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डीपफेक कंटेंट का फैलता मकड़जाल

वर्तमान में विज्ञान काफी तरक्की कर चुका है। इंटरनेट और एआई (AI) भी इसी का एक उदाहरण है जिसने इस बड़ी दुनिया को समेट दिया है। विज्ञान ने इन चीजों का आविष्कार मनुष्य जीवन की कई समस्याओं को सरल और सहज बनाने के लिए किया है । जिसका प्रयोग एक ओर तो मनुष्य शिक्षा , मनोरंजन , उद्योग जैसी कई चीजों में सुधार लाने जैसे अच्छे कार्यों के लिए करता है। तो वहीं दूसरी और एक अन्य वर्ग ऐसा भी है जो विज्ञान की दुनिया की इन नयी तकनीकों का गलत फायदा उठाते हैं।

 

जो धीरे – धीरे इसका इस्तेमाल लोगों को बेइज्जत या ब्लैकमेल जैसी चीजों के लिए भी करने लगे हैं। इसे डीपफेक भी कहा जाता है। कुछ समय पहले ऐसा ही हुआ साउथ अभिनेत्री रश्मिका मंदाना के साथ। जिनके एक फर्जी वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। जिसे देख खुद रश्मिका मंदना भी दंग रह गयी। जिसमें वह एक काले रंग जा जिम शूट पहने लिफ्ट में आती नजर आ रही हैं। दरअसल रश्मिका मंदाना का ये जो वीडियो वायरल हुआ वो उनका था ही नहीं। यह वायरल वीडियो सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर जारा पटेल का था। जिसे एडिट करके ज़ारा के चेहरे को रश्मिका मंदाना के चेहरे से बदल दिया गया था।

 

 

जारी की गई एडवाइजरी

 

रश्मिका मंदना के इस फर्जी वीडियो के वायरल होने के बाद से ही ‘डीपफेक’ पर फिर बहस छिड़ गयी है। हालांकि इस वीडियो के सामने आने के बाद ही केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि डीपफेक वीडियो गलत सूचना का सबसे खतरनाक रूप है। ऐसे वीडियोज पर सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
रिपोर्ट में कहा गया कि एडवाइजरी के अनुसार सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्मों को इस तरह की सामग्री हटाने के लिए 24 घंटों का समय दिया गया है। लेकिन सोशल मीडिया एक ऐसी दुनिया, जहां पल भर में कोई वीडियो या फोटो जैसी चीजे लाखों-करोड़ों लोगों द्वारा देखी व  री-पोस्‍ट की जा चुकी होती है। ऐसे में अगर 24 घंटों में कोई पोस्ट आदि चीजें हटाने की एडवाइजरी जारी कर भी दी जाती है तो इसका अधिक फायदा नहीं होता है। इसके अलावा अमिताभ बच्चन ने भी वीडियो को शेयर करते हुए कहा कि इस पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

 

क्या है डीप फेक

 

डीपफेक, दो शब्दों से मिलकर बना है ‘डीप लर्निंग’ और ‘फेक’। डीप लर्निंग एआई का एक प्रकार है, जो डाटा से सीखने के लिए आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क्स का इस्तेमाल करती है। इसके तहत किसी वीडियो, ऑडियो या तस्‍वीर को एडिट करके फर्जी कॉन्टेंट वायरल किया जाता है। डीपफेक कंटेंट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से बनाया जाता है। डीपफेक में डीप लर्निंग द्वारा किसी वीडियो, इमेज या डिजिटल कंटेंट पर किसी अन्‍य का चेहरा अथवा आवाज बदलकर उसे वायरल किया जाता है। जैसा रश्मिका मंधाना के केस में हुआ।

 

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