अमृतसर में निरंकारी डेरे पर हुए ग्रेनेड हमले को लेकर पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत ने कहा कि पंजाब में आतंकवाद के फिर से सिर उठाने का कोई खतरा नही है। लेकिन चौकस रहने की जरूरत है। सेना प्रमुख पंजाब में विभिन्न स्थानों पर कुछ लोगों की गिरफ्तारी, बरामदगी तथा अन्य देशों से अलगवावादी एवं खालिस्तान समर्थक तत्वों द्वारा शुरू किए गए अभियान रेफरेंडम 2020 के बाद पंजाब में आतंकवाद के फिर से सिर उठाने के खतरे के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे हैं। लेकिन वहीं दूसरी तरफ गृह मंत्रालय ने हाल ही में एक संसदीय समिति से कहा था कि भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए सिख युवाओं को पाकिस्तान स्थित आईएसआई के आदेश पर प्रशिक्षित किया जा रहा है। यही नहीं, बल्कि सिख युवकों को बरगलाकर अपराध की दलदल में धकेला जा रहा है। इसके लिए विदेशों में बसे सिख मदद कर रहे हैं। यह वही लोग हैं जो कभी 80 के दशक में खालिस्तान के समर्थक रहे हैं। इनके 50 सोशल नेटवर्किंग ग्रुप चल रहे हैं। कनाडा, अमेरिका और यूरोप में बैठे कई आतंकी संगठन भी ऐसे कøत्यों को अंजाम दिला रहे हैं। पता चला है कि विदेशों में रह रहे पंजाबी मूल के खालिस्तानी विचारधारा से जुड़े लोगों ने 2020 में पृथक खालिस्तान राष्ट्र के मुद्दे पर जनमत संग्रह चलाने के लिए अभियान चलाया हुआ है।
याद रहे कि रविवार को अमृतसर से करीब 10 किलोमीटर दूर एक गांव में स्थित निरंकारी भवन पर हुए संदिग्ध चरमपंथी हमले में तीन लोग मारे गए हैं। जबकि करीब 20 लोग घायल हो गए हैं। चश्मदीदों के मुताबिक दो नकाबपोश हमलावर मोटरसाइकिल पर आए। उनमें से एक ने निरंकारी मिशन भवन के गेट पर तैनात सेवादार पर पिस्तौल तानी जबकि दूसरा भवन के अंदर चला गया। भवन में सत्संग चल रहा था। हमलावर ने मंच की तरफ ग्रेनेड फेंका जिसके धमाके में तीन लोग मारे गए और 20 घायल हो गए। इस मामले में भारतीय युवक कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे और अगेंस्ट ऑफ टेरेरिस्ट के संयोजक मनिंदरजीत सिंह बिट्टा के अनुसार आतंकी चाहते हैं कि जगतार सिंह हवारा को अकाल तख्त का जत्थेदार बनाया जाए। जिससे खालिस्तान को हवा मिल सके। लेकिन पंजाब के लोग ऐसा हरगिज नहीं होने देंगे। पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसी के संचालन में देश और विदेश में बैठे आतंकियों को मुंह तोड़ जवाब दिया जाएगा।