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ईरानी राष्ट्रपति की हवाई दुर्घटना में मृत्यु

 

ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की गत् सप्ताह एक हैलिकॉप्टर दुर्घटना में हुई मौत ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। बीते दिनों इजराइल के खिलाफ अपने तल्ख बयानों के चलते चर्चा में आए इब्राहिम के समर्थक इस दुर्घटना को अमेरिका और इजराइल की साजिश बता रहे हैं। इजराइल में इब्राहिम की मृत्यु बाद जश्न मनाए जाने के समाचारांे ने इस प्रकार के आरोपों को पुख्ता करने का काम किया है

ईरानी राष्ट्रपति के हैलिकॉप्टर क्रैश होने और दो दिन बाद उनकी मौत की पुष्टि होने के साथ ही दुनिया भर में हड़कंप मच गया है। साल 2021 में राष्ट्रपति बने 63 वर्षीय इब्राहिम रईसी ईरान के कट्टरपंथी नेताओं में से एक रहे हैं। ईरानी राष्ट्रपति की इस तरीके से हुई मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां ईरान के लोग जश्न मना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सवाल उठ रहे हैं कि क्या ईरानी राष्ट्रपति का हैलिकाप्टर क्रैश होना दुर्घटना है या फिर हत्या? ऐसे में प्रश्न यह भी उठ रहे हैं कि मुल्क की बागडोर अब किसके हाथ में होगी। 19 मई को हुए इस हादसे में ईरान के राष्ट्रपति के साथ विदेश मंत्री और अन्य 7 लोगों की मौत हुई है, हैलिकॉप्टर में कुल 9 लोग सवार थे। राष्ट्रपति के साथ-साथ ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीर-अब्दुल्लाहियन और ईरान के पूर्वी अजरबैजान प्रांत के गवर्नर मलिक रहमती, पायलट, सुरक्षा प्रमुख समेत क्रू के सदस्य भी मारे गए हैं।

ईरानी राष्ट्रपति रईसी अजरबैजान में किज कलासी और खोदाफरिन बांध का उद्घाटन करने गए थे। उद्घाटन बाद वो तबरेज शहर की ओर जा रहे थे। तबरेज ईरान के पूर्वी अजरबैजान प्रांत की राजधानी है। इसी दौरान रास्ते में किसी जगह पर हैलिकॉप्टर दुर्घटना का शिकार हुआ। जहां हैलिकाप्टर ने हार्ड लैंडिंग की, वह इलाका तबरेज शहर से 50 किलोमीटर दूर वर्जेकान शहर के पास है। घटना के दौरान मौसम काफी खराब था, यह हादसा अजरबैजान के ऊंची पहाड़ियों के बीच हुआ। रूस ने तत्काल बचाव कार्यों के लिए 47 विशेषज्ञों की टीम और एक हैलिकॉप्टर भेजा। इसके अतिरिक्त यूएई ने भी मदद की पेशकश की थी।

सवालों के घेरे में इजरायल-अमेरिका
सोशल मीडिया पर सवाल उठाया जा रहा है कि यह कैसे हो सकता है कि काफिले के दो हैलिकॉप्टर सही सलामत पहुंच गए और रईसी का ही हैलिकॉप्टर क्रैश का शिकार बना? ईरानी राष्ट्रपति की हादसे में मौत ऐसे समय में हुई है जब बीते दिनों ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष देखने को मिला था। दरअसल सीरिया में ईरान के वाणिज्य दूतावास पर हुए हमले का इल्जाम इजराइल पर लगाया गया था जिसकी जवाबी कार्रवाई करते हुए इसी साल अप्रैल में ईरान ने इजरायल पर ड्रोन और मिसाइल से हमला किया था। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि इस हादसे को अंजाम इजरायल द्वारा दिया गया है। हालांकि इजरायल ने रईसी की मौत के पीछे अपना हाथ होने से इनकार कर दिया है।

इजरायल के अलावा अमेरिका भी सवालों के घेरे में है। ईरान के पूर्वी विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जारिफ ने इस घटना को अंजाम देने के पीछे अमेरिकी प्रतिबंधों को जिम्मेदार बताया है। मोहम्मद जवाद ने कहा कि ‘इस दिल दुखाने वाली घटना के कारणों में से एक अमेरिका है। अमेरिका ने एविएशन इंडस्ट्री को ईरान को कुछ भी बेचने पर प्रतिबंध लगाया हुआ था, इसी कारण राष्ट्रपति और उनके साथियों को शहादत देनी पड़ी।

अमेरिका का यह अपराध ईरानी लोगों की याददाश्त और इतिहास में दर्ज रहेगा।’ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जब इब्राहिम रईसी का हैलिकॉप्टर क्रैश हुआ था तो ईरान की ओर से मदद मांगी गई थी, लेकिन अमेरिका ने कोई मदद नहीं की। 20 मई को अमेरिका ने इसी संदर्भ में कहा कि ईरान सरकार ने हमसे मदद मांगी थी। हमने ईरानी सरकार को बताया था कि हम मदद के लिए तैयार हैं, जैसा कि हम किसी भी विदेशी सरकार के ऐसे हालात में मदद मांगने पर करते हैं। लेकिन लॉजिस्टकल कारणों से हम मदद करने में असमर्थ रहे। इसके अलावा मीडिया के पूछने पर अमेरिकी रक्षामंत्री लॉयड ऑस्टिन ने कहा कि हैलिकॉप्टर क्रैश में अमेरिका का कोई हाथ नहीं है।
ईरानी राष्ट्रपति की मौत पर किसने क्या कहा

