरूर करा दिया था। लेकिन उसके बाद क्या हुआ, मुझे नहीं मालूम।
जोगिंदर रौतेला, मेयर नगर निगम हल्द्वानी

मोटाहल्दू में 10 एकड़ खेत हैं जहां पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्लॉट काटे जा रहे हैं। इसमें से 8 एकड़ जमीन भुवन प्रसाद की है। जिसमें करीब 16 पट्टे काटे जाने की सूचना मिली है। हम इसकी जांच करा रहे हैं।
जगदीश चंद कांडपाल, एसडीएम नजूल रुद्रपुर

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