बॉलीवुड हस्तियों में अक्सर सामाजिक मुद्दों के प्रति संवेदनहीन होने का आरोप लगता रहा है और यह भी कहा जाता रहा है कि हॉलीवुड के लोग राजनीतिक रूप से ज्यादा सक्रिय और सफल रहे हैं। इसके बाद भी समय- समय पर बॉलीवुड के नामचीन सितारे राजनीति में अपनी किस्मत आजमाते रहे हैं।
इसी कड़ी में कई नए नाम जुड़ गए हैं। जिसमें पहला नाम है उर्मिला मातोंडकर का। उर्मिला ने जिस बोल्ड अंदाज में अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी उतने ही बोल्ड अंदाज में अपनी दूसरी पारी शुरू की है। अब आगे पता चलेगा कि उनकी ये दूसरी पारी लंबी चलती है या नहीं। इसी बहाने एक नजर डालते हैं बॉलीवुड की उन हस्तियों पर जिनका नाम राजनीति से जुड़ा लेकिन ये पारी उनकी लंबी नहीं चल पाई।
अगर सबसे छोटी चुनावी पारी की बात करें तो वह रही हरियाणा की मशहूर डांसर सपना चौधरी की। सपना का राजनीतिक करियर केवल एक दिन का ही रहा। पहले ये खबर आई कि सपना चौधरी ने कांग्रेस ज्वाइन कर ली और वह कांग्रेस के लिए प्रचार भी करेंगी। इस खबर को एक दिन हुआ ही था कि सपना ने अपने कांग्रेस में जाने की खबर को खारिज कर दिया और दिल्ली के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और भोजपुरी कलाकार मनोज तिवारी के संग कुछ तस्वीरेंं ट्वीटर पर पोस्ट की। जिससे ये साफ हो गया कि सपना भाजपा ज्वाइन करेंगी या नहीं लेकिन कांग्रेस के लिए प्रचार तो नहीं करने वाली।
इसके बाद बारी आती है लंबू जी और छोटू जी की। यानी की सदी के महानायक अमिताभ बच्चन और चिचि गोविंदा की। इन दोनों का राजनीतिक जीवन भी बहुत लंबा नहीं चल सका। अमिताभ बच्चन ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत भी हासिल की। लेकिन 2 साल में ही त्यागपत्र दे दिया। गोविंदा का राजनीतिक जीवन भी बहुत छोटा रहा।
इसके बाद बात करते हैं शत्रुघन सिन्हा की। इन्होंगने बॉलीवुड से राजनीति में कदम तो रख लिया लेकिन उनकी बॉलीवुड वाली हनक राजनीति में फीकी पड़ती दिखाई दी। भाजपा सरकार में मंत्री रह चुके शत्रुघ्न मोदी सरकार से नाराज हुए और भाजपा में उनको एक साइड हीरो की भूमिका में ही रहे जिसका परिणाम हुआ कि वह सार्वजनिक मंच से अपनी ही पार्टी और नेता के बारे में विवादित टिप्पणी करने लगे। इससे उन्हें मीडिया कवरेज मिली। लेकिन इस कवरेज का न तो उनके जीवन में कोई सकारात्मक असर पड़ा और न नकारात्मक। तमाम बुराइयां गिनाने के बाद भी न तो उन्होंने भाजपा छोड़ी और न भाजपा से वह निकाले गए। टिकट टिकट बंटवारे के अंतिम दिनों में जब उन्हें टिकट नहीं मिलता दिखाई देने लगा तो पार्टी छोड़ दी और कांग्रेस में शामिल हो गए।
राज बब्बर भी ऐसा ही एक नाम है जो कांग्रेस के वफादार बनकर पार्टी में डटे तो हैं और उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी हैं। लेकिन उनकी राजनीतिक जीवन की कोई खास उपलब्धि दिखाई नहीं देती। ऐसा ही राजनीतिक जीवन जया बच्चन, जयाप्रदा और धर्मेन्द्र का और अब नया नाम धर्मेन्द्र के सुपुत्र सनी देओल का है। सनी पंजाब के गुरुदासपुर सीट से भाजपा के टिकट पर इस बार चुनाव लड़ रहे हैं। देखना है कि सनी कितने समय तक राजनीति में टिक पाते हैं।
बॉलीवुड की मुख्य धारा से राजनीति की मुख्य धारा का सफर अगर कोई तय कर सका है तो वह सुनील दत्त हैं। जिन्होंने नरगिस की मृत्यु के बाद सक्रिय राजनीति में कदम रखा और 1984 से 2004 तक मुंबई उत्तर पश्चिम सीट से लड़ते रहे और जीतते भी रहे। उन्होंने राजनीति में भी वही स्थान हासिल किया जो उनका फिल्मों में था। विनोद खन्ना भी दूसरों की अपेक्षा राजनीति में ज्यादा सक्रिय होकर काम कर सके।
इनके अलावा गुल पनाग आम आदमी पार्टी की तरफ से चंडीगढ़ से 2014 में फिल्मों की मॉर्डन मां किरण खेर को टक्कर दी लेकिन किरण खेर से सामने वह टिक नहीं पाई। अस बार के चुनाव लोकसभा चुनाव में ये दोनों ही हस्तियां चुनावी मैदान से गायब हैं। अब चुनाव होने तक और कौन कौन से बॉलीवुड सितारे इस लिस्ट में शामिल होते हैं यह देखने वाली बात रहेगी। लेकिन हॉलीवुड स्टारर्स का राजनीति में जो कद रह चुका है वह बॉलीवुड स्टार्स अभी तक नहीं हासिल कर पाए हैं।

