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किसान दिवस पर सपा साधेगी पश्चिमी यूपी में समीकरण 

आज किसान दिवस है। आज के दिन देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का जन्म हुआ था। ऐसे में जब देश में किसानों के मुद्दों पर राजनीतिक दल सक्रिय है तो ऐसे में स्वाभाविक है कि किसान दिवस को उत्सव की तरह मनाया जायेगा। हुआ भी यही है। समाजवादी पार्टी ने इस दिन किसानों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को सुना है। क्योकि 2022 में विधानसभा चुनाव होने है। ऐसे में हर कोई राजनीतिक दल किसानों को अपने पाले में लाने के लिए भरपूर प्रयास कर रहे है। समाजवादी पार्टी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के समीकरण साधने के लिए यहां के किसान वर्ग खासकर गुर्जर और जाट को लुभाने की कोशिश शुरू कर दी है। हालाँकि सपा पहले से ही ‘किसान यात्रा’ के चलते गावों में जाकर उन्हें केंद्र सरकार के द्वारा बनाए गए किसान बिलों की खामिया और अपनी पार्टी की खुबिया गिना रही है।

यह भी जगजाहिर है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट और गुर्जर समीकरण के जरिए जरूर सपा और लोकदल अपना सियासी किला मजबूत करने की कोशिश करती रही है। लेकिन मुजफ्फरनगर दंगे के बाद से समाजवादी पार्टी और लोकदल दोनों की राजनीति पश्चिम यूपी से खत्म हो गई हैं। ऐसे में दोनों ही पार्टियां के बीच नजदीकियां बढ़ी हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव कह चुके हैं कि वो इस बार के चुनाव में बड़ी पार्टियों के बजाय छोटे दलों के साथ गठबंधन करेंगे।

यहां यह भी बताना जरुरी है कि हाल ही में हुए उपचुनाव में चौधरी अजित सिंह की पार्टी लोकदल को सपा ने बुलंदशहर सीट पर समर्थन किया था। इसका यह संकेत हैं कि आगे भी वह अजित सिंह के साथ तालमेल कर सकते हैं। अजित सिंह पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह बेटे हैं और मौजूदा राजनीतिक माहौल में अपने राजनितिक वजूद के बचाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में सपा प्रमुख चरण सिंह की जयंती के जरिए जाट समुदाय के बीच अपनी जगह बनाना चाहते हैं। याद रहे कि पश्चिम यूपी की बड़ी किसान आबादी जाट समुदाय की है।  चौधरी चरण सिंह खुद भी जाट समुदाय से आते थे और किसानों के मसीहा माने जाते थे।

गुर्जर समाज की अगर बात करें तो समाजवादी पार्टी से इस समाज के एक दिग्गज नेता सुरेंद्र नागर पार्टी छोड़कर भाजपा में चले गए। इसी के साथ ही समाज के दूसरे सर्वमान्य नेता नरेंद्र भाटी के अनुज गौतम बुद्ध  नगर के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष बिजेंद्र भाटी भी गत लोकसभा चुनावों में भाजपा में शामिल हो गए थे। हालाँकि विधान परिषद् सदस्य नरेंद्र भाटी अभी भी समाजवादी पार्टी में ही है। वह कहते है कि आगामी विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी और लोकदल मिलकर चुनाव लड़ सकती है। फिलहाल किसान अपने आपको छला हुआ महसूस कर रहा है। भाजपा ने इस वर्ग के साथ तीन बिल बनाकर सौतेला रवैया अपनाया है। समाजवादी पार्टी किसानों के साथ हो रहे इस अन्याय का खुलकर विरोध करेगी।

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