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सपा का हिंदुत्व कार्ड : अखिलेश के मंदिर दौरों से BJP में खलबली

साल शुरू होते ही समाजवादी पार्टी ने अपने कलेवर और तेवर बदलने शुरू कर दिए है। 8 जनवरी को अखिलेश यादव ने वर्ष 2022 में होने वाले चुनावो की रिहर्सल शुरू कर दी है। इस बार वह अपने माई ( मुस्लिम – यादव ) समीकरण के भरोसे ही चुनाव नहीं लड़ रहे है बल्कि अपनी नई छवि गढ़ रहे है। जिसके चलते यादव  बार हिंदुत्व पर ध्यान केंद्रित कर दिया है। इसे सपा का हिंदुत्व कार्ड कहा जा रहा है। इसके तहत ही सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव मंदिर – मंदिर की डगर पर है। वह मंदिरों में जाकर ना केवल धार्मिक गुरुओ से मिल रहे है बल्कि हिंदू मतो को भी अपनी और आकर्षित कर रहे है। फिलहाल, अखिलेश यादव के इस कदम से भाजपा बैचेन हो गयी है। भाजपा की बैचेनी प्रदेश के हिंदू वोटों के बटने को लेकर बढ़ गई है।
इसको इससे समझा जा सकता है कि 8 साल पहले जिस चित्रकूट से भाजपा ने चुनावी दौरा शुरू किया था , अखिलेश यादव ने उसी चित्रकूट से 8 जनवरी को चुनावी संखनाद कर दिया है। यहां के कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा करके अखिलेश यादव ने हिंदू तीर्थो पर भी अपना एकाधिकार जता दिया। यहां यह भी बताना जरुरी है कि इससे पहले नया साल शुरू होने के दूसरे दिन यानी 2 जनवरी को अखिलेश यादव ने अयोध्या पहुंचकर सबको हैरत में डाल दिया था। यहां अखिलेश ने सभी धर्मगुरुओ से मुलाकात की और मिशन 2022 के लिए आशीर्वाद लिया।
इसके बाद अखिलेश यादव 20 जनवरी के दिन जा पहुंचे श्रावस्ती। श्रावस्ती में उन्होंने भगवान बुद्ध के दर्शन किए। इसके बाद समाजवादी पार्टी के युवा तुर्क ने फरुखाबाद का रुख किया। 24 जनवरी को अखिलेश यादव फरुखाबाद पहुंचे। यहां उन्होंने जैन धर्म के तेरहवें तीर्थांकर भगवान विमलनाथ के मंदिर में सर झुकाया और अपनी पार्टी को फिर से सत्ता में लाने की मन्नत मांगी। जैसे जैसे अखिलेश यादव मंदिरो के दौरे कर रहे है सत्तासीन भाजपा की धड़कने बढ़ रही है।
अखिलेश यादव के मंदिर-मंदिर दौरों से भाजपा में खलबली है। यही वजह है कि योगी सरकार में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने बांदा में कहा, ‘हम 1990 को नहीं भूल सकते हैं। अयोध्या में रामलला की भूमि पर रामभक्तों को ढूंढ-ढूंढकर गोली मारी गई थी। जो भगवान राम को काल्पनिक कहते थे, वे सब अब मंदिरों में घूम रहे हैं।’
उधर , दूसरी तरफ हिंदू कार्ड खेलने के चक्कर में अखिलेश यादव पर प्रदेश के मुस्लिमों के बड़े नेता को नजरअंदाज करने का भी आरोप लग रहा है। कहा जा रहा है कि पश्चिमी उत्तर  मुस्लिम नेता आजम खान के मामले पर भी समाजवादी पार्टी का सत्तासीन योगी सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख नहीं रहा।
इसके पीछे भी अखिलेश यादव का सॉफ्ट हिंदुत्व ही एक कारण बताया जा रहा है। जिसके चलते सपा ने इस मामले पर पार्टी के स्टेंड स्पष्ट नहीं किया। हालांकि पिछले दिनों जब यह चर्चा जोरों पर चली की असदुद्दीन ओवैसी आजम खान से मुलाकात कर सकते है और वह समाजवादी पार्टी छोड़ सकते है तो अखिलेश यादव उनके रामपुर स्थित आवास पर पहुंचे थे।

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