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भाजपा की परेशानियां बढ़ा रही शिव सेना

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्तर पर समाजवादी पार्टी और बसपा कांग्रेस को भाव नहीं दे रहे हैं। जिससे विपक्षी दलों के गठबंधन का नेतृत्व करने के उसके सपने पर पानी फिर रहा है। हालांकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भाजपा के खिलाफ निरंतर आक्रामक तेवर अपनाकर खुद को बेहतर साबित कर रहे हैं, मगर विपक्षी दल उनका नेतृत्व स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। सपा और बसपा सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को तवज्जो नहीं देना चाहते। यह कांग्रेस के लिए परेशानी की बड़ी वजह है। सत्तारूढ़ भाजपा भी कांग्रेस से कम परेशान नहीं है। भाजपा की सहयोगी पार्टियां खासकर शिव सेना उसके लिए परेशानियां खड़ी करती रही है।
हालांकि शिवसेना महाराष्ट्र और केंद्र सरकार में भाजपा की सहयोगी है, लेकिन दोनों पार्टियों के बीच क्षेत्रीय और राष्ट्रीय मुद्दों पर लगातार मतभेद सामने आते रहे हैं। सदन में कई बार शिवसेना का व्यवहार विपक्षी पार्टियों जैसा रहा। अब शिवसेना ने कहा है कि देश में चुपके से आपातकाल आ रहा है। यह सत्तारूढ़ भाजपा पर बड़ा हमला है।
शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पत्रकारों के एक सवाल पर कहा कि पत्रकारों को आलोचना करते वक्त कठोर शब्दों के इस्तेमाल से हिचकना नहीं चाहिए और अगर ऐसी आलोचना की मंशा साफ है तो यह कोई मुद्दा नहीं है। उन्होंने सवाल किया, हालांकि, आज चुपके से आपतकाल दस्तक दे रहा है। क्या हमें चुप रहना चाहिए? शिव सेना प्रमुख ने भाजपा पर निशाना साधा कि बाबरी मस्जिद विध्वंस मामला राष्ट्रपति चुनाव के दौरान फिर से खुला था और अब लोकसभा चुनाव के पहले राम मंदिर का मुद्दा उठाया जा रहा है।
 भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी का नाम लिये बिना उन्होंने कहा कि जुलाई 2017 में राष्ट्रपति पद के चुनाव के पहले उन्हें दावेदारों में अग्रणी माना जाता था। बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले पर उसी साल अप्रैल में उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद उनकी दावेदारी पर अटकलें खत्म हो गई। ठाकरे ने कहा कि वह 25 नवंबर को अयोध्या जाएंगे, लेकिन उन्होंने अभी यह फैसला नहीं किया है कि क्या वह वहां पर रैली करेंगे या नहीं।

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