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भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण होगा उत्तर का मैदान

भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल और दक्षिणी राज्यों में अपना जनाधार बढ़ाने में जिस तरह जुटी हुई है, उससे ऐसा लगता है कि पार्टी 2019 के लिए कोई भी कमी नहीं रखना चहती। पार्टी इस कोशिश में दिखाई देती है कि यदि उत्तर भारत में वह 2014 जैसा प्रदर्शन न भी दोहरा पाए तो इसकी भरपाई दक्षिणी राज्यों से कर ली जाए। यही वजह है कि पार्टी बंगाल और दक्षिणी राज्यों में काफी सक्रिय है।
दरअसल, राजनीतिक विश्लेषक यह मान रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में राजनीतिक हालात भाजपा के लिए 2014 जैसे नहीं रहे। यदि  2019 के लोकसभा चुनाव में यहां सपा, बसपा, कांग्रेस और रालोद का गठबंधन हो गया तो भाजपा को उसी तरह कड़ी चुनौती मिल सकती है जैसे कि हाल में कुछ सीटों पर हुए उपचुनाव में हुआ।   हालांकि बीजेपी दावा कर रही है कि गठबंधन से उसको कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन यह भी सच है कि सहयोगी दलों के साथ 2014 की तरह 73 सीटें जीत पाना भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण है।
राजनीतिक पंडितों के मुताबिक भाजपा के रणनीतिकारों को भी अच्छी तरह अहसास है कि इस बार न सिर्फ उत्तर प्रदेश, बल्कि उत्तर भारत के बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों में भाजपा को 2014 जैसा प्रदर्शन दोहराने में नाकों चना चबाना पड़ सकता है। वे अंदर ही अंदर डरे हुए भी हैं। यही वजह है कि वे इसकी भरपाई के लिए दक्षिणी राज्यों आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल एवं केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी की कुल 130 सीटों पर खासा ध्यान दे रही है। इन राज्यों में क्षेत्रीय दलों से गठबंधन की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं।

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