ईरानी राष्ट्रपति की मौत और इस घटना को लेकर ईरान के सर्वाेच्च नेता अयातोल्लाह खामेनेई ने कहा कि ईरान का प्रशासन इस हादसे से प्रभावित नहीं होगा। लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं है, सरकार के काम प्रभावित नहीं होंगे। इस हादसे के बाद खामेनई द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के साथ आपात बैठक भी की गई है। इस घटना को लेकर भारत ने भी शोक व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि ‘राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की मौत की खबर से स्तब्ध और उदास हूं, भारत-ईरान के रिश्तों को मजबूत करने के लिए उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। ईरान के लोगों और रईसी के परिवार से शोक प्रकट करता हूं। इस दुख की घड़ी में ईरान भारत के साथ खड़ा है।’ वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि ‘माननीय राष्ट्रपति सैयद इब्राहिम रईसी के हैलिकॉप्टर क्रैश होने के बारे में ईरान से परेशान करने वाली खबर सुनी। हमारी दुआएं और शुभकामनाएं माननीय राष्ट्रपति रईसी और पूरे ईरानी राष्ट्र के साथ हैं।’

ईरानी राष्ट्रपति के मौत का कितना पड़ेगा प्रभाव

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रईसी के मारे जाने की स्थिति में ईरान की विदेश या घरेलू नीतियों पर कम ही असर पड़ेगा। दरअसल ईरान में सर्वाेच्च नेता के पास ही सबसे ज्यादा ताकत होती है। सर्वाेच्च नेता ही नीतियों को तय करता है। हालांकि रईसी को खामेनेई के उत्तराधिकारी के तौर पर भी देखा जा रहा था लेकिन रईसी को ईरानी गंभीरता से नहीं लेते थे। इसी कारण 2022 में जब विरोध-प्रदर्शन हुए तो उनके खिलाफ नारे कम ही सुनाई दिए। प्रदर्शनकारियों के निशाने पर खामेनेई रहे थे।

2021 में राष्ट्रपति बने 63 वर्षीय रईसी ईरान के कट्टरपंथी नेताओं में रहे हैं, जिन्हें सुप्रीम लीडर खामेनेई के उत्तराधिकारी के रूप में भी देखा जा रहा था। वह रूढ़िवादी के प्रभुत्व वाले ईरानी प्रतिष्ठान में फिट बैठते थे। लेकिन अब उनके निधन के बाद सभी की निगाहें फिर से खामेनेई पर हैं कि वे राष्ट्रपति पद के लिए किसको नियुक्त करेंगे। ईरानी परिषद राष्ट्रपति की मृत्यु के 50 दिनों के भीतर नए राष्ट्रपति चुनाव का चुनाव किया जाएगा। माना जा रहा है कि सर्वाेच्च नेता अली खामेनेई के करीबी माने जाने वाले 68 वर्षीय मोहम्मद मोखबर को राष्ट्रपति बना सकते हैं। अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में 68 वर्षीय मोहम्मद मोखबर संसद अध्यक्ष और न्यायपालिका प्रमुख सहित तीन सदस्यीय परिषद का हिस्सा होंगे। मोहम्मद मोखबर, सर्वाेच्च नेता अली खामेनेई के करीबी माने जाते हैं जो सभी मामलों में अंतिम अधिकार रखते हैं। गौरतलब है कि साल 2021 में रईसी के राष्ट्रपति चुने जाने पर मोखबर को पहले उपराष्ट्रपति के रूप में नियुक्त किया गया था। मोखबर पहले निवेश कोष ‘सेताड’ के प्रमुख थे। परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल गतिविधियों में कथित संलिप्तता के लिए 2010 में यूरोपीय संघ ने उनपर प्रतिबंध भी लगाया था। हालांकि दो साल बाद प्रतिबंध हटा दिया गया था। मोहम्मद मोखबर वर्तमान में ईरान के सर्वोच्च परिषद् के सदस्य हैं।

इब्राहिम रईसी की मौत पर इजराइल में जश्न

‘द टाइम्स ऑफ इजरायल’ की एक रिपोर्ट मुताबिक इजराइल में विपक्ष के नेता एविगडर लिबरमैन का कहना है कि ‘रईसी की मौत से इसराइल को नीतियों के मसले पर किसी बदलाव की कोई उम्मीद नहीं है।’ उन्होंने कहा कि हमारे लिए रईसी की मृत्यु मायने नहीं रखती, इससे इजरायल के रुख पर कोई असर नहीं होगा। इसमें कोई शक नहीं है कि रईसी एक क्रूर आदमी थे। हम उनकी मौत पर आंसू नहीं बहाएंगे। खबरों अनुसार एक महीने पहले वो हमें धमका रहे थे कि अगर इजरायल ने हमला किया तो वो बचेगा नहीं और अब वो खुद इतिहास में धूल का कण बनकर रह गए हैं। इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स में उन लोगों की टिप्पणियों को भी जगह दी गई जिन्होंने रईसी के मौत को इजरायल के लिए अच्छी खबर माना है। बीबीसी की एक रिपोर्ट अनुसार इजरायली मीडिया के किसी खबर में रईसी को कसाई कहा गया है तो किसी में दुनिया के सबसे नफरती आदमी की मौत का शीर्षक दिया गया है।

तुर्की की न्यूज एजेंसी ‘अनादोलू’ की रिपोर्ट अनुसार रईसी की मौत पर इसराइल के नेताओं ने जश्न मनाया है। इजरायली विरासती मंत्री हेरिटेज मिनिस्टर एमिचाय एलीयाहू ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर वाइन के गिलास के साथ एक तस्वीर पोस्ट करते हुए चीयर्स लिखा है। वे लिखते हैं कि ‘वो पागल लोग जो कल रात तक पीएम नेतन्याहू की मौत चाह रहे थे और दक्षिणपंथी लोग चाह रहे हैं कि हम ईरान के उस कातिल की मौत का जश्न ना मनाएं।’

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